बकरे की सलाह

Rajesh Pandey
Short stories

एक व्यक्ति के पास एक गधा और एक बकरा थे। वह गधे पर बहुत सारा सामान लाद कर गांव-गांव घूमता और सामान बेचता। गधा बहुत मेहनती था। उसका मालिक उससे काफी खुश था। कभी-कभी वह गधे को किराये पर देता था, ताकि कुछ कमाई कर सके। वह गधे का बहुत ख्याल रखता और उसको बकरे की तुलना में खाने के लिए अधिक चारा देता।

गधे की खातिरदारी से बकरा खुश नहीं था। वह अपने मालिक और गधे से चिढ़ता था। एक दिन बकरे ने गधे से कहा कि तुम बहुत मेहनत करते हो। इतनी मेहनत करने के बाद भी तुम्हें खाने को सूखा चारा मिलता है। ज्यादा मेहनत करोगे तो बीमार पड़ जाओगे और फिर तुम्हें घर से बाहर निकालकर सड़क पर घूमने के लिए छोड़ दिया जाएगा। गधे की समझ में कुछ नहीं आ रहा था।

गधे ने बकरे से पूछा कि मुझे क्या करना चाहिए। बकरे ने सलाह दी कि तुम बीमार होने का बहाना करो। इससे तुमको कुछ दिन का आराम मिल जाएगा। इसके बाद कुछ दिन ठीक रहना और फिर बीमार होने का बहाना कर लेना। ऐसे में तुम्हें बीच-बीच में आराम मिलता रहेगा। गधे ने बकरे की सलाह मान ली। सुबह मालिक ने गधे को उठाया तो वह नहीं उठा। काफी देर प्रयास के बाद भी जब वह लेटा रहा तो उसके मालिक ने कहा, शायद तुम बीमार हो गए हो। गधे ने मालिक की बात सुनी तो मन ही मन खुश हुआ। उसने समझा कि अब मालिक ने मान लिया है कि मैं बीमार हूं, इसलिए कुछ दिन आराम मिल ही जाएगा। कुछ ही देर में मालिक घर से बाहर गया और डाक्टर को बुला लाया।

डाक्टर ने गधे का चेकअप करने के बाद मालिक से कहा, तुम्हारा गधा गंभीर रोग की चपेट में आ गया है, लेकिन चिंता करने की कोई बात नहीं है। आप बकरे के गुर्दे का सूप बनाकर पिलाओ, यह ठीक हो जाएगा। गधे के बिना मालिक का काम नहीं चल रहा था। इसलिए उसने कोई देरी किए बिना बकरे को मारकर उसके गुर्दे का सूप बना डाला। गधे को बकरे के गुर्दे का सूप पिलाया गया। गधे ने समझ लिया कि अब उसका बहाना नहीं चलने वाला। वह ठीक होकर अपने मालिक के साथ गांव-गांव जाकर सामान बेचने लगा। तभी तो कहते हैं कि किसी से ईर्ष्या करके गलत सलाह नहीं देनी चाहिए। अगर किसी को गलत सलाह दी तो मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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