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आपके वेब पोर्टल का लिंक कहीं ओर तो नहीं खुल रहा

यह आपका पोर्टल या वेबसाइट वायरस संक्रमण की जद में आने का संकेत है

न्यूज लाइव डेस्क

आप वेब पोर्टल चलाते हैं। यदि आपके पोर्टल की कोई खबर या फोटो उनके लिंक क्लिक करने पर स्क्रीन पर नहीं आते हैं। इनकी जगह कोई और लिंक खुलता है, तो आपको सतर्क होने की आवश्यकता है। यह आपका पोर्टल या वेबसाइट वायरस संक्रमण की जद में आने का संकेत है। खास तौर पर यह वायरस संक्रमण मोबाइल फोन पर अपना असर दिखाता है। पर, आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है, इसका उपाय भी उपलब्ध है। आप अपने वेब डेवलपर से संपर्क करके इस समस्या का समाधान कराएं।

आपको कैसे पता लगेगा कि आपका वेब पोर्टल खतरे में है या नहीं। इसके लिए आप किसी भी सामग्री के लिंक पर क्लिक करके देखें, क्या आपके सामने यही समस्या आ रही है, जैसे कि डायवर्ट होकर कोई और लिंक खुल रहा है।

आपकी साइट को यह वायरस किन्हीं और वेबसाइट्स पर ले जाता है, जिसे हम रीडायरेक्ट होना कहते हैं। 

तकनीकी जानकारियां उपलब्ध कराने वाली एक वेबसाइट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, 17,000 से अधिक साइट्स पहले ही इस हमले का शिकार हो चुकी हैं। यह कारनामा CVE-2023-3169 के तहत रिपोर्ट किया गया है।

यदि आप अपनी वेबसाइट या वेब पोर्टल की इस समस्या का स्वयं समाधान कर सकते हैं तो उक्त टेक वेबसाइट का लेख आपकी मदद कर सकता है। इसमें वायरस संक्रमण को ठीक करने और साइट को फिर से सुरक्षित करने के लिए कुछ उपायों पर फोकस किया गया है।

कोई भी बदलाव करने से पहले, अपनी सामग्री को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। डेटाबेस और फ़ाइलों दोनों सहित अपनी साइट का संपूर्ण बैकअप बनाने के लिए एक विश्वसनीय वर्डप्रेस बैकअप प्लगइन या अपने होस्टिंग प्रदाता के बैकअप टूल का उपयोग कर सकते हैं।

यदि आप स्वयं वेबसाइट का मैंटिनेंस नहीं करते हैं तो वेब डेवलपर से संपर्क करें।

*वेबपोर्टल या वेबसाइट में किसी भी बदलाव और अधिक जानकारी के लिए अपने वेब डेवलपर से संपर्क कीजिए।

किसी भी तरह की तकनीकी जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं- 7900999960 (चंद्रकांत पुरोहित, डिजीटल मार्केटिंग एक्सपर्ट)

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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