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प्रिंस के उपचार के लिए चिफल्डी पहुंची मेडिकल टीम

जिलाधिकारी डॉ. सौरभ गहरवार ने फोन पर प्रिंस की दादी से बात की

चिफल्डी। न्यूज लाइव

चिफल्डी नदी में बाढ़ से प्रभावित परिवारों में पांच माह प्रिंस के उपचार के लिए मेडिकल टीम तौलिया काटल के प्राइमरी स्कूल भवन पहुंची। चिकित्सक ने प्रिंस के लिए दवाइयां उपलब्ध कराईं और खानपान के संबंध में उनकी माता और दादी को आवश्यक सलाह दी गईं। जिलाधिकारी डॉ. सौरभ गहरवार ने स्वयं बच्चे की दादी से फोन पर बात की और बच्चे के उपचार में प्रशासन की ओर से पूरी मदद का आश्वासन दिया।

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गुरुवार को चिफल्डी गांव में जाने के दौरान न्यूज लाइव ने उन लोगों से बात की थी, जो आपदा के बाद से ही प्राइमरी स्कूल के दो कमरों में रह रहे हैं। इस दौरान रजनी देवी ने बताया था, उनके बेटे प्रिंस का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। मुझे अपने बेटे की सबसे ज्यादा चिंता है। प्रिंस का देहरादून के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। हमें 24 तारीख को चेकअप के लिए देहरादून जाना था, पर अब हम क्या कर सकते हैं। गांव से बाहर जाने के रास्ते बंद हैं। कोई भी ऐसा रास्ता नहीं है, जहां से पांच महीने के बच्चे को लेकर जा सकें।

न्यूज लाइव ने इस संबंध में टिहरी गढ़वाल के जिलाधिकारी डॉ. सौरभ गहरवार को जानकारी दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर शुक्रवार को एसडीएम लक्ष्मीराज चौहान मेडिकल टीम के साथ चिफल्डी पहुंचे। प्रिंस के दादा प्रताप सिंह पंवार ने बताया, मेडिकल टीम ने बच्चे का चेकअप किया और दवाइयां दीं। एसडीएम ने किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क करने के लिए फोन नंबर उपलब्ध कराया है। प्रशासन ने पूरी मदद का आश्वासन दिया है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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