Amrit Sarovar Khadri Khadakmaf: राजेश पांडेय, ऋषिकेश, 02 फरवरी, 2026ः डोईवाला ब्लॉक के खदरी खड़कमाफ गांव के गंगा नदी से लगे इस इलाके में अक्सर सुनसानी छाई रहती थी, लोग यहां कम ही आते जाते थे। इस रविवार (एक फरवरी, 2026) की सुबह हल्की बूंदाबांदी के बीच ठंडक वाले मौसम का मिजाज अचानक बदला और धूप निकल आई। लाजवाब मौसम में, वर्षों पुरानी पॉलिटेक्निक के पास के इस इलाके में बच्चों, युवाओं और उनके बुजुर्गों की आवाजाही बढ़ रही है। इनमें आसपास के गांवों के ही नहीं बल्कि ऋषिकेश शहर के विभिन्न इलाकों से लोग रहे हैं।
Amrit Sarovar Khadri Khadakmaf: यहां ऐसा क्या कमाल हो गया कि कुछ माह से यह इलाका आकर्षण का केंद्र बन गया। यहां ग्राम पंचायत की पहल पर मनरेगा (वर्तमान में VB-G RAM G 2025) के आर्थिक सहयोग से बना अमृत सरोवर, पार्क और ओपन जिम हर किसी के लिए उपलब्ध है। साथ ही, ग्राम पंचायत की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की स्थिति में हैं। मकर संक्रांति से अमृत सरोवर में बोटिंग शुरू हुई है। फिलहाल यह निशुल्क है। टेंडर के बाद ही शुल्क लगेगा।

ग्राम प्रधान संगीता थपलियाल का यह दूसरा कार्यकाल है। उनके इस कार्यकाल में अमृत सरोवर योजना अस्तित्व में आई। उनका कहना है, “यह सिर्फ नौ बीघा में झील का निर्माण बोटिंग या पर्यटन को बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, इसका उद्देश्य ग्राम पंचायत की खाली पड़ी भूमि को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना और उसको अवैध कब्जों से बचाए रखना भी है। हम ग्राम पंचायत की संपदा को बचाने के साथ उसको जनहित में विकसित करने के साथ, पंचायत के विकास के लिए आर्थिक स्रोत बना रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।”

प्रधान संगीता थपलियाल ने क्या कहा
- “यह झील केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि ग्राम सभा की विरासत को अवैध कब्जों से बचाने का एक सुरक्षा कवच भी है।”
- “हमारा लक्ष्य पंचायत की खाली भूमि को ‘जनहित’ की संपत्ति में बदलकर गांव के विकास के लिए आत्मनिर्भर आर्थिक स्रोत बनाना है।”
- “जब ग्राम पंचायत की संपदा सुरक्षित होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होंगे, तभी असल मायनों में ग्रामीण विकास सार्थक होगा।”

Amrit Sarovar Khadri Khadakmaf: ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता शांति प्रसाद थपलियाल बताते हैं, ग्राम पंचायत के पास इस इलाके में सैकड़ों बीघा भूमि है, जो किसी इस्तेमाल में नहीं थी। केंद्र सरकार की अमृत सरोवर परियोजना का प्रस्ताव मंजूर हो गया और मनरेगा के तरह लगभग 27 लाख और बाकी निर्माण सामग्री का खर्चा मिलाकर लगभग 40 लाख रुपये की लागत से नौ बीघा झील का निर्माण कराया गया। यह झील लगभग छह से सात मीटर गहरी है, क्योंकि हमें इसे पास ही गंगा नदी से कटकर आए खाले से ऊपर उठाना था, इसलिए काफी भराव किया गया, पुश्ते बनाए गए। अब इसके चारों तरफ सौंदर्यीकरण का कार्य होगा।
ये लाभ मिलेंगे
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जल संरक्षण: झील को बारिश के पानी व सोलर ट्यूबवैल से भरा जाता है, जिससे क्षेत्र का ‘वाटर साइकिल’ और भूजल स्तर सुधरेगा।
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अवैध कब्जों से मुक्ति: खाली पड़ी पंचायत भूमि का उपयोग कर उसे सुरक्षित किया गया है।
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स्थानीय रोजगार: कैंटीन, टेंडर और पर्यटन गतिविधियों से गांव के युवाओं को रोजगार मिलेगा।
थपलियाल बताते हैं, कुछ माह से यहां ग्राम पंचायत ही नहीं, आसपास के इलाकों से लोग नौकाविहार के लिए आ रहे हैं। हमने तीन पैडल बोट रखी हैं, जिनका कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। रविवार को यहां काफी लोग आते हैं। जैसे जैसे इसका प्रचार हो रहा है, लोगों की संख्या बढ़ रही है। बोटिंग के लिए लाइन लग रही है। इस झील में हमने मछलियों के बीज डाले थे। इसमें मछली के लगभग पचास हजार बच्चे डाले जाने की क्षमता है। मत्स्यपालन विभाग ने ग्राम पंचायत से संपर्क किया है और झील का भी निरीक्षण किया था। साथ ही, यहां झील के आसपास जैवविविधता भी समृद्ध हो रही है। हमने यहां कई तरह की चिड़िया, कीट पतंगें देखे हैं।
झील में बरसात का पानी इकट्ठा होने के साथ ही, इसको सोलर ऊर्जा से चलने वाले ट्यूबवैल के पानी से भरा जा रहा है। पास में ही, पेयजल टैंक का निर्माण हो रहा है। भूमिगत जल बढ़ने से पेयजल टैंक के लिए भी पानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। कुल मिलाकर यह एक तरह का वाटर साइकिल स्थापित हो गया है।
जल्द ही, झील में नौकायान के टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। इसके साथ ही, यहां एक कैंटीन के टेंडर भी मांगे जाएंगे। कुल मिलाकर, हमें प्रतिवर्ष ग्राम पंचायत के लिए फिलहाल छह से सात लाख रुपये प्रतिवर्ष आय होने की उम्मीद है। मछली पालन से यह राशि अधिक होगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
हम यहां मनोरंजन एवं रोमांच की गतिविधियों को भी बढ़ावा देने के प्रयास करेंगे। हॉट एयर बैलून की भी व्यवस्था की जाएगी। यह सभी गतिविधियां ग्राम पंचायत की आय बढ़ाएंगी, जो विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

वहीं, ग्राम पंचायत की ही खाली पड़ी 18 बीघा भूमि पर पार्क और ओपन जिम बनाए गए हैं। यहां बच्चों के लिए झूले सहित हर आयु के लोगों के लिए व्यायाम के संसाधन उपलब्ध हैं। हर दिन लोग यहां पहुंच रहे हैं। रविवार को लोगों की संख्या ज्यादा होती है।
वहां परिवार सहित आए लोगों का कहना है, ग्राम पंचायत की यह पहल बहुत अच्छी है। साफ स्वच्छ हवा में, खुले पार्क में बच्चों को लेकर आना हमारे लिए खास पल है। यहां खदरीखड़क माफ और आसपास के गांवों से ही नहीं बल्कि ऋषिकेश से भी लोग परिवार के साथ पहुंच रहे हैं।
परियोजना का विवरण एवं उपलब्धियां
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | खदरी खड़कमाफ गांव, डोईवाला ब्लॉक (गंगा नदी के समीप) |
| योजना/सहयोग | केंद्र सरकार की अमृत सरोवर परियोजना एवं मनरेगा ( वर्तमान में VB-G RAM G 2025) |
| ग्राम प्रधान | संगीता थपलियाल (द्वितीय कार्यकाल) |
| कुल लागत | लगभग ₹40 लाख (₹27 लाख मनरेगा + अन्य निर्माण सामग्री) |
| झील का क्षेत्रफल | 09 बीघा |
| झील की गहराई | लगभग 6 से 7 मीटर |
| पार्क एवं ओपन जिम क्षेत्र | 18 बीघा (ग्राम पंचायत की भूमि) |
| बोटिंग की शुरुआत | मकर संक्रांति 2026 से (फिलहाल निशुल्क) |
| मत्स्य पालन क्षमता | लगभग 50,000 मछली के बच्चे |
| अनुमानित वार्षिक आय | ₹6 से ₹7 लाख |
| मुख्य सुविधाएं | अमृत सरोवर (झील), ओपन जिम, बच्चों के लिए झूले, सोलर ट्यूबवैल, कैंटीन (प्रस्तावित) |
| भविष्य की योजनाएं | हॉट एयर बैलून, नौकायान टेंडर, जैव-विविधता संरक्षण और सौंदर्यीकरण |
खदरी खड़कमाफ के निवासी नरेंद्र रयाल कहते हैं, “अपने गांव की इस उपलब्धि पर भावुक हूं। हमारे प्रधान जी ने यह शानदार काम किया है। बच्चों के खेलने कूदने के लिए जगह मिल गई है। यहां आकर बच्चे खुश होते हैं। यहां मॉर्निंग, इवनिंग वॉक के लिए काफी अच्छा काम हुआ है। इससे गांव की आय होगी, विकास होगा। यहां एक स्टेडियम भी बन रहा है। गांव की तरक्की हो रही है। हमारे गांव का नाम होगा।”
पुलिया निर्माण के लिए पैसे कम पड़े तो बेच दी अपनी जमीन
शांति प्रसाद बताते हैं, उनके दादा जी, मुकंदी लाल थपलियाल 1984 में खदरी खड़कमाफ के लिए पहले प्रधान बने थे। उनके कार्यकाल में ग्राम पंचायत में विकास कार्य हुए। पॉलिटेक्निक से पहले बनी पुरानी पुलिया, जिस पर आज भी भारी वाहन आ जा सकते हैं, उनके कार्यकाल में ही बनी थी। उस समय पुलिया निर्माण में आकलन से ज्यादा खर्चा हो गया। श्रमिकों का लगभग 50 हजार रुपये बकाया हो गया। सभी श्रमिक उनके घर पर आ गए। उनकी राशि के भुगतान के लिए उनके दादा जी ने अपनी लगभग तीन बीघा जमीन बेच दी और श्रमिकों का भुगतान किया। वहीं, पुलिया निर्माण के लिए सेटरिंग चाहिए थी, जिसके लिए उन्होंने अपने एक कमरे की टीन उखाड़कर उपलब्ध कराई।













