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Dr. M. Muruganandam ICAR-CIARI Port Blair: डॉ. मुरुगानंदम अब पोर्ट ब्लेयर में संभालेंगे द्वीपीय कृषि और मत्स्यिकी की कमान

डॉ. मुरुगानंदम ICAR–CIARI, पोर्ट ब्लेयर से जुड़कर अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में तटीय एवं द्वीपीय कृषि, मत्स्यिकी और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों को सुदृढ़ करेंगे

Dr. M. Muruganandam ICAR-CIARI Port Blair: देहरादून / पोर्ट ब्लेयर, 29 दिसंबर 2025ः ICAR–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (IISWC), देहरादून में लगभग तीन दशकों तक अपनी विशिष्ट सेवाएं देने के बाद, प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एम. मुरुगानंदम अब एक नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। 31 दिसंबर 2025 को ICAR–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान (CIARI), पोर्ट ब्लेयर में मत्स्य विज्ञान प्रभाग के प्रमुख के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।

यह बदलाव केवल एक भौगोलिक स्थानांतरण नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों से लेकर बंगाल की खाड़ी के संवेदनशील द्वीपीय पारिस्थितिक तंत्रों तक विज्ञान और सेवा के विस्तार की एक निरंतर यात्रा है।

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तीन दशकों का समर्पित सफर

Dr. M. Muruganandam ICAR-CIARI Port Blair: वर्ष 1996 में एक युवा वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले डॉ. मुरुगानंदम ने देहरादून में बिताए गए अपने समय को एक ‘वैज्ञानिक साधना’ बताया। उन्होंने कहा, “देहरादून और उत्तराखंड ने मेरे चिंतन और जीवन के उद्देश्य को आकार दिया है। यह संस्थान मेरे लिए केवल एक कार्यस्थल नहीं, बल्कि सीखने और मानवीय जुड़ाव का केंद्र रहा है।”

प्रमुख उपलब्धियां और योगदान

Dr. M. Muruganandam ICAR-CIARI Port Blair: अपने कार्यकाल के दौरान डॉ. मुरुगानंदम ने मत्स्यिकी, पशुपालन और एकीकृत कृषि प्रणालियों में 10 से अधिक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां और आजीविका मॉडल विकसित किए। उनके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

After 30 years at ICAR-IISWC Dehradun, Dr. M. Muruganandam joins ICAR-CIARI Port Blair to lead the Fisheries Science Division.
  • प्रौद्योगिकी विकास: उन्होंने मत्स्यिकी, पशुपालन और एकीकृत कृषि प्रणालियों (IFS) पर आधारित 10 से अधिक उत्पादन प्रौद्योगिकियों और आजीविका मॉडलों का विकास एवं परिष्कार किया।
  • वर्षा आधारित मत्स्य पालन: वर्षा जल संचयन के माध्यम से मत्स्य पालन को बढ़ावा देना। वर्षा आधारित तालाबों में उन्नत मत्स्य पालन के साथ ही ग्रामीण कुक्कुट पालन और पशुपालन प्रबंधन के लिए व्यावहारिक मॉडल तैयार किए।
  • स्वदेशी ज्ञान का संरक्षण: पारंपरिक कृषि-मत्स्य पद्धतियों और उत्तराखंड के सामुदायिक मछली पकड़ने के उत्सवों में निहित स्वदेशी ज्ञान का वैज्ञानिक सत्यापन और प्रलेखन किया।

  • जन-जागरूकता अभियान: उनके प्रयासों से उत्तराखंड और उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों के लगभग 10 लाख से अधिक हितधारकों तक संसाधन संरक्षण और नदी शासन (River Governance) का संदेश पहुँचा।

  • संस्थागत संस्थापक: उन्हें ICAR-IISWC में मत्स्यिकी, जलीय कृषि और पशुपालन आधारित सूक्ष्म उद्यमों को जलग्रहण प्रबंधन (Watershed Management) से जोड़ने वाले संस्थापक वैज्ञानिक के रूप में जाना जाता है।

  • अंतरराष्ट्रीय अनुभव: वर्ष 2016-2018 के दौरान अमेरिका की साउथ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी में विज़िटिंग साइंटिस्ट के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने आर्द्रभूमियों और जल गुणवत्ता पर भूमि-उपयोग परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन किया।

  • प्रशासनिक नेतृत्व: संस्थान में उन्होंने सतर्कता अधिकारी, मीडिया नोडल अधिकारी, डिजिटल आउटरीच अध्यक्ष और PME व ज्ञान प्रबंधन इकाई के अधिकारी-प्रभारी (In-charge) जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

  • सामुदायिक जुड़ाव: विश्वविद्यालयों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और स्टार्ट-अप्स के साथ सहयोग सुदृढ़ किया और समुदाय आधारित संगठनों को संसाधन संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया।

  • हिमालयी संरक्षण: मृदा एवं जल संरक्षण, जलग्रहण प्रबंधन और प्रदूषित पर्यावरण के पुनर्वास (Restoration) के क्षेत्र में उनकी सक्रियता विशेष रूप से सराहनीय रही।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नेतृत्व

डॉ. मुरुगानंदम ने 2016-18 के दौरान अमेरिका की साउथ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी में विज़िटिंग साइंटिस्ट के रूप में वैश्विक अनुभव प्राप्त किया, जहाँ उन्होंने भू-स्थानिक उपकरणों के जरिए जल गुणवत्ता पर भूमि-उपयोग के प्रभावों का अध्ययन किया। ICAR-IISWC में उन्होंने PME, ज्ञान प्रबंधन इकाई और मीडिया नोडल अधिकारी जैसी कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिकाएं भी निभाईं।

नया लक्ष्य: पोर्ट ब्लेयर और द्वीपीय विकास

अब पोर्ट ब्लेयर (अंडमान-निकोबार) में डॉ. मुरुगानंदम तटीय कृषि, समुद्री मत्स्य विकास और द्वीपीय जैव विविधता संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने अपनी नई भूमिका पर कहा, “हिमालय से बंगाल की खाड़ी की ओर यह यात्रा उद्देश्य की निरंतरता है। नाजुक द्वीपीय पारिस्थितिक तंत्रों और वहां के समुदायों की सेवा का अवसर मिलना मेरे लिए गौरव की बात है।” इस अवसर पर ICAR-IISWC के सहयोगियों, किसानों और अकादमिक जगत ने डॉ. मुरुगानंदम को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देते हुए विदाई दी।

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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