Why fish don’t drown: “लाइफ जैकेट” के साथ पानी में मजे से तैरती हैं मछलियां

Rajesh Pandey

Why fish don’t drown: क्या आपने कभी सोचा है कि मछलियाँ पानी में कैसे इतनी आसानी से तैरती हैं, बिना डूबे या सतह पर आए? हम इंसान अगर पानी में साँस नहीं ले सकते तो डूब जाते हैं, लेकिन मछलियों के साथ ऐसा क्यों नहीं होता? इसका रहस्य उनके शरीर के एक खास अंग में छिपा है।

द स्विम ब्लैडर: मछली का प्राकृतिक “लाइफ जैकेट”

मछलियों के पानी में न डूबने का मुख्य कारण उनके शरीर में मौजूद एक विशेष अंग है जिसे स्विम ब्लैडर (Swim Bladder) या वायु थैली कहते हैं। यह एक गैस से भरी हुई थैली होती है जो मछली के पेट में, रीढ़ की हड्डी के ठीक नीचे स्थित होती है।

यह स्विम ब्लैडर मछली के लिए एक प्राकृतिक “लाइफ जैकेट” या “गहराई नियंत्रक” की तरह काम करता है।

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स्विम ब्लैडर काम कैसे करता है? (Why fish don’t drown)

स्विम ब्लैडर में मुख्य रूप से ऑक्सीजन और कुछ अन्य गैसें भरी होती हैं। मछली अपनी ज़रूरत के हिसाब से इस ब्लैडर में गैस की मात्रा को घटा या बढ़ा सकती है:

  • जब मछली ऊपर उठना चाहती है: वह अपने स्विम ब्लैडर में और गैस भर लेती है। इससे ब्लैडर फूल जाता है, मछली का आयतन बढ़ जाता है, और वह पानी में अपेक्षाकृत हल्की महसूस होती है (उसका औसत घनत्व कम हो जाता है)। ठीक वैसे ही जैसे एक हवा भरा गुब्बारा ऊपर उठता है।
  • जब मछली नीचे जाना चाहती है: वह स्विम ब्लैडर से गैस बाहर निकाल देती है। इससे ब्लैडर सिकुड़ जाता है, मछली का आयतन कम हो जाता है, और वह पानी में भारी महसूस होती है (उसका औसत घनत्व बढ़ जाता है)।
  • एक ही जगह पर स्थिर रहने के लिए: मछली गैस की मात्रा को इस तरह से संतुलित करती है कि वह पानी में किसी भी गहराई पर बिना ज़्यादा ऊर्जा लगाए स्थिर रह सके। यह उसे शिकार करने, छिपने और ऊर्जा बचाने में मदद करता है।

क्या सभी मछलियों में स्विम ब्लैडर होता है?

यह जानना दिलचस्प है कि सभी मछलियों में स्विम ब्लैडर नहीं होता। उदाहरण के लिए, शार्क जैसी कुछ मछलियाँ (जो हड्डी रहित, उपास्थि वाली मछलियाँ कहलाती हैं) स्विम ब्लैडर के बिना ही तैरती हैं।

शार्क अपनी उत्प्लावकता (buoyancy) को बनाए रखने के लिए अन्य तरीकों पर निर्भर करती हैं:

  • निरंतर तैरना: शार्क को डूबने से बचने के लिए लगातार तैरना पड़ता है, क्योंकि अगर वे रुक गईं तो धीरे-धीरे नीचे डूबने लगेंगी।
  • तैलीय यकृत (Fatty Liver): उनके शरीर में एक बड़ा और तैलीय यकृत होता है जिसमें तेल की अधिक मात्रा होती है। तेल पानी से हल्का होता है, जो उन्हें पानी में तैरने में मदद करता है।

तो अगली बार जब आप किसी मछली को पानी में इठलाते हुए देखें, तो याद रखिएगा कि उसके शरीर में एक अद्भुत वायु थैली मौजूद है। यह अंग उसे न सिर्फ पानी में डूबने से बचाता है, बल्कि उसे जलीय दुनिया में अपनी गहराई को कुशलता से नियंत्रित करने में भी मदद करता है। यह प्रकृति की इंजीनियरिंग का एक शानदार उदाहरण है!

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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