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सर्बियन स्कॉलर डॉ. निकिच ने 70 वर्ष की उम्र में संस्कृत सीखकर डिक्शनरी बनाई

आज दुनियाभर में भारतीय संस्कृति के बारे में जानने को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। अलग-अलग देशों के लोग ना सिर्फ हमारी संस्कृति के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं, बल्कि उसे बढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, सर्बियन स्कॉलर डॉ. मोमिर निकिच (Serbian Scholar Dr. Momir Nikich)। इन्होंने एक Bilingual Sanskrit-Serbian डिक्शनरी तैयार की है।
इस डिक्शनरी में शामिल किए गए संस्कृत के 70 हजार से अधिक शब्दों का सर्बियन भाषा में अनुवाद किया गया है। आपको ये जानकार और भी अच्छा लगेगा कि डॉ. निकिच ने 70 वर्ष की उम्र में संस्कृत भाषा सीखी है। वे बताते हैं कि इसकी प्रेरणा उन्हें महात्मा गांधी के लेखों को पढ़कर मिली।
इसी प्रकार का उदाहरण मंगोलिया के 93 (तिरानवे) साल के प्रोफ़ेसर जे. गेंदेधरम का भी है। पिछले 4 दशकों में उन्होंने भारत के करीब 40 प्राचीन ग्रंथों, महाकाव्यों और रचनाओं का मंगोलियन भाषा में अनुवाद किया है। अपने देश में भी इस तरह के जज्बे के साथ बहुत लोग काम कर रहे हैं।

स्रोत- मन की बात की 84 वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का अंश।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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