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Ancient Ecosystem Jharkhand Coal Mines: झारखंड की कोयला खदानों में मिला 30 करोड़ साल पुराना ‘खोया हुआ संसार’

Ancient Ecosystem Jharkhand Coal Mines: नई दिल्ली, 19 फरवरी, 2026: झारखंड की कोयला खदानें अब केवल ईंधन का स्रोत नहीं, बल्कि पृथ्वी के प्राचीन इतिहास का झरोखा बन गई हैं। हालिया अध्ययन में यहाँ एक ऐसे इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) के प्रमाण मिले हैं, जो डायनासोरों के आने से भी करोड़ों साल पहले अस्तित्व में था।

Ancient Ecosystem Jharkhand Coal Mines: बीरबल साहनी जीवाश्म विज्ञान संस्थान (BSIP) के वैज्ञानिकों ने झारखंड के उत्तरी करणपुरा बेसिन की अशोक कोयला खदान में शोध किया। इस शोध से पता चला है कि लगभग 30 करोड़ वर्ष पहले भारत, अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर ‘गोंडवानालैंड’ नामक एक विशाल महाद्वीप था। उस समय यहाँ घने दलदली जंगल और नदियों का जाल बिछा हुआ था।

Ancient Ecosystem Jharkhand Coal Mines: वैज्ञानिकों के बीच लंबे समय से यह विवाद था कि क्या प्राचीन काल में समुद्र का पानी भारत के आंतरिक हिस्सों (जैसे झारखंड) तक पहुँचा था? अशोक खदान से मिले सूक्ष्म रासायनिक संकेतों और सल्फर के उच्च स्तर ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि उस दौर में समुद्री लहरें इन जंगलों तक पहुँचती थीं। यह मार्ग पूर्वोत्तर भारत से मध्य भारत की ओर था।

खदान की परतों में ग्लॉसॉप्टेरिस (Glossopteris) नामक विलुप्त पौधों के समूह के 14 अलग-अलग प्रजातियों के जीवाश्म मिले हैं।दामोदर बेसिन में पहली बार इस वनस्पति के ‘नर शंकु’ (Male cones) की खोज की गई है। यह खोज वनस्पति विज्ञान की उस कड़ी को जोड़ने में मदद करेगी कि ये प्राचीन वृक्ष कैसे विकसित हुए।

कार्बनिक अणुओं के रासायनिक विश्लेषण से पता चलता है कि लगभग 280-290 मिलियन वर्ष पहले दामोदर बेसिन में समुद्री जीवों का प्रवेश संभव था और यह पूर्वोत्तर भारत से मध्य भारत की ओर बढ़ते हुए पर्मियन सागर के मार्ग को दर्शाता है।

जीवाश्मों का खजाना: क्या-क्या मिला?

अध्ययन के दौरान शेल (एक प्रकार की चट्टान) की परतों में अद्भुत साक्ष्य मिले हैं:

  • नाजुक पत्तियों के निशान और जड़ें।

  • प्राचीन बीजाणु और पराग कण।

  • सूक्ष्मदर्शी जांच में ‘पाइराइट’ खनिज के समूह, जो खारे पानी की मौजूदगी दर्शाते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ों साल पहले जिस तरह ध्रुवीय बर्फ पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ा और उसने जमीनी इलाकों पर कब्जा किया।

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.1016/j.coal.2025.104860

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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