Climate-Smart Agriculture Haridwar: हरिद्वार, 12 मई 2026ः ट्रू वैल्यू अकाउंटिंग को धरातल पर उतारते हुए वैज्ञानिकों ने हरिद्वार के किसानों को जलवायु-स्मार्ट ढैंचा बीज वितरित किए। ICAR-IIFSR, मोदीपुरम एवं ICAR–IISWC, देहरादून के वैज्ञानिकों ने यूएनईपी टीईईबी एग्रीफूड परियोजना के अंतर्गत रुड़की, हरिद्वार में ढैंचा बीज वितरण अभियान चलाया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रगतिशील किसान मोर्चा के अध्यक्ष देश राम सैनी ने की। यह अभियान प्रगतिशील किसान मोर्चा एवं रुड़की किसान समूह से जुड़े किसानों के बीच चलाया गया।
Climate-Smart Agriculture Haridwar: इस पहल के तहत पर्यावरण-अनुकूल हरित खाद (ग्रीन मैन्योर) आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए किसानों को ढैंचा बीज वितरित किए गए, जिससे प्राकृतिक रूप से मृदा उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा जलवायु सहिष्णु सतत कृषि (Climate-Resilient Sustainable Agriculture) को प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसान मोर्चा के लगभग 141 पंजीकृत सदस्यों को लगभग 800 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले ढैंचा बीज वितरित किया गया।
Climate-Smart Agriculture Haridwar: वैज्ञानिकों ने बताया कि ढैंचा एक तीव्र वृद्धि करने वाली दलहनी फसल है, जो मृदा में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करने एवं दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य सुधारने में सहायक है।
कार्यक्रम में डॉ. राजेश कौशल (आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून), डॉ. एम.ए. अंसारी (आईसीएआर-आईआईएफएसआर, मोदीपुरम), डॉ. रमनजीत सिंह (आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी), डॉ. अभिमन्यु (आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी) तथा किसान समूह के सचिव अशोक चौधरी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने सतत एवं जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों के महत्व पर बल दिया।
यूएनईपी टीईईबी एग्रीफूड परियोजना, जो कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैव विविधता के अर्थशास्त्र पर केंद्रित है, पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी एवं सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के जमीनी हस्तक्षेपों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।




