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सुशासन हमारा अस्त्र और अन्त्योदय हमारा अंतिम लक्ष्यः धामी

ऋषिकेश। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘‘रैबार एक नये उत्तराखंड का’’ कार्यक्रम को देवभूमि का संदेश बताते हुए इस आयोजन में हुए विचार मंथन को राज्य के विकास की संभावनाओं को दिशा देने वाला बताया।
उन्होंने कहा, हमारा संकल्प है कि जब राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होंगे, तब हम उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बना देंगे। हम विकल्प रहित संकल्प के मंत्र पर कार्य करने वाले लोग हैं, सुशासन हमारा अस्त्र है और अन्त्योदय हमारा अंतिम लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री धामी शनिवार को गंगा रिजोर्ट ऋषिकेश में आयोजित रैबार एक नये उत्तराखंड कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा, जब भी पहाड़ों की ओर देखते हैं तो उन्हें साहस, ईमानदारी, चिरंतन विश्वास एवं दैवीय प्रकाश की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। पहाड़ की ये प्रतिध्वनि एवं गंगा की अविरल धारा हमें विकास की प्रेरणा भी प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन विकास में एकरूपता, निरंतरता तथा परिस्थितियों को अनुकूल बनाने का भी कार्य करते हैं। इससे राज्य के विकास की दशा व दिशा भी तैयार करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास की ये पवित्र गंगा जन कल्याणकारी बनकर आगे बढ़ती रहे, इसके लिये हमें सहभागी बनना होगा। राज्य के विकास में किसी अकेले की नहीं बल्कि हम सबकी सामूहिक यात्रा है।
मुख्यमंत्री ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत को नमन करते हुए समूचे राज्य की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा वीर शहीद जनरल बिपिन रावत जी का उत्तराखंड के लिए जो विजन था, उसे हम अवश्य पूर्ण करेंगे एवं उनके बताए हुए रास्ते पर चलेंगे। साथ ही, उनकी परिकल्पना के अनुसार उत्तराखंड के सतत विकास हेतु कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए जाने वाले सैन्य धाम में हर सम्भव मदद उनके द्वारा की गई थी।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य उन्हीं की देन है। उन्होंने कहा आज का दिन सुशासन दिवस के अवसर पर मनाया जाता है और हम इसी सुशासन की परिकल्पना को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने पेशावर कांड के महानायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व पं. मदन मोहन मालवीय को भी नमन किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हिल मेल – 2021 की 50 चर्चित शख्सियत, “शिखर पर उत्तराखंडी“ का विमोचन किया। उन्होंने सेंसर बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी, एनटीआरओ प्रमुख अनिल धस्माना, शौर्य डोभाल सहित अन्य लोगों को हिल रत्न से सम्मानित किया।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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