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Global Freshwater Crisis: पृथ्वी पर ताजे पानी का संकट- एक वैश्विक अध्ययन का चौंकाने वाला खुलासा

Global Freshwater Crisis

newslive24x7.com, 12 August, 2025: क्या आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी पर ताजे पानी की कमी की रफ्तार कितनी तेज है? हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने इस विषय पर कुछ ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं जो हमें गंभीर रूप से सोचने पर मजबूर करते हैं। नासा के उपग्रह डेटा पर आधारित इस अध्ययन से पता चला है कि पिछले 22 वर्षों में दुनिया के 101 देशों में ताजे पानी की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है, जो खाद्य उत्पादन के लिए भारी चुनौतियों और संघर्ष व अस्थिरता के बढ़ते जोखिम को दर्शाता है।

एक रिपोर्ट में कहा गया है, जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है, उसके जलाशय सिकुड़ रहे हैं और ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ऐसे में लोग बड़े पैमाने पर धरती के अंदर छिपे ताजे पानी के विशाल, अदृश्य भंडारों को निकालने के लिए ड्रिलिंग कर रहे हैं, जो काफी हद तक अनियंत्रित है।

अब एक नए अध्ययन में दुनिया के ताजे पानी की कुल आपूर्ति की जांच की गई है—जिसमें नदियाँ, बारिश, बर्फ और जलभृत (aquifers) सभी को शामिल किया गया है। यह अध्ययन चेतावनी देता है कि पृथ्वी का सबसे आवश्यक संसाधन तेज़ी से गायब हो रहा है, जिसे शोधकर्ताओं ने “मानवता के लिए एक गंभीर, उभरते खतरे” के रूप में बताया है।

ग्रह के भूभाग सूख रहे हैं। ज़्यादातर जगहों पर वर्षा कम हो रही है, जबकि मिट्टी से नमी ज़्यादा तेज़ी से वाष्पित हो रही है। सबसे बढ़कर, धरती धीरे-धीरे अनियंत्रित भूजल खनन से निर्जलित हो रही है, जो हर महाद्वीप के एक बड़े हिस्से में मौजूद है।

Global Freshwater Crisis: अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी (School of Sustainability, Arizona State University, USA) के नेतृत्व में किए गए और Science Advances पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार:

  • तेज गति से सूख रही है पृथ्वी: 2002 के बाद से महाद्वीपों में भूजल (Terrestrial Water Storage) का स्तर तेजी से गिरा है। यह गिरावट इतनी अधिक है कि हर साल सूखने वाले क्षेत्रों का कुल क्षेत्रफल कैलिफ़ोर्निया राज्य के आकार से दोगुना हो गया है। इन क्षेत्रों को “मेगा-ड्राइंग” क्षेत्र कहा गया है।
  • 75% आबादी पर सीधा असर: यह कोई दूर की समस्या नहीं है। दुनिया की लगभग 75% आबादी, यानी 6 अरब से अधिक लोग, उन 101 देशों में रहते हैं जहाँ ताजे पानी के भंडार कम हो रहे हैं।

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  • पानी की कमी का सबसे बड़ा कारण: इस कमी का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक भूजल निकासी और जलवायु परिवर्तन को बताया गया है। अध्ययन के मुताबिक, कुल भूजल हानि का 68% हिस्सा सीधे तौर पर भूजल की अत्यधिक खपत के कारण है।
  • समुद्र के बढ़ते स्तर में योगदान: एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अब महाद्वीप, बर्फ की चादरों (Ice Sheets) की तुलना में समुद्र के स्तर को बढ़ाने में अधिक ताजे पानी का योगदान दे रहे हैं। इसका मतलब है कि भूजल की कमी और जलवायु परिवर्तन का सीधा संबंध समुद्र के बढ़ते स्तर से है।

भविष्य की चेतावनी और समाधान की आवश्यकता

यह अध्ययन केवल एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में पानी का संकट और भी गहरा सकता है, जिससे सामाजिक और आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

शोधकर्ताओं ने इस संकट से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसमें जल प्रबंधन के लिए बेहतर नीतियां बनाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाना शामिल है।

अध्ययन के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप निम्न स्रोत देख सकते हैं:

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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