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AI stray cattle identification: अब गाय की ‘नाक’ बनेगी उसकी पहचान, गुजरात में AI तकनीक से निराश्रित पशुओं की समस्या होगी हल

AI stray cattle identification: अहमदाबाद, 20 जनवरी, 2026ः गुजरात की सड़कों पर निराश्रित पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम से अब तकनीक के जरिए निपटा जाएगा। अहमदाबाद नगर निगम (AMC) एक ऐसी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) परियोजना पर काम कर रहा है, जहाँ गाय की नाक की बनावट (Muzzle Print) को आधार बनाकर पशु और उसके मालिक की पहचान की जाएगी।

नाक: पशुओं का ‘फिंगरप्रिंट’

AI stray cattle identification: इस नई तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पशुओं की नाक की विशिष्ट बनावट है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिस तरह इंसानों के अंगूठे के निशान (Fingerprints) अलग-अलग होते हैं, उसी तरह हर गाय की नाक का पैटर्न भी अद्वितीय होता है।

गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी स्थित ‘AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ द्वारा विकसित किया जा रहा यह डीप लर्निंग मॉडल सीसीटीवी कैमरों के जरिए गाय के चेहरे और विशेष रूप से उसकी नाक को स्कैन करेगा। यह सिस्टम भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी किसी विशिष्ट गाय को पहचानने और उसके मालिक का विवरण निकालने में सक्षम होगा।

कैसे काम करेगा यह हाई-टेक सिस्टम?

  • बायोमेट्रिक स्कैनिंग: सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड को एआई सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। यह सिस्टम आंखों, चेहरे की बनावट और किसी भी दिखाई देने वाले निशान या घाव जैसी विशेषताओं का विश्लेषण करेगा। सॉफ्टवेयर गाय की आंखों, चेहरे और मुख्य रूप से नाक के बायोमेट्रिक्स का विश्लेषण करेगा।

  • डेटाबेस मिलान: पहचान होने के बाद, सिस्टम तुरंत एएमसी के मौजूदा डेटाबेस (जिसमें 1.1 लाख गायों का विवरण है) से मिलान करेगा।

  • त्वरित कार्रवाई: जैसे ही निराश्रित पशु सड़क पर दिखेगा, उसकी पहचान कर सीधे मालिक को नोटिस या जुर्माना भेजा जा सकेगा।

वर्तमान चुनौतियों का समाधान

AI stray cattle identification: अभी तक एएमसी की टीमें RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) और माइक्रोचिप पर निर्भर थीं। इसमें पशु के पास जाकर उसे मैन्युअल रूप से स्कैन करना पड़ता था, जिसमें काफी समय और मैनपावर खर्च होती थी। नई एआई प्रणाली इस पूरी प्रक्रिया को स्वचालित (Automatic) और रीयल-टाइम बना देगी।

एजेंसी द्वारा मॉडल को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसे जल्द ही परिचालन समिति के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। सफल ट्रायल के बाद इसे अहमदाबाद के 130 प्रमुख चौराहों पर लागू किया जाएगा। स्रोतः डीडीन्यूज

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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