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प्रश्न तैयार करने में गलतियों पर आयोग के पैनल से बाहर किए 25 विषय विशेषज्ञ

देश के श्रेष्ठ संस्थानों से पत्राचार कर प्रतिष्ठित एवं अनुभवी विषय-विशेषज्ञों को ही पैनल में शामिल करने के निर्देश

हरिद्वार। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने मानक के अनुसार कार्य नहीं करने और प्रश्न तैयार करने में गलतियों पर 25 विषय विशेषज्ञों को पैनल से बाहर कर दिया। यह सख्त कार्रवाई आयोग के अध्यक्ष पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. राकेश कुमार के आदेश पर की गई।

आयोग ने इस संबंध में जारी विज्ञप्ति में कहा है,  विभिन्न विश्वविद्यालयों के 25 विषय-विशेषज्ञों को उनके द्वारा मानकों के अनुरूप कार्य न करने जैसे प्रश्नों की संरचना में त्रुटि किया जाना आदि के दृष्टिगत आयोग के परीक्षाओं सम्बन्धी समस्त कार्यों से स्थायी तौर पर पैनल से हटा दिया गया है।

आयोग ने परीक्षा नियंत्रक को निर्देशित किया है कि विभिन्न महत्वपूर्ण परीक्षाओं यथा- सम्मिलित राज्य सिविल / प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा(पीसीएस), सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा(लोवर पीसीएस), सम्मिलित राज्य अभियन्त्रण (एई) सेवा परीक्षा, संयुक्त कनिष्ठ अभियन्ता (जेई) परीक्षा, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजकीय महाविद्यालय आदि की आगामी परीक्षाओं एवं साक्षात्कार के लिए विषय-विशेषज्ञों के उच्च मानदंड को बनाए रखा जाए और इसके लिए देश के श्रेष्ठ संस्थानों से पत्राचार कर उन संस्थानों के प्रतिष्ठित एवं अनुभवी विषय-विशेषज्ञों को ही पैनल में शामिल किया जाए।

इसके लिए शुरुआत करते हुए देश के ख्यातिप्राप्त विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन लिंक उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है, ऑनलाइन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है।

इसी कड़ी में लगभग 100 विषय विशेषज्ञों का अनुमोदन किया गया है तथा लगभग 350 विशेषज्ञों के बायो-डाटा का विश्लेषण गतिमान है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार द्वारा पैनल का विस्तार करते हुए उसमें लगभग 1000 विषय-विशेषज्ञों को शामिल किए जाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए सम्बन्धित को अग्रेतर कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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