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स्टडीः कोविड-19 के जोखिम को बढ़ा सकता है जंगलों की आग से निकला धुआं

हाल के वर्षों में जंगल में आग की घटनाओं में वृद्धि से वन्य-जीवों के साथ-साथ स्थानीय जैव-विविधता पर संकट बड़े पैमाने पर बढ़ा है। एक नये अध्ययन में पता चला है कि जंगल की आग का धुआं सार्स-कोव-2 वायरस, जो कोविड-19 संक्रमण के लिए जिम्मेदार है, के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

उल्लेखनीय है कि कुछ अन्य शोध अध्ययनों में वायु प्रदूषण को सार्स-कोव-2 की बढ़ती संवेदनशीलता से जोड़कर देखा गया है।

अमेरिका के रेनो, नेवाडा स्थित डेजर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (डीआरआई) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया है।

इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पता लगाने का प्रयास किया है कि जंगल की आग की घटनाओं के दौरान निकलने वाले धुएं का संबंध किस हद तक सार्स-कोव-2 संक्रमण में वृद्धि से हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने जंगल की आग के धुएं से निकले सूक्ष्म कण पीएम-2.5 और सार्स-कोव-2 परीक्षण में पॉजिटिव पाए जाने वाले मामलों की दर के बीच संबंधों का विश्लेषण करने के लिए विशिष्ट मॉडल्स का उपयोग किया है।

सार्स-कोव-2 परीक्षण से संबंधित डेटा नेवाडा के एकीकृत हेल्थ नेटवर्क रिनाउन हेल्थ से प्राप्त किए गए हैं।

पश्चिमी अमेरिका में वर्ष 2020 में जंगल की आग की घटनाओं के दौरान धुएं से प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त चरों जैसे – वायरस के सामान्य प्रसार, हवा के तापमान और कोविड-19 परीक्षणों की संख्या को नियंत्रित रखकर यह अध्ययन किया गया है।

गत वर्ष 16 अगस्त और 10 अक्तूबर के दौरान अमेरिका के नेवाडा के जंगलों में लगी आग के धुएं से निकले पीएम 2.5 कणों को कोविड-19 के मामलों में 17.7 प्रतिशत की वृद्धि के लिए जिम्मेदार पाया गया है।

उत्तरी नेवाडा के वाशो काउंटी में स्थित रेनो, सैन फ्रांसिस्को सहित आसपास के अन्य महानगरीय क्षेत्रों की तुलना में वर्ष 2020 में लंबे समय के लिए पीएम-2.5 के उच्च घनत्व के संपर्क में बना हुआ था।

सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र में 26 दिनों के विपरीत, रेनो में अध्ययन अवधि के दौरान 43 दिनों तक पीएम-2.5 का उच्च स्तर देखा गया है। इसी आधार पर माना जा रहा है कि जंगल की आग का धुआं सार्स-कोव-2 के प्रसार को बढ़ा सकता है। अध्ययन के निष्कर्ष ‘जर्नल ऑफ एक्सपोजर साइंस एंड एन्वायरमेंटल एपिडेमियोलॉजी’ (Journal of Exposure Science & Environmental Epidemiology) में प्रकाशित किए गए हैं।

प्रमुख शोधकर्ताओं में शामिल डैनियल केसर ने कहा है कि “इस अध्ययन में पाया गया है कि जब हम कैलिफोर्निया के जंगल की आग के धुएं से बुरी तरह प्रभावित थे, तो रेनो में कोविड-19 से पॉजिटिव होने की दर में काफी वृद्धि दर्ज की गई है।”

उन्होंने कहा है कि “ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हम विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर जंगल की आग की घटनाओं का सामना रहे हैं और कोविड-19 मामलों के बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है।

इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय पश्चिमी अमेरिका और कनाडा के जंगलों में लगभग 70 जगहों पर भयंकर आग लगी हुई है, जिसका धुआं मीलों दूर से देखा जा सकता है।

इसी प्रकार रूस के साइबेरिया क्षेत्र में भी जंगल की बेकाबू आग से स्थिति गंभीर होने की खबरें हैं। भारत के विभिन्न राज्यों में अक्सर जंगल में लगने वाली आग की घटनाएं होती रहती हैं। इस लिहाज से यह अध्ययन भारत के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।- इंडिया साइंस वायर

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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