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कोरोना संक्रमण के समय सेवाएं देने वाले 338 डाक्टर्स पहाड़ के अस्पतालों में होंगे तैनात

दून मेडिकल कॉलेज के 138, हल्द्वानी एवं श्रीनगर के 100-100 छात्रों की एक साल की इंटर्नशिप पूरी हो गई

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर राजकीय मेडिकल कालेजों के वर्ष 2016 बैच के 338 डॉक्टर्स की इंटर्नशिप आज समाप्त हो गई। अब पहाड़ के अस्पतालों में इन डॉक्टर्स की सेवाएं ली जाएंगी। उम्मीद है कि पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। ये डॉक्टर्स कोरोना संक्रमण के दौरान अस्पतालों में इंटर्नशिप कर रहे थे, तब इन्होंने बड़ी संख्या में मरीजों की जान बचाई थी।

दून मेडिकल कॉलेज के 138, हल्द्वानी एवं श्रीनगर के 100-100 छात्रों की अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एक साल की इंटर्नशिप पूरी हो गई। मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के समय इन छात्रों ने बांड भरे थे, जिसके अनुसार एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद ये तीन साल तक पर्वतीय इलाकों के अस्पतालों में सेवाएं देंगे। पहाड़ों के अस्पतालों में तैनाती से चारधाम यात्रा के दौरान इन इंटर्न की सेवाओं का लाभ मिलेगा।

एक मीडिया रिपोर्ट में उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा के अपर निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के हवाले से जानकारी दी गई है कि मेडिकल कॉलेजों में बैच 2016 के प्रशिक्षु डाक्टरों की इंटर्नशिप 30 अप्रैल को पूरी हो गई। स्वास्थ्य महानिदेशक को इनकी सूची भेज दी गई है। वहां से डाक्टर्स को तैनाती स्थल पर भेजा जाएगा।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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