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Digital Food Currency: क्या है डिजिटल फूड करेंसी? गुजरात से हुई योजना की शुरुआत, राशन वितरण में आएगा बड़ा बदलाव

Digital Food Currency: गांधीनगर/नई दिल्ली: भारत अब राशन वितरण प्रणाली (PDS) में एक बड़े डिजिटल बदलाव का गवाह बन रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुजरात के गांधीनगर से देश के पहले CBDC-आधारित डिजिटल फूड करेंसी (e-Rupee) पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया है।

Digital Food Currency: डिजिटल फूड करेंसी असल में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का एक विशेष रूप है। इसे ‘प्रोग्राम्ड मनी’ कहा जाता है। यानी, सरकार द्वारा लाभार्थी के मोबाइल पर जो डिजिटल रुपया (ई-रूपी) भेजा जाएगा, उसका उपयोग केवल और केवल राशन की दुकान पर अनाज खरीदने के लिए ही किया जा सकेगा। लाभार्थी इस पैसे को किसी अन्य काम या नकद निकासी के लिए इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

गुजरात के गांधीनगर, सूरत, अहमदाबाद और वलसाड से शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट यह सुनिश्चित करेगा कि लाभार्थी का हक सीधा उसके हाथ में पहुंचे। अब बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान) न मिलने की समस्या से राशन रुकने का डर खत्म हो जाएगा।

Digital Food Currency: इस पायलट परियोजना का विस्तार शीघ्र ही चंडीगढ़, पुडुचेरी तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी किया जाएगा।

लाभार्थियों को उनके मोबाइल पर एक QR कोड या SMS वाउचर प्राप्त होगा। राशन की दुकान पर इसे स्कैन करते ही अनाज मिल जाएगा। यह सिस्टम बिना इंटरनेट वाले साधारण फोन पर भी काम करेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

योजना की विशेषताएं

  • लाभार्थियों को उनके डिजिटल वॉलेट (e-Rupee ऐप) में डिजिटल कूपन मिलते हैं। इन कूपनों में अनाज की मात्रा, वस्तु (जैसे गेहूँ, चावल) और कीमत की जानकारी पहले से फीड होती है।

  • अक्सर राशन की दुकानों पर फिंगरप्रिंट न मिलने (biometric failure) के कारण राशन नहीं मिल पाता था। अब केवल QR कोड स्कैन करके या ओटीपी (OTP) के जरिए राशन मिल सकेगा।

  • जो लोग साधारण कीपैड फोन इस्तेमाल करते हैं, उन्हें SMS के जरिए वाउचर कोड भेजा जाता है, जिससे वे अपना राशन ले सकते हैं।

  • चूंकि यह पैसा (डिजिटल करेंसी) प्रोग्राम्ड है, इसलिए यह सुनिश्चित होता है कि सरकार द्वारा भेजा गया पैसा केवल राशन की दुकान पर अनाज खरीदने के लिए ही इस्तेमाल हो, कहीं और नहीं।

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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