Haldwari village water crisis: देहरादून का यह गांव दिनभर पानी ढोता है, मात्र साढ़े नौ लाख रुपये की ही तो बात है

रविवार(17 मई, 2026) की सुबह हल्द्वाड़ी गांव में तेज धूप है। हमने कुछ जगह लोगों को लाइन में लगकर पाइप से पानी भरते देखा। वहां पानी भरने के लिए जरीकैन, बंटे और बोतलें रखी थीं और लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पेयजल लाइन में प्लास्टिक की पाइप लगाकर बर्तनों को भरा जा रहा था। पानी बहुत कम आ रहा था। एक जरीकैन भरने में लगभग दस मिनट लग रहे हैं, ऐसा ग्रामीणों ने हमें बताया। ये वो लोग हैं, जिनके घरों के नलों में पानी नहीं पहुंच रहा। वो बताते हैं, आज लगभग 15 दिन बाद पानी आया है, पता नहीं कितनी देर चलेगा, कह नहीं सकते। अब पानी कब आएगा, पता नहीं।

Rajesh Pandey
देहरादून जिला के हल्द्वाड़ी गांव में भरी दोपहरी पानी ढोते संजय सिंह। फोटो- सार्थक पांडेय

राजेश पांडेय, देहरादून। 20 मई, 2026 

Haldwari village water crisis: मई माह की दोपहर, हल्द्वाड़ी गांव में 58 साल की पिंगला देवी पिछले रविवार अपने घर के आंगन में लगे नल की टोंटी को बार-बार घुमाकर देखती हैं। कहती हैं, “मैंने कई बार टंकी में जमा बारिश का पानी उबालकर पीया। कल ही, जब घर में पानी नहीं था, तब पुरानी टंकी में जमा दो महीने का सड़ा हुआ पानी उबालकर पीना पड़ा। इस नल को रोजाना देखती हूं कि किसी दिन तो पानी आएगा। दो साल से नल में जल नहीं आया। मुझे रोना आता है, क्योंकि गांव में स्रोत तक जाकर पानी लाना हमारे बस की बात नहीं है। घुटनों में दर्द होता है।”

“हमारे गांव में कुछ घरों में ही पानी आता है, वो भी दस से पंद्रह दिन के बीच। हम काफी परेशान हैं, पता नहीं गांव में पानी की दिक्कत कब दूर होगी।” यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं।

देहरादून जिले के गांव हल्द्वाड़ी में पेयजल संकट की पीड़ा सुनाते समय 58 साल की पिंगला देवी की आखें नम हो गईं। फोटो- सार्थक पांडेय

Haldwari village water crisis: पिंगला देवी और उनके पति सुरेंद्र सिंह घर में अकेले रहते हैं। उनका बेटा परिवार के साथ बच्चों की पढ़ाई और रोजगार के लिए गांव से बाहर रहता है। करीब 63 साल के सुरेंद्र सिंह वर्षों पहले चूना खदान में काम करते थे, तब उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लगी थी, इसलिए वो ज्यादा मेहनत का काम नहीं कर पाते। पानी से भरी बाल्टी या कैन उठाने में उनको दिक्कत होती है। वो पड़ोसियों की मदद से अपने लिए पानी जुटा पाते हैं।

सुरेंद्र हमें गांव में पानी की कहानी सुनाते हैं। बताते हैं, “लगभग 13 माह से ज्यादा समय हो गया है गांव की सबसे पुरानी पेयजल योजना को बंद हुए। स्रोतों पर ही निर्भर हैं। सोलर वाली योजना से कुछ ही घरों में लंबे अंतराल बाद पानी मिल पाता है। हमारे घर पानी नहीं आता।”

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से लगभग 35 किमी. दूर पर्वतीय गांव, जो रायपुर ब्लॉक में है, पानी और सड़क की मांग हमेशा से करता रहा है। गांव में पानी के दो प्रमुख स्रोत और टिहरी जिले के कुंड गांव से आ रही लगभग 12 किमी. की पेयजल योजना है। कुंड वाली योजना लगभग  वर्ष 2025 में आई आपदा के बाद से बंद है।

https://youtu.be/I6jpwYrd7LE

Haldwari village water crisis: वर्ष 2017 में वर्तमान में हरिद्वार क्षेत्र से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में बनी सोलर पंपिंग योजना से पानी को ऊपरी हिस्से में मौजूद सूरीसैंण तक पहुंचाया जा रहा है। वहां टैंक में जमा पानी हल्द्वाड़ी के नलों में आता है, पर हल्द्वाड़ी के लोगों का कहना है कि सूरीसैंण से पानी दस से 15 दिन के अंतराल में खोला जाता है, वो भी कुछ ही घरों के नलों में आता है। वहां से पानी खोलने का कोई नियत समय या दिन नहीं है। हालांकि, हल्द्वाड़ी के ग्रामीण यह भी कहते हैं, सोलर पंपिंग योजना गर्मियों में ही काम कर पाती है, बरसात और सर्दियों में यह कम ही कारगर है। वो  इस योजना को बिजली से जोड़ने की मांग कर रहे हैं, ताकि साल भर पर्याप्त पानी मिल सके।

हल्द्वाड़ी की तपती दोपहर में पानी का इंतजार

रविवार(17 मई, 2026) की सुबह हल्द्वाड़ी गांव में तेज धूप है। हमने कुछ जगह लोगों को लाइन में लगकर पाइप से पानी भरते देखा। वहां पानी भरने के लिए जरीकैन, बंटे और बोतलें रखी थीं और लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पेयजल लाइन में प्लास्टिक की पाइप लगाकर बर्तनों को भरा जा रहा था। पानी बहुत कम आ रहा था। एक जरीकैन भरने में लगभग दस मिनट लग रहे हैं, ऐसा ग्रामीणों ने हमें बताया। ये वो लोग हैं, जिनके घरों के नलों में पानी नहीं पहुंच रहा। वो बताते हैं, आज लगभग 15 दिन बाद पानी आया है, पता नहीं कितनी देर चलेगा, कह नहीं सकते। अब पानी कब आएगा, पता नहीं।

63 साल के रघुवीर सिंह बताते हैं, “हमारा गांव दिनभर और शाम सात-आठ बजे तक पानी ढोता रहता है। बच्चे स्कूल जाने से पहले पानी ढोते हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही।”

देहरादून जिले के गांव हल्द्वाड़ी में पेयजल संकट गहरा गया है। कई दिन बाद पाइपों में पानी पहुंचा है। गांव के एक स्पॉट पर गर्मियों की दोपहर में पेयजल लाइन में प्लास्टिक का पाइप डालकर पानी भरते ग्रामीण। फोटो- सार्थक पांडेय

मीना देवी, जो इसी पाइप से पानी भरने के लिए इंतजार करती मिलीं, बताती हैं, “पानी नहीं मिलना यहां सबसे बड़ा संकट है। आज कई दिन बाद पानी मिला। हम पूरा दिन पानी के लिए दौड़ लगाते हैं। आप ही देख लो, इस पाइप से कितनी देर में बर्तन भर रहे हैं।”

जब इन पाइप में पानी नहीं आता, तो आप कहां से पानी लाते हैं, पर करीब 40 वर्षीय दिगंबर सिंह बताते हैं, “गांव के दूसरे हिस्से में दो स्रोत हैं, जो घरों से लगभग आधा से दो किमी. की दूर हैं, वहां से पानी मिलता। इनमें भी नजदीक वाले स्रोत में गर्मियों में पानी नहीं आता। यह केवल बरसात और सर्दियों में ही चलता है। इन दिनों सोलर पंपिंग योजना के पास स्थित स्रोत में पानी है, पर उसका लगभग 75 फीसदी पानी योजना के टैंक में भेजा जा रहा है। हमारे हिस्से 25 फीसदी पानी है, जिसमें लाइन लगी रहती है, पानी बहुत देर में मिलता है।”

देहरादून के हल्द्वाड़ी गांव में पेयजल संकट। फोटो- सार्थक पांडेय

वहीं करीब 27 वर्षीय सतेंद्र सिंह, जिनका हाल ही में विवाह हुआ है, बताते हैं, “शादी के समय हमें खच्चरों से पानी ढोना पड़ा। पानी होने के बाद भी गांव में घर घर तक सप्लाई नहीं हो पा रहा है। जो, दस -पंद्रह दिन में पानी मिल भी रहा है, उसका कोई समय निर्धारित नहीं है। कभी दोपहर में आ जाता है और कभी सुबह और कभी शाम।”

सबसे पुरानी योजना के टैंक सूखे पड़े

ग्रामीण हमें पानी के तीनों स्रोतों को दिखाने ले जाते हैं। एक तो गांव के अंतिम छोर पर बहुत ऊंचाई पर है, जो गांव के सबसे पुरानी योजना है।यह टिहरी जिले के कुंड गांव से आने वाली लाइन है। इसके टैंक अब सूखे पड़े हैं। ऊंचाई पर मौजूद टैंकों से  गांव के लगभग 60- 70 परिवारों को पानी सप्लाई होता था।

गांव में पानी और सड़क के लिए कई साल से शासन – प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पत्राचार कर रहे 35 साल के अरुण नेगी कहते हैं, “कुंड वाली योजना तो बहुत पुरानी है। इस पेयजल योजना से गांव को कोई उम्मीद नहीं है। यह अब किसी काम की नहीं है। यह कुछ साल पहले क्षतिग्रस्त होकर बंद हो गई थी। इसे ठीक कराया गया, कुछ समय पानी मिला। पर, बाद में 2025 की आपदा में टूटने के बाद से इसने दम तोड़ दिया।”

देहरादून जिला के हल्द्वाड़ी गांव में मई की दोपहर पानी ढोने को मजबूत 63 साल के चरण सिंह। चरण सिंह का घर जलस्रोत से सबसे दूर और ऊंचाई पर स्थित है। फोटो- सार्थक पांडेय

दो छोटे बच्चों को घर में अकेला छोड़कर भरते हैं पानी

करीब 63 साल के चरण सिंह का घर पुरानी पेयजल योजना वाले टैंकों से कुछ ही दूरी पर है, हमें तपती दोपहरी में पानी के लिए जाते हुए मिले। उनका घर ऊंचाई पर है, पर पानी के लिए उनका संघर्ष कमाल का है। कहते हैं, “इस पानी ने पूरे घर को दौड़ाकर रखा है। आज नलों में पानी छूटा है, इसलिए पास में ही मिल जाएगा। घर में तो पानी नहीं पहुंचता। बाकी दिनों में तो पुराने स्रोत, जो कि सोलर पंपिंग योजना के पास है, जाना पड़ता है। उनके घर से लगभग डेढ़ किमी. दूर है।”

उनके पुत्र संजय, जो कि देहरादून में होटल लाइन में जॉब करते हैं, वापस गांव लौट आए हैं। संजय बताते हैं, “होटल में रसोई गैस का संकट था। उनकी पत्नी, पिता और वो खुद स्रोत और पाइप लाइन से पानी ढो रहे हैं। दो छोटे बच्चों में घर में अकेला छोड़कर कमरे में कुंडी लगा रखी है। क्या करें, ऐसा करना हमारी मजबूरी है।”

इस योजना से लगभग डेढ़ से दो किमी. दूर पानी का दूसरा स्रोत है, जो बरसात और सर्दियों में भरपूर पानी देता है। इन दिनों यह बंद है। इससे लगभग 50 मीटर आगे सोलर पंपिंग योजना वाला स्रोत है, जो गर्मियों में भी चालू है। इसका पानी सोलर योजना से सूरीसैंण भेजा जा रहा है। पर, सर्दियों और बरसात में योजना कम ही काम करती है। गर्मियों में योजना चल रही है और पानी पंप होकर सूरीसैंण जा रहा है।

देहरादून जिले के गांव हल्द्वाड़ी में पेयजल संकट और समाधान पर चर्चा करते ग्रामीण। फोटो- सार्थक पांडेय

सामाजिक कार्यकर्ता अरुण नेगी बताते हैं, सोलर योजना सभी के लिए है, हल्द्वाड़ी के लिए भी और सूरीसैंण तोक के लिए भी। सूरीसैंण ऊंचाई पर है, इसलिए वहां से घर-घर बिछाई गई पाइप लाइन में पानी आ सकता है। योजना को हल्द्वाड़ी के पाइपों से जोड़ा भी गया है। वहां के टैंकों से पानी कई कई दिन के अंतराल पर खोला जाता है। कई घरों में को पानी नहीं पहुंच पाता। सभी को पानी चाहिए, कब तक इस स्रोत से पानी ढोते रहेंगे।

उन्होंने बताया, जल जीवन मिशन के तहत जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के अधिकारियों ने गांव पहुंचकर निरीक्षण किया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सोलर पंपिंग योजना को बिजली से भी जोड़ने की संस्तुति की है। इसके लिए लगभग 9.50 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। शासन प्रशासन से इतनी रकम भुगतान के बाद हर महीने पानी उपलब्ध होगा। उम्मीद है कि गांव में हर घर तक पानी पहुंचेगा।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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