कहानी बताएगी, बोलने से पहले समझना क्यों है जरूरी

Rajesh Pandey
understand before speaking

ट्रेन में सफर करने के दौरान कुछ युवाओं की टोली एक दूसरे का मजाक बना रही थी। पास बैठे यात्रियों को लेकर भी वह कुछ न कुछ बातें करते हुए हंस रहे थे। इन युवाओं का हंसी मजाक लगातार जारी था। ट्रेन एक स्टेशन पर आकर रुकी। कुछ यात्री ट्रेन से उतरने लगे और कुछ नये यात्री ट्रेन में बैठने लगे। करीब तीन मिनट के स्टापेज के बाद ट्रेन फिर से अपने सफर पर रवाना हुई। युवाओं वाले कोच में एक व्यक्ति और उनका दस साल का बेटा आकर बैठ गए। पहले तो नये यात्रियों को लेकर इन युवाओं का रवैया कुछ अच्छा नहीं रहा।

सीट पहले से उस व्यक्ति और बेटे के लिए रिजर्व थी, इसलिए वो उनको बैठने से मना नहीं कर पाए। ट्रेन के कुछ आगे बढ़ने पर दस साल का बच्चा कहने लगा, पापा देखो, हमारी ट्रेन आगे बढ़ रही है और पेड़ पीछे की ओर जा रहे है। पापा, देखो बादल हमारे साथ आ रहे हैं। पापा, इतने सारे पेड़ हैं यहां। यह किस रंग के हैं। बच्चे की बातें सुनकर युवा हंसने लगे और उनमें से एक ने उस व्यक्ति से कहा, आपको अपने बेटे को किसी मानसिक रोग चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। क्या यह इतना भी नहीं समझता। इसकी बातें सुनकर कोई भी हंसेगा।

तभी कोच में फल बेचने वाला आया तो संतरों को देखकर बच्चे ने अपने पिता से कहा, पापा यह कौन सा फल है। उसको जवाब मिला, बेटा यह आरेंज है। अच्छा पापा, वो जो खट्टा और मीठा फल होता है। हां, मैंने पहले आरेंज का स्वाद लिया है। उसकी बातों को सुनकर युवाओं ने उसका मजाक बनाना शुरू कर दिया। इस पर बच्चे के पिता का सब्र टूट गया।

उन्होंने इन युवाओं से कहा, जब तक आप किसी की परिस्थिति को अच्छी तरह न समझ लें, तब तक अपनी राय नहीं बनानी चाहिेए।  क्या आप जानते हैं कि मेरा बेटा जन्म से दृष्टिहीन था। इसने तीन दिन पहले ही रंग बिरंगी दुनिया को देखना शुरू किया है। आज हम अस्पताल से अपने घर वापस जा रहे हैं। मेरे बेटे ने ट्रेन में पहले भी सफर किया है, लेकिन सफर के नजारे पहली बार देख रहा है।

उस व्यक्ति की बातें सुनकर इनमें से कुछ युवाओं को अपने व्यवहार पर अफसोस हुआ और उन्होंने माफी मांगते हुए बच्चे से कहा, दोस्त हम आपके बारे में नहीं जानते थे। आपकी परिस्थितियों को समझते तो ऐसी बातें नहीं करते। इसके बाद युवाओं ने उस बच्चे के तमाम सवालों के जवाब दिए, जो वह जानना चाहता था। उन्होंने भविष्य में किसी का भी मजाक नहीं बनाने का संकल्प लिया।

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *