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उत्तराखंड में दुग्ध उत्पादक समितियों के सचिवों को सीएम की सौगात

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना की शुरुआत करते हुए राज्यभर की दुग्ध उत्पादक समितियों के सचिवों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की घोषणा की। वहीं दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन राशि में भी प्रति लीटर एक रुपया बढ़ा दिया।
मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों की दुग्ध समितियों के सचिवों के लिए प्रति लीटर दूध में 50 पैसे और पर्वतीय क्षेत्रों में दुग्ध समितियों के सचिवों के लिए प्रति लीटर दूध में एक रुपया बढ़ेगा। सीएम ने दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन राशि को ₹ चार प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹ पांच प्रति लीटर करने तथा हल्द्वानी में दुग्ध विकास विभाग के निदेशालय के लिए जल्द से जल्द धनराशि जारी करने की घोषणा की।
बुधवार को मुख्यमंत्री ने देहरादून में सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी ऑडिटोरियम में दुग्ध विकास विभाग के तहत संचालित दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पादकों को डीबीटी के माध्यम से दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि दूध उत्पादक काश्तकारों से जुड़ी हर समस्या का समाधान सभी विभागों के साथ समन्वय बनाकर किया जा रहा है। दूध मूल्य प्रोत्साहन योजना से करीब 53 हजार लोगों को सीधे-सीधे लाभ होगा। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में जाएगी।
उन्होंने कहा, इस तरह की योजना आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र सबका साथ सबका विकास एवं सबके विश्वास के साथ हमारी सरकार लगातार हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।
सीएम ने कहा, दुग्ध क्रांति के क्षेत्र में हम सभी की सामूहिक भूमिका है। आने वाले समय में सरकार दूध विकास विभाग के साथ समन्वय कर इससे जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देगी। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हम सभी आपसी तालमेल एवं सहयोग से उत्तराखंड में श्वेत क्रांति लाएंगे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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