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आसमां में डांस करते दो ग्रहों की लव स्टोरी

कंजंक्शन की घटना में बृहस्पति और शुक्र के बीच कम से कम 0.3 डिग्री दूरी तो रहती ही है

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रात को आकाश में, पश्चिम दिशा में, दो चमकते तारे कभी बेहद नजदीक दिखते और फिर उनके बीच दूरी बढ़ती हुई नजर आती। पर, एक बात है कि ये दोनों एक दूसरे से कहीं ज्यादा दूर नहीं दिख रहे। न ही इन दिनों ये एक दूसरे को छोड़कर गायब हो रहे हैं। यह नजारा फरवरी के तीसरे सप्ताह से दिखाई दे रहा है। आखिर, इनके बीच चल क्या रहा है, क्या इनके बीच रोमांस चल रहा है। इनके Kiss यानी चुंबन की खबरें भी चल रही हैं, क्या इनकी भी लव स्टोरी है। यह तो बात है, मजाक की, पर इसके पीछे साइंस क्या कहता है, जानकार क्या बताते हैं, इस पर ध्यान देना चाहिए।

पहली बात तो यह कि, ये तारे नहीं बल्कि सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे गर्म ग्रह शुक्र हैं। सूर्य के चक्कर लगाते हुए, इनके बीच, कम से कम 0.3 डिग्री यानी पूर्ण चंद्रमा के व्यास के बराबर की दूरी हो सकती है। पूर्ण चंद्रमा का व्यास लगभग 3,474 किलोमीटर है। अब आप समझ गए होंगे कि अपने घर की छत से आसमान में जिन दो ग्रहों के बारे में हम सोच रहे हैं, कि ये छोटी अंगुली की चौड़ाई से भी कम दूरी पर हैं और अब तो बस टकराने वाले हैं, दरअसल इनके बीच कम से कम दूरी साढ़े तीन हजार किमी. तो रहती ही है, जो कि जम्मू- कश्मीर से केरल तक की दूरी से भी थोड़ा अधिक है।

वैसे, इनके बीच अधिकतम दूरी तब होती है जब ये सूर्य के विपरीत दिशा में होते हैं, जो 800 मिलियन किलोमीटर से अधिक हो सकती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दो ग्रहों के बीच की न्यूनतम दूरी उनकी संबंधित कक्षाओं में स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

खगोल विज्ञान में, Conjunction शब्द, पृथ्वी से देखे जाने पर दो या दो से अधिक आकाशीय पिंडों के पास-पास दिखाई देने को संदर्भित करता है। जब दो या दो से अधिक ग्रह, तारे, या अन्य वस्तुएं पास-पास या आकाश के एक ही भाग में दिखाई देते हैं, तो इसे  Conjunction  कहा जाता है। वस्तुएं वास्तव में एक साथ नहीं चलती हैं, लेकिन वो पृथ्वी के सापेक्ष अपनी स्थिति के कारण एक दूसरे के करीब दिखाई देती हैं।  Conjunction को  नग्न आंखों से देखा जा सकते है और अक्सर इनको दिलचस्प और सुंदर खगोलीय घटना माना जाता है।

बृहस्पति और शुक्र के रात्रि आकाश में एक साथ पास-पास दिखाई देने की खगोलीय घटना को  Conjunction कहा जाता है। यह तब होता है जब दो या दो से अधिक आकाशीय पिंड पृथ्वी से देखे जाने पर आकाश में एक दूसरे के करीब दिखाई देते हैं।

शुक्र सूर्य के करीब है और बृहस्पति की तुलना में तेज कक्षा में चलता है, इसलिए यह आकाश में बृहस्पति के पास से गुजर सकता है। हालांकि, दोनों ग्रहों की कक्षाएं एक ही तल में नहीं हैं, इसलिए  Conjunction   एक नियमित घटना नहीं है।

पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करने में एक साल यानी लगभग 365.25 दिन लगते हैं। वहीं, शुक्र को सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 225 दिन लगते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि शुक्र का एक साल, पृथ्वी के एक साल से बहुत छोटा है।  वहीं, शुक्र ग्रह को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में 243 दिन लगते हैं। यानी उसका एक दिन, पृथ्वी के 243 दिन के बराबर होता है, जबकि शुक्र का एक साल मात्र 225 दिन का है। साफ है कि शुक्र का एक दिन वहां के एक साल से बड़ा होता है।

बृहस्पति ग्रह सूर्य की परिक्रमा में लगभग 12 पृथ्वी वर्ष लगाता है। बृहस्पति पर एक साल लगभग 4,332 पृथ्वी दिवसों के समान होता है। बृहस्पति गैस वाला विशाल ग्रह है, इसकी सतह पृथ्वी की तरह ठोस नहीं है और यह पृथ्वी की तुलना में बहुत तेजी से घूमता है। बृहस्पति का एक दिन, पृथ्वी के एक दिन से लगभग 10 घंटे अधिक होता है।

शुक्र और बृहस्पति की गति 

शुक्र और बृहस्पति की गति, सूर्य के सापेक्ष स्थिति और सौर मंडल के अन्य ग्रहों के आधार पर भिन्न हो सकती है।

शुक्र की औसत कक्षीय गति लगभग 35 किमी/सेकंड है, जिसका अर्थ है कि यह सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 108 मिलियन किमी घूमता है।

वहीं, बृहस्पति की औसत कक्षीय गति लगभग 13.1 किमी/सेकंड है और सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 12 पृथ्वी वर्ष लगते हैं। बृहस्पति शुक्र की तुलना में सूर्य से बहुत दूर है और सूर्य से लगभग 778 मिलियन किमी की औसत दूरी के साथ इसकी कक्षा बहुत बड़ी है।दोनों ग्रहों की वास्तविक गति अन्य ग्रहों, क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं के साथ गुरुत्वाकर्षण संबंधी कारणों के कारण भिन्न हो सकती है। इसके अतिरिक्त, जब शुक्र और बृहस्पति संयोजन में होते हैं, तो उनकी सापेक्ष गति पृथ्वी से उनकी स्थिति और दूरी पर निर्भर करेगी।

शुक्र और बृहस्पति पर तापमान

बृहस्पति पर तापमान इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे, इसके वातावरण में कहां मापते हैं।

बृहस्पति का ऊपरी वायुमंडल, जिसे हम दूरबीनों से देख सकते हैं, का औसत तापमान लगभग -145 डिग्री सेल्सियस है। यह तापमान पृथ्वी पर अनुभव किए गए किसी भी तापमान से कहीं अधिक ठंडा है।

जैसे-जैसे आप बृहस्पति के वातावरण में गहराई में जाते हैं, तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इसके केंद्र में सटीक तापमान की जानकारी नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि यह बेहद गर्म है, जिसका अनुमान 20,000 से 40,000 डिग्री सेल्सियस तक है। यह सूर्य की सतह से भी अधिक गर्म है।

बृहस्पति पर अत्यधिक तापमान सूर्य से ग्रह की दूरी, इसके आंतरिक ताप स्रोतों और इसके वातावरण में अत्यधिक दबाव के संयोजन के कारण होता है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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