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डिजिटल महोत्सवः रुद्रप्रयाग की मनीषा रमोला का एआई आधारित औषधीय पत्ती एप सम्मानित

नई दिल्ली। आजादी का डिजिटल महोत्सव सप्ताह में इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence -AI) के सहयोग से विभिन्न सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के समाधान की पेशकश करने वाली 20 परियोजनाओं को सम्मानित किया गया।
29 नवंबर से 5 दिसंबर तक चलने वाले डिजिटल महोत्सव सप्ताह के तहत सरकारी स्कूलों के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम : युवाओं के लिए जवाबदेह कृत्रिम बुद्धिमता कार्यक्रम में स्वास्थ्य, कृषि और सड़क सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समस्याओं के समाधान करने के लिए छात्र-छात्राओं ने नवीन एआई परियोजनाओं को विकसित किया।

इनमें एक परियोजना उत्तराखंड के गवर्नमेंट इंटर कॉलेज फाटा, रुद्रप्रयाग की मनीषा रमोला द्वारा बनाया गया औषधीय पत्ती नामक एक एआई मॉडल आधारित मोबाइल एप है, जो मुख्य आकर्षणों में से एक था।
मनीषा ने केवल एक चित्र के सहारे औषधीय पत्तियों और जड़ी बूटियों के बारे में गहन जानकारी पेश की। यह मॉडल दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने आसपास के पेड़ पौधों के औषधीय लाभों को समझने और उपयोग करने में मदद करेगा।
वहीं, अरुणाचल प्रदेश के आर्य पैंगिंग ने अपनी परियोजना के तहत दिखाया कि कैसे एआई उपकरण के सहारे सड़क की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सकता है। इस कंप्यूटर विजन आधारित तकनीक का उपयोग खराब सड़कों के बारे में अलर्ट भेजने, जोखिम का आकलन करने और ड्राइवरों को पहले ही अन्य मार्गों पर जाने के लिए किया जा सकता है।
राजस्थान के इंद्रपुरा से मोहित टेलर और सोनिया मिश्रा ने ‘स्केयरक्रो’ नामक एक स्मार्ट एआई मॉडल विकसित किया, जो जानवरों या पक्षियों का पता लगा सकता है और फसल या उपज के नुकसान से बचने के लिए खेत में जानवरों को डराने के लिए तेज आवाजें निकाल सकता है।
सरकारी स्कूलों के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम : युवाओं के लिए जवाबदेह कृत्रिम बुद्धिमता और भूमि के स्टार्ट अप्स की चुनौतियों के तहत आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में सबसे नई परियोजनाओं को भी सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन तीन चरणों में किया गया। पहले चरण में 35 राज्यों और 5,724 शहरों व कस्बों के सरकारी स्कूलों के छात्रों तक पहुंच बनाई गई। इनमें 52 हजार से ज्यादा पंजीकृत छात्रों में से 11,466 छात्रों ने एआई में प्रशिक्षण पूरा किया।
दूसरे चरण में शीर्ष सौ सुझावों का चयन किया गया था। इन सौ सुझावों का प्रतिनिधित्व 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 125 छात्रों ने किया, जिनमें 67 लड़कियां और 58 लड़के शामिल थे।
ये सभी सरकारी स्कूलों, केंद्र सरकार के केंद्रीय विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और नवोदय विद्यालयों के थे। छात्रों ने हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में आयोजित बैचों में बुनियादी एआई की अवधारणाएं, डोमेन, प्रोग्रामिंग भाषाओं का परिचय, डेटा संरचना और प्रोजेक्ट पिचिंग के बारे में जानकारी हासिल की।
इसके अलावा पहले स्तर का प्रशिक्षण पूरा करने वाले छात्रों को प्रमाण पत्र दिया गया। इसके अलावा उन्हें इंटरनेट के जरिए सामग्री और पहुंच के साथ अपनी एआई यात्रा जारी रखने से संबंधित प्रधानमंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी के मंत्री के संदेश भी भेजे गए।
तीसरे चरण में वर्चुअल प्रदर्शन और मूल्यांकन के लिए 60 सुझावों का चयन कर उन्हें आमंत्रित किया गया। इनमें से 27 छात्रों द्वारा पेश की गई 20 श्रेष्ठ परियोजनाओं को विजेताओं के रूप में चुना गया था।
जिन परियोजनाओं का चयन किया गया, वो इस प्रकार हैं-
एआई अपशिष्ट वर्गीकरण, आयुर्टेक बैंड, एआई स्वास्थ्य सेवा में मरीजों का निदान, एक ऐसा ऐप जो किसानों के लिए उन फसलों की पहचान कर सके जो निश्चित समय में उगाई जा सकें, दिव्यांग रोशनी कंप्यूटर दृष्टि आधारित सेरेब्रल पाल्सी डिटेक्टर, आभासी सहायता सह अभिभावकीय मार्गदर्शन, ट्री थिनिंग स्कैनर, ‘मिट्टी को जानो, फसल पहचानों’ मृदा विश्लेषण और फसल संस्तुति तकनीकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हेल्थकेयर के लिए वरदान, दृष्टिबाधितों के लिए मददगार, छात्रों को सजग बनाना और तंद्रा का पता लगाना, एथलीटएक्स फॉर आत्मनिर्भर एथलीट, स्मार्ट आई, बॉडी ट्रैकर, सुनने में अयोग्य के लिए ऐप, खरपतवार और फसल जांच प्रणाली, जीवन रक्षक और डॉक्टर हेल्पर।

The shortlisted projects are: The AI Waste Classifier, Ayurtech Band, AI Idea in Healthcare to diagnose patients, App of Growth for farmers to identify crops that can be best harvested at a given time, Divyang Roshni a computer vision based Cerebral Palsy detector,Virtual Assistance cum Parental Guidance, Tree Thinning Scanner, ‘Mitti ko jaano, fasal pehchano’ Soil analysis and crop recommendation technology, Artificial Intelligence is a Boon for Healthcare, Helper of visually challenged, Be attentive or Drowsiness detection in students, AthleteX for the Atmanirbhar Athlete, Smart Eye, Body Tracker, App for hearing-impaired, Weed and Crop Detection System, Life Saver and Doctors Helper.

इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विजेताओं को सम्मानित करते हुए कहा कि समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक विकास सुनिश्चित करने के लिए नए युग के कौशल पर भविष्य के कार्यबल को कुशल बनाना अनिवार्य है। केंद्रीय मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नेतृत्व में अगली पीढ़ी को भविष्य के लिए तैयार करने के महत्व को रेखांकित किया।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव अजय साहनी ने कहा, मुझे वास्तव में खुशी है कि इस बार हमने सरकारी स्कूली बच्चों को युवाओं के लिए जवाबदेह कृत्रिम बुद्धिमता कार्यक्रम समर्पित किया है। इसमें 50,000 से अधिक स्कूली बच्चों ने भाग लिया है। मैं मानता हूं कि इतनी कम उम्र में एआई तकनीक में महारत हासिल करने वालों को कोई नहीं रोक सकता।
इंटेल फाउंड्री सेवा की इंटेल इंडिया की देश प्रमुख और उपाध्यक्ष निवरूति राय ने कहा कि इंटेल एआई कौशल के निर्माण और भविष्य के कार्यबल के बीच डिजिटल तैयारी में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम भारत भर के सरकारी स्कूल के छात्रों को इन कौशलों से लैस करने में एमईआईटीवाई और एनईजीडी के सहयोग को बहुत महत्व देते हैं।
नेशनल ई गवर्नेंस डिवीजन और माईगॉव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि 13 लड़कियां और 14 लड़के भारत के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। आने वाले समय में ये ही हावी रहेंगे। ये ही बच्चे हैं जो आगे बढ़ेंगे और अगली पीढ़ी के पथप्रदर्शक बनेंगे और वैश्विक व भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सीईओ होंगे।
उन्हें इस कार्यक्रम के जरिए तैयार करना और उनमें मजबूत क्षमता निर्माण ही एक तरीका है। भारत में मौजूद आईटी और एआई क्षमताओं को दुनिया को भी दिखाना है।
पुरस्कार समारोह के अंत में इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए एचयूएमआई (बीएसएफ हाई टेक अंडरटेकिंग फॉर मैक्सिमाइज़िंग इनोवेशन) चैलेंज के तहत स्टार्ट अप्स को भी सम्मानित किया। जिसने बीएसएफ के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों की सफलतापूर्वक पहचान कर प्रभावशाली तरीके से उसका समाधान निकाला।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल आत्मनिर्भर भारत के तहत एमईआईटीवाई ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ साझेदारी में भूमि (बीएसएफ हाई टेक अंडरटेकिंग फॉर मैक्सिममाइजिंग इनोवेशन) के तहत सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर बड़ी चुनौती को अपने हाथ में लिया।
बीएसएफ द्वारा पहचान की गई समस्या के समाधान के लिए स्टार्ट अप से प्रभावशाली समाधान खोजे गए। इसमें मुख्य रूप से चार मुख्य समस्याओं का समाधान खोजना शामिल था। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों मोबाइल फोन का पता लगाना, सुरंगों या भूमिगत गतिविधियों का पता लगाना, दूरदराज क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार प्रणाली और ड्रोन विरोधी तकनीक। भारतीय उद्यमियों द्वारा किए गए नवाचारों का लाभ उठाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भारतीय स्टार्ट अप और प्रमुख संस्थानों के साथ हैकथॉन का आयोजन किया था।
एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब (एमएसएच) पोर्टल पर कुल 47 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 8 स्टार्ट अप को फील्ड ट्रायल और बीएसएफ के सामने आने वाली समस्याओं के लिए नए तरीके के समाधान प्रदान करने के लिए चुना गया था।
विहान नेटवर्क्स लिमिटेड, जियो रडार.एआई, एएवीआरटीटीआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, डीएसआरएल, ऑपटिमसलॉजिक सिस्टम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गुरूत्वा सिस्टमस प्राइवेट लिमिटेड और बिग बैंग बूम सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को रसद सहायता और उत्पाद विकास के अगले चरण में आगे बढ़ने के लिए सक्षम बनाने को प्रत्येक को 10 लाख रुपये दिए गए।
पुरस्कार प्रदान करते समय केंद्रीय मंत्री के साथ दिल्ली पुलिस के आयुक्त राकेश अस्थाना भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि यहां के युवाओं ने बीएसएफ की समस्याओं का तकनीकी समाधान ढूंढा है और मुझे उम्मीद है कि बीएसएफ इस नवोदित प्रतिभा को बढ़ावा देगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय साहनी ने कहा, सरकारी संसाधनों और जनशक्ति का उपयोग कर सभी समस्याओं को हल करने की कोशिश के बजाय हम प्रतिभा की तलाश करते हैं। यह दृष्टिकोण में बदलाव का प्रतीक है। भारत में हर जगह बहुत बड़ी प्रतिभा है। हमें केवल इन प्रतिभाशाली लोगों के सामने समस्याएं पेश करनी हैं, जो पहले से ही हमारे चारों ओर हैं और वे उनका समाधान करेंगे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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