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NEWSLIVE24x7 > Blog > Blog Live > कितना स्मार्ट हो गया अपना दून
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कितना स्मार्ट हो गया अपना दून

Rajesh Pandey
Last updated: September 19, 2021 10:00 am
Rajesh Pandey
5 years ago
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देहरादून शहर में बाइक चलाने में डर लगता है। एक भी सड़क ऐसी नहीं है, जहां आप सुकून से बिना थके हुए बाइक चला सको। कहीं सड़कों की हालत खराब है तो कहीं आप जाम में फंस जाएंगे। गलियां तो आपको बहुत ज्यादा थका देंगी। वहीं जोखिम अलग से, बहुत बचकर चलना पड़ता है।
बाजारों में भी आप मुश्किल से ही चल पाओगे। पलटन बाजार, मच्छी बाजार, तिलक रोड, आढ़त बाजार, प्रिंस चौक से घंटाघर, धर्मपुर से प्रिंस चौक, घंटाघर से राजपुर रोड, ईसी रोड, सर्वे चौक से सचिवालय तिराहा, यहां से यूके लिप्टिस तिराहा और फिर राजपुर की ओर जाओ या फिर घंटाघर की तरफ आप परेशान हो जाओगे। दिलाराम चौक से हाथी बड़कला की ओर भी, कहीं भी आप बिना जाम या परेशानी के आगे नहीं बढ़ सकते।
मैं 1991 से देहरादून आ और जा रहा हूं। तब उतना ट्रैफिक नहीं था, अब तो ट्रैफिक ने सड़कों की सांसे फूला दीं। घंटाघर पर बॉटल नेक खोलने से ट्रैफिक में थोड़ा बहुत सुधार हुआ है, पर दिक्कतें तो हैं। पहले हम रेलवे स्टेशन से डीएवी कॉलेज तक पैदल आते जाते थे। लगभग बहुत सारे युवा, जो हरिद्वार, रायवाला, लक्सर से पढ़ने आते थे, पैदल ही चलते थे। अब तो लगभग 90 फीसदी के पास बाइक है। साइकिलों वाले बहुत कम होंगे।

 

Contents
देहरादून शहर में बाइक चलाने में डर लगता है। एक भी सड़क ऐसी नहीं है, जहां आप सुकून से बिना थके हुए बाइक चला सको। कहीं सड़कों की हालत खराब है तो कहीं आप जाम में फंस जाएंगे। गलियां तो आपको बहुत ज्यादा थका देंगी। वहीं जोखिम अलग से, बहुत बचकर चलना पड़ता है।बाजारों में भी आप मुश्किल से ही चल पाओगे। पलटन बाजार, मच्छी बाजार, तिलक रोड, आढ़त बाजार, प्रिंस चौक से घंटाघर, धर्मपुर से प्रिंस चौक, घंटाघर से राजपुर रोड, ईसी रोड, सर्वे चौक से सचिवालय तिराहा, यहां से यूके लिप्टिस तिराहा और फिर राजपुर की ओर जाओ या फिर घंटाघर की तरफ आप परेशान हो जाओगे। दिलाराम चौक से हाथी बड़कला की ओर भी, कहीं भी आप बिना जाम या परेशानी के आगे नहीं बढ़ सकते।मैं 1991 से देहरादून आ और जा रहा हूं। तब उतना ट्रैफिक नहीं था, अब तो ट्रैफिक ने सड़कों की सांसे फूला दीं। घंटाघर पर बॉटल नेक खोलने से ट्रैफिक में थोड़ा बहुत सुधार हुआ है, पर दिक्कतें तो हैं। पहले हम रेलवे स्टेशन से डीएवी कॉलेज तक पैदल आते जाते थे। लगभग बहुत सारे युवा, जो हरिद्वार, रायवाला, लक्सर से पढ़ने आते थे, पैदल ही चलते थे। अब तो लगभग 90 फीसदी के पास बाइक है। साइकिलों वाले बहुत कम होंगे।सार्वजनिक परिवहन का पहले बहुत इस्तेमाल होता था, शायद अब उतना नहीं है। इसकी वजह सार्वजनिक परिवहन में कमी या फिर समय पर नहीं मिलना या फिर इंतजार करने से बचना या जल्दबाजी होना भी हो सकता है।निजी वाहन बढ़ने से सड़कों पर ट्रैफिक प्रेशर बढ़ना लाजिमी है। पर, उस हिसाब से सुविधाओं को विकसित नहीं किया जा सका। राजधानी बनने से बढ़ते जनसंख्या दबाव ने देहरादून शहर को गांवों तक फैलाकर नगर निगम बना दिया। जंगल का फासला नहीं होता तो देहरादून शहर डोईवाला तक आकार ले लेता। इस पर फिर बात करेंगे। फिलहाल दून के हाल पर एक नजर…।कांवली रोड, जो सहारनपुर चौक से सीधे बल्लीवाला चौराहे को जोड़ती है। यहां से आप जीएमएस रोड होते हुए बल्लूपुर और एफआरआई की ओर जा सकते हैं या फिर घंटाघर की ओर, भी निराश करती है। माजरा, निरंजनपुर से लेकर आईएसबीटी तक ट्रैफिक के हाल खराब हैं।रिस्पना से आईएसबीटी तक का हाईवे केवल एक जगह थोड़ा सुकुन वाला है, जहां फ्लाईओवर बनने से रेलवे क्रासिंग वाला झंझट खत्म हो गया। बाकि तो पूरा रोड बुरे हाल है। बिंदाल पर बना पुल और वहां डंपिंग ग्राउंड से उठती बदबू किस को परेशान नहीं करेगी।प्रिंस चौक से रिस्पना और यहां से मोहकमपुर फ्लाईओवर तक जाम आम हो गया। हालांकि फ्लाईओवर ने बहुत राहत दी है। कुल मिलाकर कहें तो यहां बॉटल नेक खुल गई, जहां रेलवे क्रासिंग से हालात बहुत दयनीय हो गए थे।आपको चकराता रोड से दर्शनलाल चौक जाना है तो घंटाघर का आधा चक्कर लगाते हुए जाओगे, पर आपको राजपुर रोड से चकराता रोड की ओर दौड़ते वाहनों के बीच से होकर गुजरना होगा। यहां जोखिम ज्यादा है, पर ध्यान नहीं है।नगर निगम चौराहा, बुद्धा चौक पर बहुत संभलकर गाड़ी चलानी होगी। पता ही नहीं चलता कब आगे बढ़ना है और कब रुकना है। तहसील चौक भी ट्रैफिक के लिहाज से दिक्कतों का गढ़ है।सही पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की हालत खराब है। गर्मियां आ गईं, पीने का पानी मुश्किल से ही मिल पाएगा। डस्टबीन से बाहर बिखरा कूड़ा परेशानी ही है।पिछले दिनों कलक्ट्रेट गया था, इस बार मैंने बाइक देहरादून कोषागार के सामने पार्किंग में खड़ी की। बाइक के बीस रुपए मांगे, ठेकेदार के कर्मचारी ने जो पर्ची दी, उसमें भी 20 रुपये अंकित हैं। मैंने कहा, बोर्ड दिखाओ, जहां पार्किंग रेट लिखा है। उसने स्वीकार किया कि बोर्ड नहीं है।मैंने नजारत में जाकर पूछा तो वहां जवाब मिला, पार्किंग का रेट तो दस रुपये होना चाहिए। क्या आप कार से आए हो। मैंने उनको अपना हेलमेट दिखाते हुए कहा, यह सुबूत हैं बाइक से आने का।नजारत ने पार्किंग के कर्मचारी को बुलाया तो जवाब मिला कि पर्ची में गलती से 20 रुपये छप गया।इसी साल 27 जनवरी को पहले लोक निर्माण रोड पर कलक्ट्रेट की पार्किंग में भी ऐसा ही हुआ था। जिसकी जानकारी एसडीएम को दी, पर कुछ नहीं हुआ। इस पार्किंग की पर्ची पर भी 20 रुपये लिखा था। मुझे तो लगता है कि प्रिंटिंग प्रेस वाला दस रुपये लिखने से मना करता होगा।सीरियल नंबर तक नहीं है पर्ची पर। पार्किंग में रेट लिस्ट का बोर्ड नहीं। रोजाना हजार स्कूटर, बाइक की पार्किंग। आप हिसाब लगा लो, कम से कम महीने में डेढ़- दो लाख ज्यादा वसूल कर कमा रहा है ठेकेदार। कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, आप अपने विवेक से समझ सकते हो, मुझे कहने की जरूरत नहीं है।इस पोस्ट में शहर के फोटो इसलिए नहीं लगाए, क्योंकि चाहता हूं कि आप एक बार शहर को स्वयं देखें और बताएं कि मैं सही हूं या गलत।

सार्वजनिक परिवहन का पहले बहुत इस्तेमाल होता था, शायद अब उतना नहीं है। इसकी वजह सार्वजनिक परिवहन में कमी या फिर समय पर नहीं मिलना या फिर इंतजार करने से बचना या जल्दबाजी होना भी हो सकता है।
निजी वाहन बढ़ने से सड़कों पर ट्रैफिक प्रेशर बढ़ना लाजिमी है। पर, उस हिसाब से सुविधाओं को विकसित नहीं किया जा सका। राजधानी बनने से बढ़ते जनसंख्या दबाव ने देहरादून शहर को गांवों तक फैलाकर नगर निगम बना दिया। जंगल का फासला नहीं होता तो देहरादून शहर डोईवाला तक आकार ले लेता। इस पर फिर बात करेंगे। फिलहाल दून के हाल पर एक नजर…।

जरूर पढ़ें- उत्तराखंड में कम हो रहा जनता का परिवहन

कांवली रोड, जो सहारनपुर चौक से सीधे बल्लीवाला चौराहे को जोड़ती है। यहां से आप जीएमएस रोड होते हुए बल्लूपुर और एफआरआई की ओर जा सकते हैं या फिर घंटाघर की ओर, भी निराश करती है। माजरा, निरंजनपुर से लेकर आईएसबीटी तक ट्रैफिक के हाल खराब हैं।
रिस्पना से आईएसबीटी तक का हाईवे केवल एक जगह थोड़ा सुकुन वाला है, जहां फ्लाईओवर बनने से रेलवे क्रासिंग वाला झंझट खत्म हो गया। बाकि तो पूरा रोड बुरे हाल है। बिंदाल पर बना पुल और वहां डंपिंग ग्राउंड से उठती बदबू किस को परेशान नहीं करेगी।

प्रिंस चौक से रिस्पना और यहां से मोहकमपुर फ्लाईओवर तक जाम आम हो गया। हालांकि फ्लाईओवर ने बहुत राहत दी है। कुल मिलाकर कहें तो यहां बॉटल नेक खुल गई, जहां रेलवे क्रासिंग से हालात बहुत दयनीय हो गए थे।
आपको चकराता रोड से दर्शनलाल चौक जाना है तो घंटाघर का आधा चक्कर लगाते हुए जाओगे, पर आपको राजपुर रोड से चकराता रोड की ओर दौड़ते वाहनों के बीच से होकर गुजरना होगा। यहां जोखिम ज्यादा है, पर ध्यान नहीं है।
नगर निगम चौराहा, बुद्धा चौक पर बहुत संभलकर गाड़ी चलानी होगी। पता ही नहीं चलता कब आगे बढ़ना है और कब रुकना है। तहसील चौक भी ट्रैफिक के लिहाज से दिक्कतों का गढ़ है।
सही पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की हालत खराब है। गर्मियां आ गईं, पीने का पानी मुश्किल से ही मिल पाएगा। डस्टबीन से बाहर बिखरा कूड़ा परेशानी ही है।
02 अप्रैल 2021 को देहरादून कलक्ट्रेट स्थित कोषागार वाली पार्किंग से मिली पर्ची
पिछले दिनों कलक्ट्रेट गया था, इस बार मैंने बाइक देहरादून कोषागार के सामने पार्किंग में खड़ी की। बाइक के बीस रुपए मांगे, ठेकेदार के कर्मचारी ने जो पर्ची दी, उसमें भी 20 रुपये अंकित हैं। मैंने कहा, बोर्ड दिखाओ, जहां पार्किंग रेट लिखा है। उसने स्वीकार किया कि बोर्ड नहीं है।
मैंने नजारत में जाकर पूछा तो वहां जवाब मिला, पार्किंग का रेट तो दस रुपये होना चाहिए। क्या आप कार से आए हो। मैंने उनको अपना हेलमेट दिखाते हुए कहा, यह सुबूत हैं बाइक से आने का।

27 जनवरी 2021 की देहरादून कलक्ट्रेट पीडब्ल्यूडी रोड वाली पार्किंग से मिली पर्ची
नजारत ने पार्किंग के कर्मचारी को बुलाया तो जवाब मिला कि पर्ची में गलती से 20 रुपये छप गया।
इसी साल 27 जनवरी को पहले लोक निर्माण रोड पर कलक्ट्रेट की पार्किंग में भी ऐसा ही हुआ था। जिसकी जानकारी एसडीएम को दी, पर कुछ नहीं हुआ। इस पार्किंग की पर्ची पर भी 20 रुपये लिखा था। मुझे तो लगता है कि प्रिंटिंग प्रेस वाला दस रुपये लिखने से मना करता होगा।
सीरियल नंबर तक नहीं है पर्ची पर। पार्किंग में रेट लिस्ट का बोर्ड नहीं। रोजाना हजार स्कूटर, बाइक की पार्किंग। आप हिसाब लगा लो, कम से कम महीने में डेढ़- दो लाख ज्यादा वसूल कर कमा रहा है ठेकेदार। कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, आप अपने विवेक से समझ सकते हो, मुझे कहने की जरूरत नहीं है।
इस पोस्ट में शहर के फोटो इसलिए नहीं लगाए, क्योंकि चाहता हूं कि आप एक बार शहर को स्वयं देखें और बताएं कि मैं सही हूं या गलत।

 

Key Words:- Dehradun Smart City, Parking Facilities in Dehradun City, Parking Problem in Dehradun City, Capital of Uttarakhand, District Magistrate Office, Collectorate, Flyovers in Dehradun, Paltan Bazar, Machhi Bazar, Tilak Road, Adhat Bazar, Prince Chowk, Ghantaghar, Dharampur, Prince Chowk, Rajpur Road, EC Road, Survey Chowk, Secretariat Tiraha, देहरादून कोषागार, देहरादून की सड़कें, देहराूदन स्मार्ट सिटी, देहरादून नगर निगम, देहरादून नगर निगम में शामिल गांव, देहरादून में ट्रैफिक, रिस्पना पुल, रिस्पना नदी 

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TAGGED:Adhat BazarCapital of UttarakhandCollectorateDehradun Smart cityDharampurDistrict Magistrate OfficeEC RoadFlyovers in DehradunGhantagharMachhi BazarPaltan BazarParking Facilities in Dehradun CityParking Problem in Dehradun CityPrince ChowkRajpur RoadSecretariat TirahaSurvey ChowkTilak Roadदेहरादून की सड़केंदेहरादून कोषागारदेहरादून नगर निगमदेहरादून नगर निगम में शामिल गांवदेहरादून में ट्रैफिकदेहराूदन स्मार्ट सिटीरिस्पना नदीरिस्पना पुल
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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