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जांच लीजिएः आप जिस वेबपोर्टल को चला रहे हैं, क्या वो आपके नाम पर है या नहीं

डोमेन और होस्टिंग की खरीदारी करते समय सतर्क नहीं रहे तो दिक्कतें उठानी पड़ती हैं

राजेश पांडेय। न्यूज लाइव

मेरे एक मित्र, जो वरिष्ठ पत्रकार हैं, सुबह से लेकर शाम तक अपने वेबपोर्टल के लिए खबरें संकलित करते हैं। वो स्थानीय से लेकर राज्य स्तरीय खबरों को कवर करते हैं, लिखते हैं और फिर सोशल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाते हैं। लगभग एक साल से मेहनत कर रहे हैं, पर जिस वेबपोर्टल पर वो इतनी मेहनत कर रहे हैं, उसकी होस्टिंग उनके नाम रजिस्टर्ड ही नहीं है। इसका उनको आज तक पता नहीं था, ऐसा इसलिए क्योंकि वो तो वेब डेवलपर की हर बात को सुन रहे थे और मान रहे थे। वेबडेवलपर उनसे शुल्क ले रहे थे और वो भुगतान कर रहे थे। पर, जब उनको यह जानकारी मिली तो चौंक गए और परेशान हो गए।

आप वरिष्ठ पत्रकार हैं, आप लंबे समय से ब्लॉग लिख रहे हैं, आप अपने कार्यक्षेत्र में महारत हासिल किए हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आपके पास डिजीटल तकनीक- वो भी वेबपोर्टल से संबंधित की जानकारी हो। यह भी हो सकता है कि आपको डिजीटल की जानकारी हो। यह जानकारी उन लोगों के लिए है, जो पूरी तरह वेबडेवलपर पर विश्वास करके वेबपोर्टल चला रहे है। आपको खासकर इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

वेबपोर्टल डेवलपर से अपने सामने ही, अपनी ईमेलआईडी, फोन नंबर, अपने एड्रेस पर ही डोमेन और होस्टिंग की खरीद कराइए, जब आप डोमेन और होस्टिंग की खरीद करते हैं तो संबंधित कंपनी वैरीफिकेशन के लिए आपके पास ही ईमेल भेजेगी। इसका फायदा यह होगा कि संबंधित कंपनी, जिससे आपने खरीद की है, वो आपके वेबपोर्टल से संबंधित हर सूचना, अपडेट आपको ईमेल से भेजती है। इससे आपको रिन्युअल की तारीख से लेकर अन्य खरीद, ऑफर आदि के बारे में जानकारियां मिलती रहेंगी।

आप होस्टिंग स्वयं भी खरीद सकते हैं। अपनी आवश्यकता के अनुसार प्लान खरीदिए। यहां बेसिक से लेकर डीलक्स, एडवांस तक प्लान होते हैं। हर प्लान की डिटेल (Hosting Plan) को जानिएगा, जहां समझ में नहीं आता है तो डेवलपर या किसी जानकार से बात कीजिएगा। यदि आप डेवलपर से खरीदारी कराते हैं तो उनसे खरीदारी का पूरा विवरण मांगें। ध्यान रखिएगा, खरीदारी आपके नाम एवं ईमेल एड्रेस पर ही होनी चाहिए।

इससे अपने वेबपोर्टल का कंट्रोल आपके पास रहेगा। इसका मतलब यह है कि आप रिन्युअल स्वयं कर सकेंगे और किसी भी तकनीकी दिक्कत में अपनी पसंद के डेवलपर से सहयोग प्राप्त कर सकेंगे। जरूरी नहीं है कि आप किसी एक डेवलपर पर निर्भर हो जाएं, जिनके पास आपके लिए समय बड़ी मुश्किल से निकलता हो। यह बात ध्यान रखिएगा, जिस वर्डप्रेस डैशबोर्ड के आपके पास क्रेडेंशियल्स यानी यूजर नेम, पासवर्ड हैं, उसका संबंध केवल सामग्री अपलोड करने तक सीमित है। यह किसी वेबपोर्टल का डैशबोर्ड है, इंजन नहीं, जिससे पोर्टल चलता है, जिसमें डाटा बेस होता है।

आप हॉस्टिंग रिन्युअल के समय किसी स्कीम या डिस्काउंट के लिए सीधे संबंधित कंपनी के कस्टमर केयर पर बात कर सकते हैं, जैसे एक की जगह दो साल के रिन्युअल पर डिस्काउंट और विशेष फीचर्स पर बात कर सकते हैं, जबकि आपके पास अपने वेबपोर्टल का कंट्रोल नहीं होने की स्थिति में वेबडेवलपर आपको डिस्काउंट या ऑफर देने की बजाय अपनी इच्छा के रेट मांग सकते हैं, जो आप भुगतान भी करते हैं। कई बार, वो कंपनी के ऑफर्स का लाभ स्वयं उठा रहे होते हैं।

यह हो सकता है नुकसान
आप अपनी वेबसाइट में केवल डोमेन नेम पर अधिकार रखते हैं, न कि होस्टिंग पर। जब आपका होस्टिंग पर अधिकार नहीं है तो आपकी मेहनत से इकट्ठा किया गया डाटा (website data) भी आपके पास नहीं होता।

होस्टिंग के मामले में कंपनी आपसे नहीं, उस व्यक्ति से संपर्क करती है, जिसके पास होस्टिंग के सर्वाधिकार (Rights on website hosting) हैं। यही वजह है कि होस्टिंग की कोई सूचना आपको नहीं मिल पाती।

इस स्थिति में आपको किसी भी तकनीकी दिक्कत पर उसी डेवलपर पर निर्भर (dependency on developer) रहना पड़ेगा, जिसके पास आपकी होस्टिंग और डाटा (Hosting and data) है।

वो चाहे तो आपकी वेबसाइट का सारा डाटा (All website data) किसी भी समय अपने पास रख सकता है या किसी और को उपलब्ध करा सकता है।

आप किसी संस्था या सरकार के पास विज्ञापन के लिए निविदा जमा करना चाहोगे तो होस्टिंग की डिटेल (Hosting’s detail) मांगी जाएगी, जो आपके पास उपलब्ध नहीं होगी।

आपके पास अपनी वेबसाइट के credentials नहीं होंगे।

डेवलपर द्वारा संचालित किसी एक वेबसाइट पर ज्यादा लोड होने का असर आपकी वेबसाइट पर भी पड़ेगा।

कुल मिलाकर कहें कि आपने जो खरीद की है, उस पर आपका अधिकार केवल डैशबोर्ड तक ही सीमित है। इसको इस तरह मान लीजिए, जैसे आपने कोई कार खरीदी, उसका पूरा भुगतान किया, पर कार के कागजात आपके नाम नहीं हैं और न ही आपके पास उसके इंजन की जानकारी। आपको केवल कार में ईंधन भरने और चलानेभर की छूट है। आप उसमें नई एसेसीरिज नहीं लगा सकते, आप अपनी कार में आने वाली किसी भी तकनीकी दिक्कत में केवल उसी व्यक्ति पर निर्भर होंगे, जिसके पास उसके इंजन की चाबी है। या फिर आप अपनी कार किसी को बेच नहीं सकते। यानी कार की एक मास्टर की उनके (वेब़डेवलपर) पास है। यदि उनकी इच्छा हुई तो आपकी कार को अपने ऑफिस से ही लॉक कर सकते हैं।

यह भी जानिए
डोमेन तो आपके नाम से ही खरीदा जाता है, जैसे कि आपके मनमाफिक नाम से। पर होस्टिंग मुख्य रूप से दो तरीकों से खरीदी जाती है। सामान्य शब्दों में Hosting वो डिजीटल स्पेस है, जिस पर आपकी लिखी पोस्ट फोटो, वीडियो यानी डाटा होता है। यह स्पेस कंपनी अपने सर्वर पर उपलब्ध कराती है, जिसका वह आपसे पैसा लेती है। कंपनी के सर्वर, आपके होस्टिंग प्लान और कुछ तकनीकी पहलुओं पर वेबसाइट की स्पीड निर्भर करती है।

आप अगर स्वयं होस्टिंग खरीदते हैं, जो आपके नाम, पते, ईमेल और फोन नंबर पर होती है, उसे Shared Hosting कहते हैं। जबकि वेबडेवलपर Reseller यानी खरीदकर, टुकड़ों में बेचने वाली होस्टिंग बल्क में खरीदते हैं। वो उसको ज्यादा लोगों को बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं। जो वेबडेवलपर, इस तरह होस्टिंग आपको बेचते हैं, उसका मालिकाना हक उनका ही बना रहता है, आपका नहीं। वो तो आपको केवल स्पेस उपलब्ध कराते हैं।

मैंने अपने पूर्व के लेख में भी बताया था, जैसे किसी व्यक्ति ने अपने नाम 10 बीघा जमीन का प्लाट खरीद लिया और भवन बनाने के इच्छुक 30-40 लोगों को प्लाटिंग करके रकम ले ली, पर उनको इन प्लाट पर कोई अधिकार उपलब्ध नहीं कराया, सिवाय भवन बनाने के। यहां आपके डोमेन की स्थिति ठीक उस तरह होगी, जैसे कि दूसरे के नाम दर्ज जमीन पर बनाए गए मकान पर आपकी नेमप्लेट।

इस तरह पता करें वेबपोर्टल की होस्टिंग किसके नाम है
आप गूगल सर्च बार पर https://www.whois.com, https://who.is सहित who is नाम से बहुत सारी वेबसाइट्स हैं, जहां पर सर्च कर सकते हैं कि आपका वेबपोर्टल आपके नाम पर है या नहीं। आप डोमेन, होस्टिंग उपलब्ध कराने वाली कंपनियों की वेबसाइट पर भी यह जानकारी ले सकते हैं। आपके पास अपने वेबपोर्टल के होस्टिंग के सभी अधिकार होने पर आप उसकी प्राइवेसी ऑन कर सकते हैं, यानी आप चाहते हैं तो ही आपके पोर्टल के रजिस्ट्रेशन की डिटेल सार्वजनिक हो सकती हैं। इस डिटेल में आपका नाम, फोन नंबर, ईमेल आईडी, पता, वेबपोर्टल शुरू होने की तारीख, एक्सपायरी की तारीख आदि का विवरण होता है।

आसान है खरीद, स्वयं से करिए
Domain/ hosting की खरीदारी सामान्य होती है। यह ठीक उस तरह होती है, जैसे कि ऑनलाइन खरीदारी (Online purchasing) ।

इसके फॉर्म (Domain registration form) में सही विवरण दर्ज कीजिए। फोन नंबर और ईमेल आई चेक कीजिएगा। उसी फोन नंबर और ईमेल आईडी को अंकित कीजिए, जिनसे आपका प्रतिदिन वास्ता हो, क्योंकि कंपनी आपके पास सभी सूचनाएं इस पर ही भेजेगी।

इस तरह आपके पास अपनी वेबसाइट के सारे अधिकार सुरक्षित होंगे।

क्या कहते हैं डिजीटल एक्सपर्ट…

डिजीटल मार्केटिंग एक्सपर्ट एवं वेब डेवलपर चंद्रकांत पुरोहित (Digital marketing expert & web developer) का कहना है कि आप उन व्यक्ति से वेबसाइट बनवाएं, जिन्हें आप अच्छी तरह जानते हों या आपके विश्वस्त व्यक्ति द्वारा उनका नाम सुझाया गया हो।डेवलपर आपके शहर या आपकी पहुंच में हों। यह न हो कि आप देहरादून या हरिद्वार में हैं, और डेवलपर नोयडा, दिल्ली या बेंगलुरू में बैठा है, जिससे फोन पर अपनी बात रखना भी मुश्किल का काम हो। आप डेवलपर से पूरी जानकारी लीजिए, क्योंकि आप खरीदारी कर रहे हैं और उनसे सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं।

आप किसी भी तरह की तकनीकी जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं- 7668821011 (चंद्रकांत पुरोहित, डिजीटल मार्केटिंग एक्सपर्ट)

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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