By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: प्रकृति पर तीन बड़े खतरे- जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Analysis > प्रकृति पर तीन बड़े खतरे- जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण
Analysiscurrent AffairsenvironmentFeatured

प्रकृति पर तीन बड़े खतरे- जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण

Rajesh Pandey
Last updated: June 8, 2021 9:01 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
Share
SHARE
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण – तीन बड़े ख़तरों से निपटने के लिए, अगले एक दशक में चीन के आकार के बराबर क्षेत्र को बहाल किए जाने की आवश्यकता है। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए सचेत किया है कि प्रकृति जितनी मात्रा में संसाधनों को टिकाऊ ढंग से प्रदान कर सकती है, मानवता उसका करीब डेढ़ गुना इस्तेमाल कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र समाचार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्बहाली के दशक की शुरुआत पर एक रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें वर्ष 2030 तक, कम से कम एक अरब हेक्टेयर क्षरित भूमि को बहाल किए जाने की पुकार लगाई गई है।
साथ ही, इस प्रतिबद्धता को महासागरों के लिए भी लागू किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। इसके अभाव में वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिये ख़तरा बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है।

On #WorldEnvironmentDay, join us as we launch the UN🇺🇳 Decade on Ecosystem Restoration and embark on a journey to rapidly restore our ecosystems.

Because people and nature can heal together. #GenerationRestoration https://t.co/4h22lT1fph pic.twitter.com/zy2ndvsSbj

— Inger Andersen (@andersen_inger) June 3, 2021

Contents
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण – तीन बड़े ख़तरों से निपटने के लिए, अगले एक दशक में चीन के आकार के बराबर क्षेत्र को बहाल किए जाने की आवश्यकता है। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए सचेत किया है कि प्रकृति जितनी मात्रा में संसाधनों को टिकाऊ ढंग से प्रदान कर सकती है, मानवता उसका करीब डेढ़ गुना इस्तेमाल कर रही है।संयुक्त राष्ट्र समाचार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्बहाली के दशक की शुरुआत पर एक रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें वर्ष 2030 तक, कम से कम एक अरब हेक्टेयर क्षरित भूमि को बहाल किए जाने की पुकार लगाई गई है।साथ ही, इस प्रतिबद्धता को महासागरों के लिए भी लागू किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। इसके अभाव में वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिये ख़तरा बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है।उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के ज़रिये प्राकृतिक स्थलों की रक्षा व उन्हें बढ़ावा मिलेगा, स्वच्छ वायु व जल सुनिश्चित किया जा सकेगा, चरम मौसम की घटनाओं में कमी आएगी और मानव स्वास्थ्य, जैवविविधता को बढ़ावा मिलेगा।यूएन एजेंसियों के प्रमुखों ने बताया कि क्षरण की वजह से तीन अरब से अधिक लोगों के कल्याण पर असर पड़ा रहा है, जो कि विश्व आबादी का 40 फ़ीसदी है।यूएन एजेंसियों ने इस रिपोर्ट में चेतावनी जारी की है कि प्रकृति जितनी मात्रा में संसाधनों को टिकाऊ ढंग से प्रदान कर सकती है, मानवता उसका 1.6 गुना इस्तेमाल कर रही है।यूएन रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1990 के दशक से अब तक, 42 करोड़ हेक्टेयर वनभूमि की कटाई हुई है, और सदस्य देश वर्ष 2030 तक वनभूमि को तीन फ़ीसदी बढ़ाने के संकल्प को पूरा करने से दूर हैं।यूएन एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि व्यापक स्तर पर पारिस्थितिकी तंत्रों को ढहने और जैवविविधता को लुप्त होने से बचाने के लिए, महज़ संरक्षण प्रयासों पर निर्भरता अपर्याप्त होगी।इस क्रम में उन्होंने देशों से आग्रह किया है कि कोविड-19 से पुनर्बहाली योजनाओं में कार्बन उत्सर्जन पर निर्भर सेक्टरों से सब्सिडी को हटाया जाना होगा।यूएन पर्यावरण एजेंसी में जलवायु एवं प्रकृति शाखा के प्रमुख टिम क्रिस्टोफ़रसन ने बताया कि संरक्षण प्रयासों के साथ-साथ, पेरिस जलवायु समझौते में तय लक्ष्यों को भी पूरा करना होगा।इस समझौते में वैश्विक औसत तापमान में बढ़ोतरी को पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से दो डिग्री सेल्सियस से कम रखने का लक्ष्य रखा गया है और 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयास किए जाने हैं।उन्होंने कहा, “अगर हम ऐसा ज़रूरी स्तर पर करते हैं, तो इसके जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता से इतर भी लाभ होंगे…खाद्य सुरक्षा के लिए, स्वास्थ्य के लिए, स्वच्छ जल के लिए, रोज़गारों के लिए।”उनके मुताबिक पुनर्बहाली से इन सभी टिकाऊ विकास लक्ष्यों में मदद मिल सकती है।वन, नदी, महासागर और तटीय इलाक़े – ये पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण के तिहरे ख़तरों से प्राकृतिक संरक्षण प्रदान करते हैं।मगर मौजूदा हालात में भावी पीढ़ियों के कल्याण के लिए ख़तरा पैदा हो रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक खेती योग्य भूमि, वनों घास के मैदानों, पर्वतों, शहरी इलाक़ों, ताज़े पानी के क्षेत्र और महासागरों पर सबसे अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।यूएन एजेंसियों ने ज़ोर देकर कहा कि दो अरब हेक्टेयर क्षरित भूमि पर विश्व के सबसे निर्धन और हाशिएकरण का शिकार लोग रहते हैं।रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भूमि की पुनर्बहाली के लक्ष्यों को पूरा करने के लिये, वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 200 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। Keywords:- World Environment Day, Ecosystem Restoration, People and Nature can heal together, climate change, nature degradation and pollution, The Food and Agriculture Organization (FAO), United Nations Environment Program (UNEP),Ecosystem Restoration, Climate and Nature Branch, UN Environment Agency, विश्व पर्यावरण दिवस, प्रकृति पर तीन बड़े खतरे
यूएन पर्यावरण एजेंसी की कार्यकारी निदेशक इन्गर एण्डरसन और यूएन कृषि एजेंसी के महानिदेशक क्यू डोन्गयू ने रिपोर्ट को जारी करते हुए सभी देशों से वैश्विक पुनर्बहाली प्रयासों का संकल्प लिए जाने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के ज़रिये प्राकृतिक स्थलों की रक्षा व उन्हें बढ़ावा मिलेगा, स्वच्छ वायु व जल सुनिश्चित किया जा सकेगा, चरम मौसम की घटनाओं में कमी आएगी और मानव स्वास्थ्य, जैवविविधता को बढ़ावा मिलेगा।
यूएन एजेंसियों के प्रमुखों ने बताया कि क्षरण की वजह से तीन अरब से अधिक लोगों के कल्याण पर असर पड़ा रहा है, जो कि विश्व आबादी का 40 फ़ीसदी है।
यूएन एजेंसियों ने इस रिपोर्ट में चेतावनी जारी की है कि प्रकृति जितनी मात्रा में संसाधनों को टिकाऊ ढंग से प्रदान कर सकती है, मानवता उसका 1.6 गुना इस्तेमाल कर रही है।
यूएन रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1990 के दशक से अब तक, 42 करोड़ हेक्टेयर वनभूमि की कटाई हुई है, और सदस्य देश वर्ष 2030 तक वनभूमि को तीन फ़ीसदी बढ़ाने के संकल्प को पूरा करने से दूर हैं।

यूएन एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि व्यापक स्तर पर पारिस्थितिकी तंत्रों को ढहने और जैवविविधता को लुप्त होने से बचाने के लिए, महज़ संरक्षण प्रयासों पर निर्भरता अपर्याप्त होगी।
इस क्रम में उन्होंने देशों से आग्रह किया है कि कोविड-19 से पुनर्बहाली योजनाओं में कार्बन उत्सर्जन पर निर्भर सेक्टरों से सब्सिडी को हटाया जाना होगा।
यूएन पर्यावरण एजेंसी में जलवायु एवं प्रकृति शाखा के प्रमुख टिम क्रिस्टोफ़रसन ने बताया कि संरक्षण प्रयासों के साथ-साथ, पेरिस जलवायु समझौते में तय लक्ष्यों को भी पूरा करना होगा।
इस समझौते में वैश्विक औसत तापमान में बढ़ोतरी को पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से दो डिग्री सेल्सियस से कम रखने का लक्ष्य रखा गया है और 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयास किए जाने हैं।
उन्होंने कहा, “अगर हम ऐसा ज़रूरी स्तर पर करते हैं, तो इसके जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता से इतर भी लाभ होंगे…खाद्य सुरक्षा के लिए, स्वास्थ्य के लिए, स्वच्छ जल के लिए, रोज़गारों के लिए।”
उनके मुताबिक पुनर्बहाली से इन सभी टिकाऊ विकास लक्ष्यों में मदद मिल सकती है।
वन, नदी, महासागर और तटीय इलाक़े – ये पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण के तिहरे ख़तरों से प्राकृतिक संरक्षण प्रदान करते हैं।
मगर मौजूदा हालात में भावी पीढ़ियों के कल्याण के लिए ख़तरा पैदा हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक खेती योग्य भूमि, वनों घास के मैदानों, पर्वतों, शहरी इलाक़ों, ताज़े पानी के क्षेत्र और महासागरों पर सबसे अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।
यूएन एजेंसियों ने ज़ोर देकर कहा कि दो अरब हेक्टेयर क्षरित भूमि पर विश्व के सबसे निर्धन और हाशिएकरण का शिकार लोग रहते हैं।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भूमि की पुनर्बहाली के लक्ष्यों को पूरा करने के लिये, वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 200 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।
 Keywords:- World Environment Day, Ecosystem Restoration, People and Nature can heal together, climate change, nature degradation and pollution, The Food and Agriculture Organization (FAO), United Nations Environment Program (UNEP),Ecosystem Restoration, Climate and Nature Branch, UN Environment Agency, विश्व पर्यावरण दिवस, प्रकृति पर तीन बड़े खतरे

You Might Also Like

उत्तराखंड में 38वें राष्ट्रीय खेलः मेडिकल सुविधा के लिए 141 टीमें बनाईं, 150 डॉक्टर तैनात
हल्द्वानी हिंसा में घायल महिला उप निरीक्षकों ने किया पुलिस चौकी का उद्घाटन
UKPSC ने समूह ग के इन पदों के लिए आवेदन मांगे
Video- मिसालः गांव में सब्जियां उगाने के लिए महिला प्रधान ने निजी ऋण लेकर बनवाई टंकी
मंत्रालय की टीवी चैनलों को सलाह, सिलक्यारा में चल रहे बचाव कार्यों को सनसनीखेज न बनाएं
TAGGED:Climate and Nature BranchClimate ChangeEcosystem Restorationnature degradation and pollutionPeople and Nature can heal togetherThe Food and Agriculture Organization (FAO)UN Environment AgencyUnited Nations Environment Program (UNEP)World Environment Dayप्रकृति पर तीन बड़े खतरेविश्व पर्यावरण दिवस
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article मिल्क स्टोरी-2ः इन पशुपालकों के हालात जानकर बहुत दुख होता है
Next Article ब्लैक फंगसः कम प्रतिरोधक क्षमता, मधुमेह से पीड़ित लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?