पड़तालः ये भी तो रिस्पना के दुश्मन हैं

Rajesh Pandey

देहरादून। जेपी मैठाणी

देहरादून राजधानी में बहने वाली रिस्पना नदी को अतिक्रमण के बाद सबसे बड़ा खतरा कॉलोनियों के ड्रेनेज, बस्तिय़ों के खुले सीवरेज तथा नाला पानी चौक से कारगी तक नदी के जलागम क्षेत्र में चल रहे मोटर गैराज, वर्कशॉप और जीप, टैक्सी यूनियन के स्टैंड से है। हिमश्री डेवलपमेंट सॉल्युशन के एक सर्वेक्षण के अनुसार डीएल रोड, आर्यनगर, नालापानी, चूना भट्टा, एमडीडीए के नीचे नेहरू कॉलोनी,राजीव नगर, विधानसभा डिफेंस कॉलोनी, दीपनगर, केदारपुरम से दून यूनिवर्सिटी तक रिस्पना में मिलने वाली छोटी जलधाराओं में मोटर वर्कश़ॉप, सर्विस स्टेशन का गंदा कैमिकल, डिटरर्जेंट युक्त पानी मिलता है। अंततः रिस्पना इससे प्रदूषित हो रही है।ई

रिस्पना नदी कब्ज़ा कर विधान सभा के नजदीक बनाया गया टैक्सी ट्रेकर स्टैंड। फोटो- जेपी मैठाणी

सर्वे के अनुसार रोजाना रिस्पना पुल के पास जीप टैक्सी स्टैंड पर गाड़ियां धोई जाती हैं। एक गाड़ी पर 20 से 30 लीटर पानी खर्च होता है। रोजाना यहां से गढ़वाल, ऋषिकेश, हरिद्वार सहित कई इलाकों के लिए जीप, टैक्सी, ट्रैकर सवारियां लेकर रवाना होते हैं। एक सप्ताह में नदी में बने स्टैंड पर लगभग 700 गाड़ियां धोए जाने का अनुमान है। इन पर लगभग 21 हजार लीटर पानी खर्च होता है, जो रिस्पना को ही गंदा करता है। इसके साथ ही गैराजों से निकलने वाली गंदा पानी भी रिस्पना में ही बहता है।

रिस्पना पर किसी की नजर नहीं 

रिस्पना पुल से होकर रोजाना वीवीआईपी और वीआईपी विधानसभा या शहर से बाहर की ओर रुख करते हैं, लेकिन  दून की एेतिहासिक विरासत रिस्पना की दुर्दशा की ओर ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं की जा रही है। अब रिस्पना पुल के दोनों ओर नई जालियां लगा दी गई हैं, ताकि कोई रिस्पना में कूड़ा करकट न फेंक सके। साथ ही रिस्पना के लिए नीति बनाने वाले और ब्यूरोक्रेट्स आते जाते रिस्पना को न देख पाएं।

रिस्पना की जलधारा को – पुश्तों के सहारे मोड़कर जमीन पर कब्ज़ा

ये प्रकृति के उपहार जीने के लिए जरूरी

संविधान में दिए मूल अधिकार के तहत वर्णित है कि भारत के नागरिकों को अपने पर्यावास में जंगल, टैंक, तालाब, नदी और पर्वतों के साथ पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखना है। 25 जुलाई 2003 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर जिले के हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी एवं अन्य के वाद में सुनाए फैसले में कहा कि यह बहुत गहराई से ध्यान रखने वाली बात है कि समुदायों के प्राकृतिक संसाधन जैसे – जंगल, पानी के कुंड, तालाब,  पहाड़ियां, टापुओं औऱ पहाड़ों आदि प्रकृति के उपहार हैं और ये संवेदनशील पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखते हैं, इनको विधिवत एवं सही वातावरण के साथ सुरक्षित किया जाना जरूरी है। ये मनुष्य के जीवन के लिए जरूरी स्वस्थ वातावरण का निर्माण करते हैं। प्रकृति के ये उपहार व्यक्तियों औऱ समुदायों के लिए स्वस्थ एवं सही जीवन यापन करने के लिए आवश्यक हैं। इसको भारत के संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार में वर्णित अनुच्छेद 21 के आलोक में देखा जाना चाहिए।

हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी एवं अन्य के मामले के अनुसार सार्वजनिक संपत्ति के एक तालाब को कब्जा लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि तालाब की भूमि पर बनाए गए मकानों को छह माह के भीतर हटा दिया जाए। अगर एेसा नहीं करते हैं तो प्रशासन को इन निर्माण को ढहाकर कब्जा ले लेना चाहिए। राज्य को पुनः उस स्थान पर तालाब को पुनर्स्थापित कर देना चाहिए। इससे पुनः उस क्षेत्र में पारिस्थितिकीय संतुलन होगा, साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नया संदेश जाएगा।

 

देहरादून की दूषित रिस्पना पर प्रधानमंत्री ने की मन की बात

 

 

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *