दूषित भोजन खाने से दुनिया में हर दिन बीमार होते हैं 16 लाख लोग

Rajesh Pandey

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार, दूषित भोजन खाने से विश्व भर में हर दिन, लगभग 16 लाख लोग बीमार पड़ते हैं। हर साल चार लाख 20 हज़ार लोगों की मौत होती है।

वर्ष 2023 में, इस दिवस पर भोजन संरक्षा उपायों व मानकों की भूमिका पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि हम जो भी चीज़ें खाएँ, वो सुरक्षित हों।

उन्होंने अपने एक वीडियो सन्देश में कहा, “हम खाद्य संरक्षा के बारे में तभी सोचते हैं, जब हम बीमार पड़ते हैं। और हमें इसके बारे में और अधिक सोचना चाहिए, चूँकि भोजन-जनित बीमारियों की पूरी तरह रोकथाम की जा सकती है।”

यूएन विशेषज्ञ के अनुसार, सुरक्षित भोजन खाने से शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं और मानव विकास को बढ़ावा मिलता है। “भोजन करने से किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए. ये ऐसी मौतें हैं, जिनकी रोकथाम सम्भव है।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नीतिनिर्धारकों समेत विभिन्न सैक्टर से कार्रवाई का आग्रह किया है, जिसके तहत राष्ट्रीय खाद्य संरक्षा प्रणाली स्थापित किए जाने पर बल दिया गया है, जोकि स्थापित मानकों के अनुरूप होगी।

खाद्य व्यवसायों को अपने कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि एक खाद्य संरक्षा संस्कृति को विकसित किया जा सके।

इसके समानान्तर, शैक्षणिक संस्थाओं और कार्यस्थलों पर सुरक्षित भोजन की देखरेख को बढ़ावा देना होगा।

साथ ही, उपभोक्ताओं को भी अपनी भूमिका निभानी होगी और घर पर भोजन की देखरेख के लिए सभी उपायों को अपनाना होगा और यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की अनुशंसाओं का पालन करना होगा। इनमें खाना पकाने से पहले अपने हाथ धोना, और कच्ची खाद्य सामग्री के लिए अलग-अलग बर्तनों व उपकरणों, जैसेकि चाकू, काटने का बोर्ड, का इस्तेमाल करना है।

इस बीच, खाद्य एवं कृषि संगठन ने एक नई वैबसाइट तैयार की है, ताकि खाद्य सैक्टर को अन्तरराष्ट्रीय खाद्य स्वच्छता मानकों का पालन करने में सहायता प्रदान की जा सके। इन उपायों के पुलिन्दे की वैबसाइट ‘टूलबॉक्स’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य व्यापार में निष्पक्ष तौर-तरीक़ों को बढ़ावा देना है।

इस क्रम में, विकासशील देशों के छोटे व्यवासियों और किसानों का विशेष रूप से ख़याल रखा गया है और यह वैबसाइट मोबाइल उपकरणों पर भी देखी जा सकती है।

वैबसाइट पर निजी स्वच्छता बरतने पर जानकारी प्रदान की गई है, और आगन्तुकों के खाद्य उत्पादन स्थल पर जाने के लिए ज़रूरी सतर्कता उपायों के प्रति जागरूक बनाने, सही प्रक्रिया समझने, हाथ धोने की आवृत्ति और उपयुक्त कपड़े पहनने समेत अन्य जानकारी मुहैया कराई गई है। यह तकनीकी सामग्री, यूएन खाद्य संरक्षा अधिकारियों और कैनेडा की गुऐल्फ़ युनिवर्सिटी में भोजन विज्ञान प्रभाग की एक टीम ने मिलकर तैयार की है।-संयुक्त राष्ट्र समाचार 

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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