By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: बात पुरानी हैः कोठार भरे रहने पर भी महिलाओं को भरपेट खाना नहीं मिलता था
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Agriculture > बात पुरानी हैः कोठार भरे रहने पर भी महिलाओं को भरपेट खाना नहीं मिलता था
AgricultureBlog LiveFeaturedUttarakhandWomen

बात पुरानी हैः कोठार भरे रहने पर भी महिलाओं को भरपेट खाना नहीं मिलता था

Rajesh Pandey
Last updated: May 15, 2022 12:13 pm
Rajesh Pandey
4 years ago
Share
रुद्रप्रयाग जिला के क्यूड़ी ग्राम सभा के ढिमकला गांव निवासी 80 वर्षीय स्वारी देवी मोबाइल फोन पर बात करते हुए। स्वारी देवी ने हमारे साथ पुराने समय की बहुत सारी बातों को साझा किया। फोटो- राजेश पांडेय
SHARE

राजेश पांडेय। न्यूज लाइव

“पहले के समय में महिलाएं जब भी मिलतीं थीं, तो यही बातें करती कि आज मुझे खाना कम मिला। अगर कुछ और खाने को मिलता तो मैं खा लेती। महिलाओं को कितना खाना दिया जाना है, उस समय उनके परिवार के बड़े बुजुर्ग ही तय करते थे, जबकि उस समय घरों में अनाज की कोई कमी नहीं थी, खेतीबाड़ी में आज की तुलना में ज्यादा फसल मिलती थी। कोठार भरे रहते थे, पर महिलाओं को भरपेट खाना नहीं मिलता था, ” ढिमकला गांव की स्वारी देवी पहले और आज के जमाने में क्या फर्क है, पर बात कर रही थीं।

रुद्रप्रयाग जिला के क्यूड़ी ग्राम सभा के ढिमकला गांव की करीब 80 वर्षीय स्वारी देवी कहती हैं, महिलाओं की स्थिति आज बहुत अच्छी है। अब महिलाएं अपनी इच्छा से खेतीबाड़ी और घर के कामकाज करती हैं। भले ही इन दिनों खेतों से ज्यादा कुछ नहीं मिल पाता, पर पहले की तरह महिलाओं को भूखे पेट नहीं रहना पड़ता। वो अपनी इच्छा से बाजार से खरीदकर कुछ खा सकती हैं, पहले ऐसा नहीं होता था। गढ़वाली बोली में अपनी बात कहते हुए स्वारी देवी, हमें बताती हैं, पहले के लोग अनाज को इसलिए इकट्ठा करते थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा बाजार में बेचा जा सके। पर, अब जमाना बदल गया, इस समय पहले घर के लिए अनाज रखा जाता है, जो बचता है, उसको ही बेचा जाता है।

उनकी पुत्री माया, जो इन दिनों मायके में आई हैं, स्वारी देवी की बात को हिन्दी में रूपान्तरित करके बताती हैं। स्वारी देवी के अनुसार, पहले अधिकतर परिवारों में महिलाएं खेतों में पूरा दिन मेहनत करती थीं और खाना भरपेट नहीं मिलता था। झंगोरा मिला मट्ठा उबाल कर महिलाएं पीती थीं।

बुजुर्ग स्वारी देवी बताती हैं, पहाड़ में खेतीबाड़ी की स्थिति पहले की तरह नहीं है। पहले यहां क्या नहीं उगता था, अब भी बहुत कुछ उग सकता है, पर जीव जंतु (जंगलों से आने वाले जानवर) कुछ नहीं छोड़ते। हमारा राशन (अनाज) तो जीव जंतु खा जाते हैं। हमें तो लगता है, पहाड़ में कठोर परिश्रम करने वाले किसान जंगली जानवरों के लिए फसल उगा रहे हैं। अब बहुत सुविधाएं हैं, पर खेती से गुजारा नहीं होता। किसान खेतों में रातदिन काम करते थे। उन्होंने भी खेतों में बहुत काम किया, अब उम्र बढ़ने के साथ ताकत नहीं है  खेतों में काम करने की। हमने अपने खेतों में चावल, कोदा, झंगोरा, कौणी, तरह तरह की दालें, काकड़ी, संतरा बहुत कुछ उगाया। कोठार भरे रहते थे। हमें बाजार से कुछ नहीं खरीदना पड़ता था। अब किसान को भी बाजार से अनाज, चावल, सब्जियां तक खरीदने पड़ रहे हैं।

रुद्रप्रयाग जिला के क्यूड़ी ग्राम सभा के ढिमकला गांव निवासी राजेश्वरी देवी खेत से गेहूं की फसल लेकर घर जाते हुए। फोटो- अनीशा, ग्राम ढिमकला

उनकी पुत्रवधु राजेश्वरी बताती हैं, खेती को जानवर बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। हमारे घर के आसपास उगने वाली फसल भी नहीं मिल पाती। सुबह चार बजे सोकर उठते थे, शाम पांच बजे खेतों में काम करते हैं। हमने उनसे पूछा, क्या आपको गुस्सा आता है, उनका जवाब था, गुस्सा किस पर करना। कुछ नहीं मिलता तो सुअर, बंदर खा जाते हैं।

  • महिलाओं से मेहनत कराने वाली कहावत, “ऊन कातने वाले लड़के की लाड़ी भाग जाती है…”
  • अंतरराष्ट्रीय महिला दिवसः क्या आप कमला देवी को जानते हैं
  • Video- हम शर्मिंदा हैंः इसलिए एक दिन घस्यारी बनते हैं, बोझ उठाकर कुछ दूर चलते हैं
  • पानी की दौड़ में महिलाओं के पास अपने लिए समय कहां है

स्वारी देवी के अनुसार, जंदरी ( हाथ से अनाज पीसने वाली चक्की) घुमाकर रोज के लिए गेहूं पीसती थीं। उस समय बिजली नहीं थी, मिट्टी तेल के लैंप जलाते थे। दो से तीन किमी. दूर से पानी पीठ पर ढोकर घर लाते थे। पहले लोग पानी कम खर्च करते थे। अब जितना इच्छा हो, पानी खर्च किया जाता है। अब तो पानी घर पर ही पहुंच रहा है। पहले लैट्रिन बाथरूम नहीं होते थे। उस समय बहुत कष्ट था। लकड़ियां जलाकर चूल्हे पर खाना पकाते थे, गैस नहीं थी। चूल्हे का धुआं आंखों में लगता था, तब खाना बनता था।

साभार- रेडियो केदार

You Might Also Like

उत्तराखंड में इंजीनियरों की भर्ती, ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट 21 सितंबर
Delhi-Dehradun Economic Corridor Inauguration: प्रधानमंत्री ने किया दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन
पौंटी गांव तो रवांई का चेरापूंजी है
Adarsh Vidyalaya NIEPVD: आदर्श विद्यालय निपवेड, देहरादून के छात्रों ने राष्ट्रीय कंप्यूटर टाइपिंग प्रतियोगिता में जीते पदक
तक धिनाधिनः मैं कभी बूढ़ा नहीं होऊंगा
TAGGED:An old lady life experienceLife experienceMountain womenRadio KedarUttarakhand
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article UKPSC ने जारी किए पूर्व में कराईं इन परीक्षाओं के प्रश्न पत्र
Next Article वीडियोः सतर्क रहिए, देहरादून में इस तरह घर से उठाया जा रहा कीमती सामान
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?