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जनरल बिपिन रावत के निधन पर उत्तराखंड में तीन दिन का राजकीय शोक

देहरादून। मुख्यमंत्री आवास में बुधवार को विधान मंडल दल की बैठक में सीडीएस जनरल बिपिन रावत के हेलीकाप्टर दुर्घटना में आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत के आकस्मिक निधन पर प्रदेश में तीन दिन (नौ से 11 दिसंबर 2021) का राजकीय शोक घोषित करने के निर्देश दिए हैं।
जनरल रावत का भावपूर्ण स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनरल रावत का निधन देश और उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका आकस्मिक निधन स्वयं उनके लिए भी व्यक्तिगत क्षति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड से भी जनरल रावत का विशेष लगाव था। राज्य के विकास की उनकी सोच थी। अभी हाल ही में राज्य स्थापना दिवस पर अपनी पत्नी के साथ देहरादून आए थे, उनका आकस्मिक निधन उत्तराखंड के लिए बड़ा ही दुःखद है।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. हरक सिंह रावत, बंशीधर भगत, सुबोध उनियाल, बिशन सिंह चुफाल, स्वामी यतीश्वरानन्द, विधायक हरवंश कपूर, हरभजन सिंह चीमा सहित अन्य विधायकों ने भी जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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