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NFHS-5: उत्तराखंड क्यों पिछड़ गया नवजात बच्चों की सुरक्षा में

  • राजेश पांडेय

देहरादून। भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक हो गई है। 2020-21 के एनएफएचएस- 5 (National Family Health Survey – 5) के अनुसार, देश में प्रति हजार पुरुषों की तुलना में 1020 महिलाएं हैं। वहीं, उत्तराखंड की बात करें तो यहां महिलाओं की संख्या प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले 1016 है, जो 2015-16 के एनएफएचएस-4 के आंकड़े 1015 की तुलना में बढ़ी है।

पर, उत्तराखंड के मामले में हालिया रिपोर्ट का एक आंकड़ा चिंताजनक हालात की ओर इशारा करता है, वो है नवजात मृत्युदर (Neonatal mortality rate) का। इस सर्वे में प्रति हजार नवजात बच्चों की मृत्युदर के आंकड़े नियोनेटल मॉर्टेलिटी रेट (Neonatal mortality rate-NNMR) तथा इन्फेंट मॉर्टेलिटी रेट (Infant mortality rate -IMR) में दर्शाए हैं।

देखिए- उत्तराखंड एनएफएचएस-5

पहले यह जान लेते हैं कि एनएनएमआर और आईएमआर में क्या अंतर है। यूनिसेफ के अनुसार नियोनेटल पीरियड जीवन के शुरुआती 28 दिन है। ये 28 दिन किसी भी बच्चे के लिए सबसे कमजोर समय माने जाते हैं। बच्चों के लिए ये दिन सबसे अधिक जोखिम वाले होते हैं।

अब हम एनएफएचएस-5 की उत्तराखंड के संबंध में प्रस्तुत रिपोर्ट के आंकड़ों पर आपका ध्यान दिलाते हैं। 2020-21 की इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य में वर्ष 2015-16 में नियोनेटल मॉर्टेलिटी रेट (एनएनएमआर) 27.9 था, जो 2020-21 में बढ़कर 32.4 हो गया है।

यानी प्रति हजार पर नवजात बच्चों की मृत्यु दर 4.5 बढ़ी है। यह चिंताजनक आंकड़ा है और राज्य में जच्चा एवं बच्चा की स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी सेवाओं पर भी इशारा करता है।

उत्तराखंड में Neonatal mortality rate शहरी क्षेत्र 36.2 के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र 30.6 में कम है। वहीं Infant mortality rate शहरी क्षेत्रों (38.3) में ग्रामीण इलाकों (39.5) से कम है।

अब बात करते हैं इन्फेंट मॉर्टेलिटी रेट( Infant mortality rate -IMR) की, जिसके अनुसार जन्म से एक वर्ष के भीतर प्रति हजार पर मृत्यु की संख्या को Infant mortality rate से प्रदर्शित करते हैं। देखें- विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट

उत्तराखंड में इसका आंकड़ा थोड़ा सुखद है, इसमें थोड़ी कमी आई है। एनएफएचएस की 2015-16 की रिपोर्ट में यह 39.7 था, जो 2020-21 में घटकर  39.1 हो गया है। इसी तरह Under-five mortality rate (U5MR) का आंकड़ा जो वर्ष 2015-16 के में 46.5 था, घटकर वर्ष 2020-21 में 45.6 हो गया है।

देखिए- भारत एनएफएचएस-5

जबकि भारत में 2015-16 के Neonatal mortality rate 29.5 से घटकर 2020-21 में 24.9 हुआ है। इसमें 4.6 की कमी दर्ज हुई है, जो पूरे देश के लिहाज से सुखद बात है, पर यहां उत्तराखंड निराश करता है। वहीं देश में 2015-16 में Infant mortality rate (IMR) 40.7 की तुलना में 35.2 हुआ है, जिसमें 5.5 की कमी हुई है। उत्तराखंड में Neonatal mortality rate (32.4) देशभर की औसतन दर से अधिक है।

नवजात मृत्यु दर के कारण

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हालांकि वैश्विक नवजात शिशुओं की मृत्यु की संख्या 1990 में पांच मिलियन से घटकर 2019 में 2.4 मिलियन हो गई, लेकिन बच्चों को अपने पहले 28 दिनों में मृत्यु का सबसे बड़ा जोखिम का सामना करना पड़ता है।

2019 में, सभी अंडर -5 मौतों में से 47% नवजात अवधि में हुई, जिसमें जन्म के दिन लगभग एक तिहाई की मृत्यु हुई और जीवन के पहले सप्ताह के भीतर लगभग तीन चौथाई की मृत्यु हुई।

जन्म के पहले 28 दिन के भीतर जिन बच्चों की मृत्यु हो जाती है, वे जन्म के तुरंत बाद और जीवन के पहले दिनों में गुणवत्तापूर्ण देखभाल या कुशल देखभाल और उपचार की कमी से जुड़ी स्थितियों और बीमारियों से पीड़ित होते हैं।

समय से पहले जन्म, अंतर्गर्भाशयी संबंधी जटिलताएं (जन्म के समय श्वासावरोध या जन्म के समय सांस लेने में कमी), संक्रमण और जन्म दोष अधिकांश नवजात मृत्यु का कारण बनते हैं।

जिन महिलाओं को शिक्षित एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों से विनियमित पेशेवर दाइयों द्वारा प्रदान की जाने वाली देखभाल की निरंतरता प्राप्त होती है। उनके बच्चे को खोने की संभावना 16 फीसदी कम होती है और प्री-टर्म जन्म की संभावना 24 फीसदी कम होती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, समय पूर्व और जन्म के समय कम वजन, नवजात को संक्रमण तथा जन्म के समय श्वांस में अवरोध और जन्म आघात। वहीं एक से 59 महीने की उम्र में सभी मौतों के दो कारण हैं: निमोनिया और डायरिया रोग।

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Working Experience –25 Years of experience in Mass Media and content writing in Hindi.     Literary work- Two books in Hindi. One of them is Jungle mei Tak Dhinaa Dhin, which is a compilation  of 18 stories based on wildlife. Another one is Zindagi ka Tak Dhinaa Dhin. This book is with 7 Stories. These Stories presents the Human lifestyle and the entire system, where we live. Both books are copyright from copyright office Government of India. I am also working on the other two books and short stories. Blog writing and real-time coverage is my passion.    Initiative- Initiate a storytelling platform Tak Dhinaa Dhin. We are working in slums and Government schools. Our aim is to motivate children to write stories. We believe that imagination is must to reach near reality. We are motivating children on our digital platform also. Dugdugi is an other initiative for Creative Kids and Youth. Conducting a pathshaala for Slum's Children. Qualification- B.Sc. (Physics, Chemistry, Math), Bachlor of Journalism and LLB  Core competence- Content writing, Reporting and Editing.

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