
GI Tag for Ponduru Khadi: मछली के जबड़े से साफ होने वाली दुनिया की एकमात्र हस्तनिर्मित खादी
केवीआईसी पोंडुरु खादी से जुड़े कारीगरों को सम्मानित करेगा और वैश्विक पहुंच बढ़ाएगा
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गांव में तैयार होने वाले पारंपरिक सूती कपड़े पोंडुरु खादी अपनी बारीक बुनाई और अनोखी निर्माण प्रक्रिया के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
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इसे स्थानीय भाषा में ‘पटनुलु’ कहा जाता है। यह पूरी तरह से हस्तनिर्मित सूती कपड़ा है।
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इस कपड़े को बनाने के लिए विशेष रूप से इसी क्षेत्र में उगाई जाने वाली पहाड़ी कपास, पुनासा कपास और लाल कपास का उपयोग किया जाता है।
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पोंडुरु खादी की सबसे आश्चर्यजनक विशेषता इसकी सफाई, कताई और बुनाई प्रक्रिया है, जो हाथों से की जाती है, जिससे सदियों पुराना पारंपरिक कौशल सुरक्षित रहता है।
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कपास को साफ करने के लिए ‘वालुगा’ मछली के जबड़े की हड्डी का उपयोग किया जाता है। पूरी दुनिया में कपास की सफाई की यह तकनीक केवल यहीं देखने को मिलती है।
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यह खादी अपने उच्च धागा संख्या (यार्न काउंट) के लिए जानी जाती है। इसका काउंट लगभग 100 से 120 तक होता है, जो इसकी उत्कृष्ट और महीन गुणवत्ता का प्रमाण है।
GI Tag for Ponduru Khadi: भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, केवीआईसी भारत के पारंपरिक खादी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर उन्होंने गहरा संतोष व्यक्त किया।
GI Tag for Ponduru Khadi: उन्होंने पोंडुरु खादी की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए इसे भारत की समृद्ध विरासत का अनमोल हिस्सा बताया। यह पारंपरिक सूती कपड़ा अपनी बारीक बुनाई और अनोखी निर्माण प्रक्रिया के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने पोंडुरु खादी के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए इसे भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मिलने के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पोंडुरु खादी को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दिलाएगी। जीआई टैग मिलने से इस क्षेत्र के पारंपरिक कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जीआई टैग मिलने के बाद अब पोंडुरु खादी को नकली और सस्ते उत्पादों से कानूनी संरक्षण मिलेगा। इससे उपभोक्ताओं को ‘शुद्ध और प्रामाणिक’ खादी की गारंटी मिलेगी और कारीगरों को उनके कठिन परिश्रम का सही मूल्य प्राप्त हो सकेगा। स्रोत- पीआईबी












