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VIDEO: अचानक हरीश रावत के सामने नतमस्तक क्यों हो गए हरक सिंह?

देहरादून। उत्तराखंड में राजनीतिक माहौल बड़ी तेजी से बदल रहा है, जो कल तक दुश्मन नंबर वन थे, वो आज कैसे दोस्त बनते दिख रहे हैं। हरक सिंह रावत क्यों नतमस्तक हो गए हैं हरीश रावत के चरणों में। जबकि, एक दिन पहले ही वह उन पर चरित्र हनन की कोशिश का आरोप लगा रहे थे। इसके राजनीतिक मतलब क्या हैं।

सबसे पहले बात करते हैं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें पंजाब के दायित्व से मुक्त कर दिया है। हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया पर लिखा है कि जो मेरा अनुरोध था, उसे स्वीकार गया है।

उन्होंने सोनिया गांधी का धन्यवाद किया है। इसी के साथ यह तय हो गया है कि अब हरीश रावत पूरी तरह से उत्तराखंड में चुनाव पर फोकस कर सकेंगे, वैसे इसका असर दिखने भी लगा है।

अब भाजपा नेता हरक सिंह की बात करते हैं। हरक सिंह कल तक हरीश रावत को सुबह शाम खरी खरी सुना रहे थे, लेकिन उनके अचानक से सुर बदल गए हैं।

हरीश रावत के चरणों में नतमस्तक हरक सिंह को अचानक क्या हो गया है, यह समझना जरूरी है।

इसके लिए पिछले कुछ दिन के घटनाक्रम पर ध्यान देने की जरूरत होगी। हरक सिंह दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से जाकर मिलते हैं और अखबारों में खबर छपती है कि हरक सिंह ने नड्डा से वादा किया है कि वह उत्तराखंड में भाजपा को जीताने के लिए जी जान लगा देंगे।

उनके साथ उमेश शर्मा काऊ भी होते हैं। वहां पर सांसद अनिल बलूनी भी साथ होते हैं। अखबारों के कहीं कोने में यह खबर भी छपती है कि हरक सिंह दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आएंगे। वह वहां रुकते हैं, लेकिन अमित शाह से मुलाकात नहीं हो पाती है।

आप इस बात को लगातार ध्यान में रखिएगा कि वहां पर मुलाकात के वक्त भाजपा नेता अनिल बलूनी होते हैं। अनिल बलूनी उत्तराखंड के लिए दिल्ली में रहकर काम करते हैं।

अब आगे बढ़ते हैं,अमित शाह आपदा प्रभावित इलाकों को दौरा करने के लिए उत्तराखंड आते हैं और इसके अगले ही दिन हरक सिंह कह देते हैं कि हरीश रावत बड़े भाई है, वह जो कहेंगे मैं उनको मानूंगा।

क्या हरक सिंह रावत की वह मुराद पुरी नहीं हुई, जिसके लिए दिल्ली की दौड़ लगी थी। यह भी सवाल है कि वह मुराद किसने पूरी नहीं होने दी। यहां यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि उमेश शर्मा काऊ से किया गया वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है।

अब वह वादा क्या है, यह तो पता नहीं लेकिन यह ध्यान में रखना चाहिए कि इसको लेकर अखबारों और डिजिटल मीडिया में खबरें चली हैं।

अब एक आखिरी सवाल, हरक सिंह कांग्रेस में कब शामिल हो रहे हैं। वैसे इसका सही जवाब तो हरक सिंह ही दे सकते हैं।

आइए, इंतजार करते हैं बीजेपी में एक और टूट का, जिसको लेकर शायद बीजेपी भी शायद चाहती है कि होगी कि यह टूट हो ही जाए तो अच्छा है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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