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GI Tag for Ponduru Khadi: मछली के जबड़े से साफ होने वाली दुनिया की एकमात्र हस्तनिर्मित खादी

केवीआईसी पोंडुरु खादी से जुड़े कारीगरों को सम्मानित करेगा और वैश्विक पहुंच बढ़ाएगा

GI Tag for Ponduru Khadi: नई दिल्ली, 17 जनवरी, 2026ः आंध्र प्रदेश की सुप्रसिद्ध पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री ने इसका पंजीकरण खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के पक्ष में किया है। यह जीआई मान्यता इस दुर्लभ हस्तकारी वस्त्र को कानूनी संरक्षण प्रदान करती है और इसकी विशिष्ट प्रामाणिकता को सुरक्षित रखती है।

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गांव में तैयार होने वाले पारंपरिक सूती कपड़े पोंडुरु खादी अपनी बारीक बुनाई और अनोखी निर्माण प्रक्रिया के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

  • इसे स्थानीय भाषा में ‘पटनुलु’ कहा जाता है। यह पूरी तरह से हस्तनिर्मित सूती कपड़ा है।

  • इस कपड़े को बनाने के लिए विशेष रूप से इसी क्षेत्र में उगाई जाने वाली पहाड़ी कपास, पुनासा कपास और लाल कपास का उपयोग किया जाता है।

  • पोंडुरु खादी की सबसे आश्चर्यजनक विशेषता इसकी सफाई, कताई और बुनाई प्रक्रिया है, जो हाथों से की जाती है, जिससे सदियों पुराना पारंपरिक कौशल सुरक्षित रहता है।

  • कपास को साफ करने के लिए ‘वालुगा’ मछली के जबड़े की हड्डी का उपयोग किया जाता है। पूरी दुनिया में कपास की सफाई की यह तकनीक केवल यहीं देखने को मिलती है।

  • यह खादी अपने उच्च धागा संख्या (यार्न काउंट) के लिए जानी जाती है। इसका काउंट लगभग 100 से 120 तक होता है, जो इसकी उत्कृष्ट और महीन गुणवत्ता का प्रमाण है।

GI Tag for Ponduru Khadi: भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, केवीआईसी भारत के पारंपरिक खादी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर उन्होंने गहरा संतोष व्यक्त किया।

GI Tag for Ponduru Khadi: उन्होंने पोंडुरु खादी की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए इसे भारत की समृद्ध विरासत का अनमोल हिस्सा बताया। यह पारंपरिक सूती कपड़ा अपनी बारीक बुनाई और अनोखी निर्माण प्रक्रिया के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने पोंडुरु खादी के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए इसे भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मिलने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पोंडुरु खादी को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दिलाएगी। जीआई टैग मिलने से इस क्षेत्र के पारंपरिक कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जीआई टैग मिलने के बाद अब पोंडुरु खादी को नकली और सस्ते उत्पादों से कानूनी संरक्षण मिलेगा। इससे उपभोक्ताओं को ‘शुद्ध और प्रामाणिक’ खादी की गारंटी मिलेगी और कारीगरों को उनके कठिन परिश्रम का सही मूल्य प्राप्त हो सकेगा। स्रोत- पीआईबी

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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