मिलो से मिलिए

Rajesh Pandey

मिलो ग्रीस के महान शक्तिशाली रेसलर थे। उन्होंने लगातार छह ओलंपिक में जीत हासिल करके कई मेडल जीते। मिलो इतने शक्तिशाली कैसे हो गए। इसके पीछे एक प्रेरणास्पद अभ्यास है, जो बताता है कि लगातार प्रयास करने से बड़े से बड़े टास्क को आसान किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए नियमित तौर पर अभ्यास की जरूरत है।

बताया जाता है कि मिलो ने अपना अभ्यास नवजात बछड़े को कंधों पर उठाकर किया। वाकई यह उनके के लिए आसान था। उनका कहना था कि वो एक बछड़े को आसानी से उठा सकते हैं, आप क्यों नहीं। इस पर आप कहेंगे, एक छोटे से बछड़े को कंधे पर उठा लेना कौन सी बड़ी बात हो गई। यह तो बड़ा आसान काम है।

क्या आप जानते हैं कि मिलो उस बछड़े को जब भी समय मिलता, कंधे पर उठा लिया करते थे। रोजाना दिन में कई बार वह एसा करते थे। जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी एक बड़े बुल( सांड) को कंधों पर उठाने का प्रयास करते रहे। वे लोग मिलो पर हंसते थे कि वो बछड़े को कंधे पर उठा रहे हैं। लेकिन मिलो ने अपने नियमित अभ्यास को नहीं छोड़ा और समय के साथ बछड़ा बड़ा होता गया और साथ ही उसको उठाने की मिलो की क्षमता भी बढ़ती गई।

आखिरकार एक दिन एसा भी आया, जिस दिन मिलो ने उस भारी सांड को कंधे पर उठा लिया, जो कभी बछड़ा था। लगातार अभ्यास ने मिलो की ताकत को बढ़ा दिया। लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी सांड को ही उठाने का प्रयास करते रहे। कभी वे उसे उठाने में सफल भी हो जाते थे, लेकिन वो मिलो की तरह सर्वश्रेष्ठ ताकत हासिल नहीं कर पाए।

यहां कहने का मतलब है कि कोई भी कार्य तब तक असंभव या कठिन है, जब तक हम उसको करने के लिए नियमित तौर पर अभ्यास नहीं करते। किसी भी कार्य को करने के लिए एक प्रक्रिया को अपनाना होता है, इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सब्र के साथ लगन और जुझारूपन भी होना चाहिए। यह ठीक उसी तरह है, जैसे नौ की टेबल तक पहुंचने के लिए दो से लेकर आठ तक की टेबल का अभ्यास करना जरूरी है।

यदि आप क्रमबद्ध तरीके से कोई कार्य नियमित अभ्यास के साथ करोगे तो उससे जुड़े कठिन हिस्सों पर भी सफलता हासिल कर सकोगे। यानि गुणा और भाग से पहले आपको टेबल, जोड़ और घटाव के सवालों की प्रैक्टिस करनी जरूरी होती है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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