By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: ऋषिकेश में बदल रही थी अभिनेता संजय मिश्रा की जिंदगी
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Blog Live > ऋषिकेश में बदल रही थी अभिनेता संजय मिश्रा की जिंदगी
Blog LiveCareerentertainmentFeaturedNewsUttarakhand

ऋषिकेश में बदल रही थी अभिनेता संजय मिश्रा की जिंदगी

Rajesh Pandey
Last updated: May 11, 2023 11:58 pm
Rajesh Pandey
3 years ago
Share
फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा, रामझूला के पास चाय की चुस्कियां लेते हुए। फोटो- सार्थक पांडेय
SHARE

राजेश पांडेय। ऋषिकेश

भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता संजय मिश्रा की सादगी के क्या कहने, आम इंसान की तरह जीते हैं और कहते हैं, जो मैं असल जिंदगी में देखता हूं, वो रील लाइफ में भी जीने की कोशिश करता हूं। मैं अभिनेता हूं, मेरा काम अभिनय करना है, चाहे कॉमेडी हो या फिर सीरियस रोल हो। मुझे अच्छा लगता है, दोनों तरह का काम करना है। मेरे डायरेक्टर्स, जिन्होंने मुझे इस तरह के रोल करने के लिए प्रेरित किया, मैं उनका आभारी हूं, कि उन्होंने मुझे दूसरे तरह के रोल के लिए भी ट्राय किया। अदरवाइज, हमारे यहां फिल्म इंडस्ट्री में यह होता है, कॉमेडी करने लगे, तो कॉमेडी, कॉमेडी, कॉमेडी…,ये सब होता है। पर, मैं थोड़ा बच गया। मैं कॉमेडी अभी भी करता हूं। मेरी भूलभुलैया, सर्कस, वो तीन दिन, वध…, जैसी फिल्में रीलिज हुई हैं, सब अलग-अलग तरह की फिल्में हैं। यह अच्छी बात है कि मेरे लिए कि अलग-अलग फिल्में कर रहा हूं।

आप अभिनय के लिए किसी फ्रेम में नहीं बंधे, के सवाल पर कहते हैं, नहीं मैं नहीं बंधा। मुझे बांधा नहीं गया। बांध तो देते ही, पर हर तरह का प्रयास किया। इसमें मेरा पर्सनल प्रयास भी है। लोगों ने मुझे अलग अलग भूमिकाओं में पसंद किया। आगे भी डिफरेंट रोल में आ रहा हूं।

रामझूला के पास, संजय मिश्रा से मुलाकात के लिए वरिष्ठ पत्रकार गौरव मिश्रा के साथ पहुंचे। हम सोच रहे थे कि संजय मिश्रा, जैसे प्रसिद्ध अभिनेता किसी बड़े होटल में लंच कर रहे होंगे, पर ऐसा कुछ नहीं था। संजय मिश्रा, एक सामान्य कैंटीन में परिवार के कुछ सदस्यों के साथ लंच करते दिखे। भोजन के बीच में ही, हमसे पूछते हैं, आप भी कुछ खाइए। हमने उनके आग्रह पर, उनका धन्यवाद किया, तो संजय बोले, अच्छा चाय तो चलेगी। कुछ ही देर में भोजन करने के बाद, उन्होंने कहा, बताइए, कहां बैठकर बात करें।

कैंटीन से बाहर आकर कहने लगे, चलो उस पेड़ के नीचे बैठते हैं। फिल्मों में जैसे दिखते हैं, उसी तरह बढ़ी हुई दाड़ी, बार बार मूंछों पर हाथ फेरते संजय मिश्रा से अपनी पहली मुलाकात में हम ऐसा महसूस ही नहीं कर रहे थे कि हम बड़े पर्दे पर, जिस शख्स की कॉमेडी देखकर हंसते हैं, गुदगुदाते हैं, यह वही शख्स हैं, जिन्हें उनके प्रशंसक भरपूर प्यार करते हैं। आते- जाते लोगों का अभिवादन मुस्कुराते हुए स्वीकार करते, अपने साथ फोटो क्लिक कराने की चाह रखने वालों को उन्हीं मना नहीं किया। बल्कि, उनसे बात भी, यह भी पूछा, कहां से आए हो, क्या करते हो।

बातचीत से पहले हमने कहा, आपके साथ ऋषिकेश के कुछ पुराने पन्नों को पलटने की कोशिश करेंगे। आपके नजरिये से ऋषिकेश को जानने की कोशिश करते हैं। बातचीत शुरू हुई, तो कहने लगे। ऋषिकेश भारत का गौरव है। गंगा के किनारे जितने भी शहर हैं, सभी मुझे पसंद हैं। गंगा के किनारे संपूर्ण भारत है। ऋषिकेश ऐसे ही मेन्टेन रहे, ऋषिकेश को ऋषिकेश ही रहने दिया जाए। इसको पेरिस न बनाया जाए। मैंने जब मिलने वाले लोगों से पूछा, कहां रहते हो, किसी ने यह नहीं कहा, हम ऋषिकेश में रहते हैं। कोई गुजरात से था, कोई पंजाब से, कोई बंगाल से, तो कोई महाराष्ट्र से… यहां देश के हर राज्य से लोग पहुंचते हैं। विदेशों से भी लोग आते रहते हैं।

कॉमेडी और गंभीर मुद्दों पर बनने वाले फिल्मों में अभिनय, में आपकी पहली पसंद क्या है, तो उनका जवाब था, मुझे गंगा किनारे रहना पसंद है और काम करना पसंद है, इसमें कॉमेडी हो या फिर सीरियस।

आपको अभी तक की अपनी कौन सी फिल्म पसंद है, पर कहते हैं, यह मेरे मौसम पर डिपेंड करता है। कभी मुझे “कामयाब” अच्छी लगती है, गर्व फील होता है। कभी मुझे अपनी फिल्म “आंखों देखी” बहुत अच्छी लगती है। कभी सोचता हूं, मेरी फिल्म “कड़ुवी हवा”, बहुत शानदार है। हालांकि, अभी भी, मुझे अपनी सबसे अच्छी फिल्म का इंतजार है। उसकी शूटिंग बाकी है। मेरी पसंद की, सबसे अच्छी फिल्म आने वाली है, वो आएगी।

उनकी जिंदगी के कुछ खास पन्ने ऋषिकेश से जुड़े हैं, क्या आप उनको पलटना पसंद करेंगे, पर संजय मिश्रा बोले, अच्छा तो आप उसकी बात को याद दिला रहे हैं। यह संयोग ही है, मैं उस बात को ऋषिकेश में ही एक इंटरव्यू में बता रहा हूं। 2009 में पिता का निधन हुआ।पिता का जाना हर बेटे के लिए, लगता है किसी ने कोई छाया हटा दी है, कोई छतरी हटा दी है। आप कुछ सोच नहीं पाते, आगे क्या होगी जिंदगी। मैं जिंदगी की उसी आपाधापी में था।  मैं पिता के साथ ऋषिकेश कई बार आ चुका हूं, भाइयों के साथ यहां आ चुका हूं। पिता की मृत्यु के बाद यहां चला आया।

गंगोत्री जाने वाले रास्ते में, एक बुजुर्ग थे, जिनको शायद उनके बच्चे समझ नहीं पा रहे थे। उन बुजुर्ग को उनके बच्चे,  सुबह होते ही घर से निकाल देते थे। कहते थे, शाम को ही आइए, यहां सोने के लिए। घर से निकलने के बाद, बुजुर्ग लकड़ी जलाकर, कुछ बर्तन लेकर बैठे रहते थे। कोई आ जाता था, मैगी लेकर, उनसे कहता, चाचा मैगी बना दो। बुजुर्ग को मैगी बनाने के लिए एक- दो रुपये थमा दिए जाते थे। मैं भी भटका हुआ था, वो भी भटके हुए थे। मैं उनके यहां काम करने लगा। मैंने उनसे कहा, चाचा हम खुद लाएंगे मैगी, यहीं से मैगी बनाकर बेचेंगे। जिंदगी में एक्टिंग के अलावा भी कुछ नया सूझा था। लेकिन फिर बंबई वालों को खूब कमी खल रही थी मेरी, तो उन्होंने वापस बुला लिया। हां, इमोशनल तो है ऋषिकेश मेरे लिए।

मैं जिंदगी में एक्टिंग करता हूं, जब रील लाइफ की बात आती है, तो मैं जिंदगी जीता हूं। मैं यहीं लोगों से सीखकर जाता हूं और एक्टिंग में कोशिश करता हूं, आम आदमी को रिप्रेजेंट करता हूं। आम हिन्दुस्तानी को रिप्रेंजेंट करता हूं। वध के लिए मुझे बेस्ट फिल्म फेयर अवार्ड मिला। अपने क्रिटिक्स को बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा, जो उन्होंने इस फिल्म को अपना प्यार दिया। यह सोच समझ कर बनाई गई फिल्म है।

You Might Also Like

ईप्रोटेक्ट फाउंडेशनः साइबर अपराध के खिलाफ अभिनव पहल
अब Samarth Portal खुद चलाएंगे विश्वविद्यालय: डॉ. धन सिंह रावत
UKPSC: उत्तराखंड फॉरेस्ट रेंजर्स का रिजल्ट
सब्जियों का अर्थशास्त्र और मिट्टी से जुड़ने का ज्ञान
उत्तराखंड में 38 वें नेशनल गेम्सः खेल विभाग को दो से ढाई हजार वाॅलंटियर्स की आवश्यकता
TAGGED:Comedian Sanjai MishraFilm Actor Sanjai MishraFilm VadhFilm Wo tin DinWhere is Rishikesh
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article विद्यालयों में ही मिलेंगे आय, स्थाई निवास, जाति के प्रमाणपत्र
Next Article पौष्टिक फसलों की किताब स्वाद के साथ स्वास्थ्य का विमोचन
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?