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उन्नत प्रौद्योगिकी पर मिलकर काम करेंगे एएमयू और गूगल

इंडिया साइंस वायर

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और विश्व की प्रमुख तकनीकी कंपनी गूगल अब साथ मिलकर काम करेंगे। इस संबंध में हाल में एएमयू और गूगल एशिया पैसिफिक प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक साझेदारी हुई है।

इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान कंप्यूटर एवं इंटरनेट के क्षेत्र में उन्नत प्रौद्योगिकी विकास और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित ज्ञान को साझा करने के उद्देश्य से साथ मिलकर काम करेंगे।

एएमयू के कंप्यूटर विज्ञान विभाग और गूगल एशिया पैसिफिक प्राइवेट लिमिटेड की इस साझेदारी के साथ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सक्षम ज्ञान से जुड़े संसाधनों को साझा करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इससे तकनीकी प्लेटफार्म को उन्नत करने और छात्रों को नौकरी के अवसर प्रदान करने के रास्ते भी खुल सकते हैं।

एएमयू के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के अध्यक्ष आसिम जफर ने कहा है कि “यह साझेदारी, संकाय सदस्यों और अंतत: विश्वविद्यालय के छात्रों को आगामी गूगल-आधारित प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोग के विकास में अपने कौशल को बेहतर करने में मदद करेगी।”

उन्होंने भावी प्रौद्योगिकियों में संकाय सदस्यों और छात्रों के कौशल के निरंतर विकास के लिए अन्य प्रसिद्ध उद्योगों और संस्थानों के साथ इस तरह के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

इस परियोजना के पीओसी (प्वाइंट ऑफ कॉन्टैक्ट) फैसल अनवर ने कहा कि गूगल की ओर से संसाधनों एवं सामग्री को साझा किया जाएगा। जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ शिक्षकों को विभिन्न गूगल-आधारित तकनीकों के बारे में प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में शिक्षकों और विश्वविद्यालय के अन्य स्टाफ सदस्यों को प्रशिक्षित करने के लिए गूगल के सहयोग से एक संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) आयोजित करने की भी योजना है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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