TEER technique heart valve repair AIIMS Rishikesh: ऋषिकेश, 08 जनवरी, 2026: एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने एक जटिल मामले में 65 वर्षीय वृद्ध का जीवन बचाने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। हृदय के वाल्व में गंभीर लीकेज और पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह जाने के बावजूद, डॉक्टरों ने बिना ‘ओपन हार्ट सर्जरी’ के अत्याधुनिक TEER (टी.ई.ई.आर) तकनीक का उपयोग कर रोगी का सफल इलाज किया है।
क्या था मामला?
TEER technique heart valve repair AIIMS Rishikesh: रुड़की निवासी 65 वर्ष के एक व्यक्ति को लंबे समय से सांस फूलने और चलने-फिरने में असमर्थता हो रही थे। वर्ष 2023 में उनके हृदय में स्टेंट डाले जा चुके थे, लेकिन हाल ही में उनके माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज (Severe Mitral Regurgitation) पाया गया। अधिक उम्र और पहले हो चुकी सर्जरी के कारण ओपन हार्ट सर्जरी करना अत्यंत जोखिम भरा था। ऐसे में एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञों ने न्यूनतम इनवेसिव तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।
TEER तकनीक क्या है
TEER technique heart valve repair AIIMS Rishikesh: कार्डियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. बरूण कुमार ने बताया कि हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य (60%) से घटकर मात्र 20% रह गई थी। टीम ने ‘ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर’ (TEER) तकनीक का प्रयोग किया। इसमें MitraClip की सहायता से वाल्व की लीकेज को बंद किया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह से इंटरवेंशनल थी, जिसमें मरीज की छाती खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस प्रक्रिया में जांघ की रक्त नली के माध्यम से एक छोटी क्लिप हृदय तक पहुंचायी जाती है। यह क्लिप वाल्व के लीकेज वाले हिस्सों को जोड़ देती है, जिससे रक्त का उल्टा प्रवाह रुक जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीज बहुत जल्दी स्वस्थ होता है और उसे अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है। जगतवीर सिंह को सफल इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
इस जटिल प्रक्रिया को पूरा करने वाली टीम में डॉ. बरूण कुमार के साथ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुवेन कुमार, सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी और एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार शामिल रहे।













