VIDEO: अचानक हरीश रावत के सामने नतमस्तक क्यों हो गए हरक सिंह?

Rajesh Pandey

देहरादून। उत्तराखंड में राजनीतिक माहौल बड़ी तेजी से बदल रहा है, जो कल तक दुश्मन नंबर वन थे, वो आज कैसे दोस्त बनते दिख रहे हैं। हरक सिंह रावत क्यों नतमस्तक हो गए हैं हरीश रावत के चरणों में। जबकि, एक दिन पहले ही वह उन पर चरित्र हनन की कोशिश का आरोप लगा रहे थे। इसके राजनीतिक मतलब क्या हैं।

सबसे पहले बात करते हैं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें पंजाब के दायित्व से मुक्त कर दिया है। हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया पर लिखा है कि जो मेरा अनुरोध था, उसे स्वीकार गया है।

उन्होंने सोनिया गांधी का धन्यवाद किया है। इसी के साथ यह तय हो गया है कि अब हरीश रावत पूरी तरह से उत्तराखंड में चुनाव पर फोकस कर सकेंगे, वैसे इसका असर दिखने भी लगा है।

अब भाजपा नेता हरक सिंह की बात करते हैं। हरक सिंह कल तक हरीश रावत को सुबह शाम खरी खरी सुना रहे थे, लेकिन उनके अचानक से सुर बदल गए हैं।

हरीश रावत के चरणों में नतमस्तक हरक सिंह को अचानक क्या हो गया है, यह समझना जरूरी है।

इसके लिए पिछले कुछ दिन के घटनाक्रम पर ध्यान देने की जरूरत होगी। हरक सिंह दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से जाकर मिलते हैं और अखबारों में खबर छपती है कि हरक सिंह ने नड्डा से वादा किया है कि वह उत्तराखंड में भाजपा को जीताने के लिए जी जान लगा देंगे।

उनके साथ उमेश शर्मा काऊ भी होते हैं। वहां पर सांसद अनिल बलूनी भी साथ होते हैं। अखबारों के कहीं कोने में यह खबर भी छपती है कि हरक सिंह दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आएंगे। वह वहां रुकते हैं, लेकिन अमित शाह से मुलाकात नहीं हो पाती है।

आप इस बात को लगातार ध्यान में रखिएगा कि वहां पर मुलाकात के वक्त भाजपा नेता अनिल बलूनी होते हैं। अनिल बलूनी उत्तराखंड के लिए दिल्ली में रहकर काम करते हैं।

अब आगे बढ़ते हैं,अमित शाह आपदा प्रभावित इलाकों को दौरा करने के लिए उत्तराखंड आते हैं और इसके अगले ही दिन हरक सिंह कह देते हैं कि हरीश रावत बड़े भाई है, वह जो कहेंगे मैं उनको मानूंगा।

क्या हरक सिंह रावत की वह मुराद पुरी नहीं हुई, जिसके लिए दिल्ली की दौड़ लगी थी। यह भी सवाल है कि वह मुराद किसने पूरी नहीं होने दी। यहां यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि उमेश शर्मा काऊ से किया गया वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है।

अब वह वादा क्या है, यह तो पता नहीं लेकिन यह ध्यान में रखना चाहिए कि इसको लेकर अखबारों और डिजिटल मीडिया में खबरें चली हैं।

अब एक आखिरी सवाल, हरक सिंह कांग्रेस में कब शामिल हो रहे हैं। वैसे इसका सही जवाब तो हरक सिंह ही दे सकते हैं।

आइए, इंतजार करते हैं बीजेपी में एक और टूट का, जिसको लेकर शायद बीजेपी भी शायद चाहती है कि होगी कि यह टूट हो ही जाए तो अच्छा है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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