- बेस अस्पताल में रोज पहुंच रहे 30-50 के बीच हाई बीपी मरीज, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
- बढ़ती उम्र ही नहीं, युवा भी हो रहे हाई ब्लड प्रेशर के शिकार
- उच्च रक्तचाप के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता, विशेषज्ञ बोले—समय रहते संभलिए
High Blood Pressure symptoms and causes: श्रीनगर गढ़वाल, 18 मई, 2026ः तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) एक ऐसी बीमारी बन चुकी है, जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। यही कारण है कि चिकित्सक इसे “साइलेंट किलर” कहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, संतुलित जीवनशैली अपनाने और समय रहते उपचार लेने की अपील की है।
श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल के मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन 120 से 160 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें लगभग 30 से 50 मरीज उच्च रक्तचाप से पीड़ित होते हैं। अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में भी हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।
High Blood Pressure symptoms and causes:उच्च रक्तचाप के बढ़ते मामलों को देखते हुए बेस अस्पताल में विशेष “लाइफस्टाइल क्लिनिक” की शुरुआत की गई है। इस क्लिनिक का उद्देश्य मरीजों को केवल दवा देना नहीं, बल्कि उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना है। यहां मरीजों को संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन, योग, नींद और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी काउंसलिंग दी जाती है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि लोग शुरुआती अवस्था में ही अपनी दिनचर्या सुधार लें, तो कई मामलों में गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
High Blood Pressure symptoms and causes: डाक्टरों के मुताबिक रक्तचाप वह दबाव है जो शरीर में बहता हुआ रक्त धमनियों की दीवारों पर पड़ता है। सामान्य रक्तचाप लगभग 120/80 mmHg माना जाता है। यदि रक्तचाप लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक बना रहे, तो इसे उच्च रक्तचाप माना जाता है और चिकित्सकीय सलाह आवश्यक हो जाती है। समस्या यह है कि अधिकतर लोगों में लंबे समय तक इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है जब हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लकवा, किडनी फेल या आंखों की रोशनी प्रभावित होने जैसी गंभीर स्थितियां सामने आ जाती हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें–
हालांकि, कई बार हाई ब्लड प्रेशर बिना लक्षणों के रहता है, लेकिन कुछ मरीजों में ये संकेत दिखाई दे सकते हैं। डाक्टर के मुताबिक यदि निम्न स्थिति हों, तो यह हार्ट अटैक या स्ट्रोक का संकेत हो सकता है और तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
- लगातार सिरदर्द
- चक्कर आना
- धुंधला दिखाई देना
- घबराहट और बेचैनी
- अत्यधिक थकान
- सांस फूलना
- सीने में दर्द
नाक से खून आना - यदि अचानक बोलने में परेशानी
- शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी
- सीने में तेज दर्द
- अचानक दृष्टि कम होने
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा
डॉक्टर्स के अनुसार, बदलती जीवनशैली उच्च रक्तचाप के मामलों को बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण बन रही है। ये आदतें हो सकती हैं नुकसानदायक-
- देर रात तक जागना
- फास्ट फूड
- अत्यधिक नमक
- तनाव
- मोबाइल और कंप्यूटर पर घंटों बैठना
- शारीरिक गतिविधियों की कमी
हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारण
बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास, मोटापा, मधुमेह, मानसिक तनाव, धूम्रपान और तंबाकू, शराब का अधिक सेवन, जंक और प्रोसेस्ड फूड, अपर्याप्त नींद
शारीरिक श्रम की कमी।
शरीर के हर अंग पर पड़ता है असर
अनियंत्रित उच्च रक्तचाप धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करता है। इससे हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, स्ट्रोक और लकवा, किडनी खराब होना, आंखों की रोशनी कमजोर होना, रक्त वाहिनियों में संकुचन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप मृत्यु के जोखिम को भी बढ़ा देता है।
क्या करें
विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन तेज चलना, योग और ध्यान रक्तचाप नियंत्रण में अत्यंत लाभकारी साबित होते हैं। जीवनशैली बदलनी होगी। नियमित रूप से कुछ आदतें अपनाना बेहद जरूरी है। जैसे-
- भोजन में नमक कम लें
- जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचें
- रोजाना 30–45 मिनट तेज चलें
- नियमित व्यायाम और योग करें
- तनाव कम करें
- पर्याप्त नींद लें
वजन नियंत्रित रखें - धूम्रपान और तंबाकू और शराब के सेवन दूर रहे
नियमित जांच क्यों जरूरी
डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार ब्लड शुगर, किडनी जांच, लिपिड प्रोफाइल, यूरिन जांच, ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी और आंखों की जांच कराते हैं।
दवाएं बीच में बंद करना खतरनाक
कई मरीजों को जीवनशैली सुधार के साथ नियमित दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। इनमें एम्लोडिपिन, टेल्मीसार्टन, लोसार्टन, बीटा ब्लॉकर और डाययूरेटिक्स जैसी दवाएं शामिल हैं। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं बंद करना बेहद खतरनाक हो सकता है, चाहे रक्तचाप सामान्य ही क्यों न दिखाई दे रहा हो।
क्या है “हाइपरटेंसिव इमरजेंसी”?
यदि रक्तचाप अचानक बहुत अधिक बढ़ जाए और उसके कारण मस्तिष्क, हृदय या किडनी प्रभावित होने लगें, तो इस स्थिति को “हाइपरटेंसिव इमरजेंसी” कहा जाता है। यह मेडिकल इमरजेंसी होती है और मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कर उपचार देना पड़ता है।
भारत में चिंताजनक स्थिति
हाल के स्वास्थ्य अनुमानों के अनुसार, भारत में लगभग हर तीन वयस्कों में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप से प्रभावित है। देश में करीब 20 से 30 करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित बताए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मरीजों की सेवा में जुटी विशेषज्ञ टीम
बेस अस्पताल के मेडिसिन विभाग में एमडी फिजिशियन डॉ. लीना फिरमाल, डॉ. फ्लोरेंस वनहावी, डॉ. ज्ञानेश कुमार, डॉ. रंजीत यादव और डॉ. नम्रता सहित पीजी डॉक्टर विनोद तिवारी, डॉ. गीतांशु कपूर, डॉ. नीलम, डॉ. विकास वर्मा, डॉ. शिवम चौधरी और डॉ. तात्सुम मिश्रा लगातार मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे हैं। यह टीम ओपीडी, मेडिसिन वार्ड, आईसीयू और कार्डियो ओपीडी में मरीजों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रही है।




