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गंगोलीहाट में अगले सत्र से पशु चिकित्सा महाविद्यालय खुलेगाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को गंगोलीहाट, पिथौरागढ़ में  21.57 करोड़ रुपये के छह कार्यों का शिलान्यास और 1.39 करोड़ की लागत के जीआईसी दशाईथल, गंगोलीहाट का लोकार्पण किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न घोषणाएं कीं। उन्होंने ब्लाक बेरीनाग के ग्राम बेलकोट-उपराडा सड़क को शहीद चारुचंद्र और ब्लाक गंगोलीहाट में जरमाल गांव से कनारा सड़क को वीर चक्र विजेता शहीद शेर सिंह के नाम से कराए जाने की घोषणा की। सीएम ने गंगोलीहाट में अगले सत्र से पशु चिकित्सा महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मां हाट कालिका के दर्शन कर उन्हें असीम शक्ति एवं शांति की अनुभूति हुई। मां हाट कालिका से मिले संरक्षण के कारण ही आज हम इतनी लगन और समर्पण के साथ उत्तराखंड की सेवा कर पा रहे हैं।
इसी सिद्ध स्थान पर आदि गुरु शंकराचार्य जी ने मां देवी की स्तुति करने के लिए देवी अपराध क्षमा स्रोत ’’न मत्रं नो यन्त्रं’’ की रचना की थी। जिसमें वर्णित ’’कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति’’ अर्थात पुत्र कुपुत्र हो सकता है, परन्तु माता कुमाता कभी नही हो सकती, जैसी सारगर्भित पंक्ति हमारी संस्कृति का दृष्टि सूत्र है।
यह भूमि जहां वीरों की भूमि रही है, विद्वानों की भूमि रही है, वहीं महान ज्योतिषाचार्यों की भी भूमि रही है। गंगोलीहाट क्षेत्र जहां अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समेटे हैं, वहीं पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, हर विभाग से अगले दस साल का रोड मैप मांगा गया है, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप राज्य के विकास का खाका खींच सकें।

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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