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Reading: प्रेरक कहानीः ऐसे ही खूबसूरत नहीं है यह कप प्लेट
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प्रेरक कहानीः ऐसे ही खूबसूरत नहीं है यह कप प्लेट

Rajesh Pandey
Last updated: March 30, 2018 11:54 pm
Rajesh Pandey
8 years ago
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एक दंपति अक्सर खरीदारी में व्यस्त रहते थे। वो खरीदारी के लिए विदेश भी जाते थे। उनको खासतौर पर मिट्टी के कलात्मक बर्तन काफी पसंद थे। उनके पास आकर्षक बर्तनों का बड़ा कलेक्शन था। एक दिन एक बड़ी दुकान में सजे बर्तनों में उनको कप प्लेट काफी पसंद आ गए। महिला ने कहा- वाह, कितने सुंदर कप प्लेट हैं। मैंने आज तक इतना शानदार बर्तन नहीं देखा। उन्होंने सेल्समैन से कहा, क्या मैं इसको देख सकती हैं। सेल्समैन ने उनको कप प्लेट का सेट दिखाया। महिला ने जैसे ही कप को हाथ लगाया, वो बोलने लगा। आपको मैं पसंद आया, इसके लिए बहुत शुक्रिया।

क्या मिट्टी से शानदार दिखने तक की मेरी कहानी को सुनना पसंद करेंगी। कप ने कहा, शुरुआत में मैं लाल रंग की मिट्टी था। मुझे वर्कशाप में लाकर गूंथा गया और बार-बार पीटा गया। मैं काफी चिल्लाया कि मुझे जाने दो। मैं मिट्टी ही सही हूं। तभी एक आवाज मुझे सुनाई दे रही थी, एक व्यक्ति कह रहा था, अभी और गुंजाइश है। इससे और पीटा जाए।

थोड़ी देर में मुझे एक पहिये पर रखकर घुमाया गया। मुझे पहिया पर घुमाया जा रहा था और मैं चिल्ला रहा था कि मुझे जाने दो। मैंने नहीं बनना कोई बर्तन। पहिया रोक दो। मुझे चक्कर आ रहे हैं। मेरा सिर घूम रहा है, लेकिन वो लोग नहीं माने। वो तो मुझे कप प्लेट बनाना चाहते थे। वे लोग कह रहे थे- अभी नहीं, पहिये को और घुमाना होगा।

मुझे कुछ देर धूप में रखने के बाद और तपने के लिए भट्टी में रख दिया गया। क्या बताऊं, बहुत गर्मी लग रही थी। ऐसी गर्मी मैंने कभी महसूस नहीं की। मेरा मन कर रहा था कि भट्टी से बाहर निकलकर भाग जाऊं। मैं भट्टी के दरवाजे तक आकर देख रहा था कि मुझे भट्टी में डालने वाले कह रहे थे कि इसको थोड़ी देर और रखा जाए। बहुत गुस्सा आ रहा था।

बहुत देर बाद भट्टी का दरवाजा खोलकर मुझे बाहर लाकर रखा गया। मैं कुछ ठंडा महसूस कर रहा था। मुझे लगा कि यह कुछ बेहतर स्थिति है। इसके बाद मुझ पर ब्रश चलने लगा। मुझ पर कलर स्प्रे किया जाने लगा। बड़ी दर्दनाक स्थिति थी मेरी। मुझे स्प्रे बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा था। मैं रो रहा था, लेकिन वह व्यक्ति इस तरह सिर हिला रहा था, जैसे कह रहा हो कि अभी मेरी स्थिति से संतुष्ट नहीं है।

थोड़ी देर बाद, मुझे फिर से दूसरी भट्टी में रख दिया गया। दो बार भट्टी में रखने की बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी। मैंने खुद से कहा, इससे भला तो मैं मिट्टी ही था। मुझे ऐसा लगा कि अब बचने की कोई उम्मीद नहीं है। मैं फूट-फूट कर रोना चाहता था। मैं कुछ कर भी तो नहीं सकता था। कुछ देर बाद फिर भट्टी का दरवाजा खुला और मुझे बाहर ठंडे में रख दिया गया। मैं एक बार फिर कुछ राहत महसूस कर रहा था।

इसके बाद जो कुछ हुआ, उसकी मैं उम्मीद नहीं कर सकता था। एक घंटे बाद मुझे एक दर्पण दिखाया गया। मैंने दर्पण देखा और कहा, यह मैं नहीं हूं। जरूर कोई भ्रम हो रहा है। मैं ऐसा नहीं हो सकता। क्या वाकई मैं ऐसा बन गया हूं, मुझे विश्वास नहीं हो रहा है। तभी मुझे आवाज सुनाई दी, देखो- कितना खूबसूरत बना है यह कप प्लेट।

इसके बाद मुझ मिट्टी को कप प्लेट बनाने वाले ने कहा, अगर वह गूंथे और पीटे बिना छोड़ देता तो मैं सूख जाता। तुम्हें पहिये पर चारों ओर घूमने से चक्कर आ रहा था, लेकिन अगर मैंने पहिया रोक दिया होता तो तुम टूट गए होते। तुम्हें भट्टी में रखना अप्रिय था, लेकिन अगर तुम्हें वहां नहीं रखा जाता तो तुम टूट जाते। ब्रश और पेंट करने से तुम्हें कष्ट तो हुआ होगा। अगर ऐसा नहीं किया होता तो तुम कलरफुल नहीं होते। तुम्हारे जीवन में कोई रंग नहीं होता। अगर मैंने तुमको उस दूसरी भट्टी में वापस नहीं रखा होता तो तुम बहुत लंबे समय तक नहीं बच पाते, क्योंकि तुम्हारी कठोरता खत्म हो जाती।अब तुम पूरी तरह से तैयार हो तो मैं तुम्हें सहेज कर रख रहा हूं। तुम मेरे मन में बस गए हो।

कप प्लेट ने महिला से कहा, तुमने मुझे देखते ही पसंद कर लिया। तुम बताओ, क्या मैं बहुत खूबसूरत हूं। महिला का जवाब था, तुम बहुत सारी कठिनाइयों के दौर से गुजरकर इस मुकाम तक पहुंचे हो, तुम्हारी असली खूबसूरती तो यही है। इसलिए तुम सबकी पसंद हो।

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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