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राज्य में कोरोना को नियंत्रित रखने में सहयोग के लिए प्रदेशवासियों का धन्यवादः मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में कोरोना को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण सहयोग देने के लिए प्रदेशवासियों को धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कोरोना वारियर्स पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। प्रदेशवासियों ने भी दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन का परिचय देते हुए सरकार का सहयोग किया है। उसी का परिणाम है कि हम राज्य में कोरोना संक्रमण बढने की दर को काफी कम रखने में सफल रहे हैं। आमजन का इसी प्रकार साथ मिलता रहा तो कोरोना के खिलाफ लम्बी लड़ाई में अवश्य जीतेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में पहला मरीज 15 मार्च को मिला था और इसके बाद ही राज्य सरकार ने अपने स्कूल-कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू की बात कही और लॉकडाउन पूरे देश में लागू किया तब से आज तक एक महीना एक दिन हो गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि मैं सर्वप्रथम प्रदेशवासियों का धन्यवाद देना चाहूंगा, जिस संयम अनुशासन से उन्होंने सहयोग दिया, उसी का परिणाम रहा कि उत्तराखंड आज कोरोना की रोकथाम में देश में तीसरे नंबर पर है। अभी तक 47 पॉजिटिव केस राज्य में आए हैं, जिनमें से 24 ठीक हो गए हैं।  इस गति को रोक पाने में हम तभी सफल हो पाए हैं जब आप सभी ने सहयोग दिया है।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों व प्रशासनिक तंत्र ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाई है, पुलिस, सामाजिक संगठनों एवं आमजनों की भूमिका रही है, उसी का परिणाम है कि आज हम बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि बहुत जल्द हम कोरोना मुक्त राज्य में शामिल हो जाएंगे, आप लोगों का सहयोग मिलता रहे। तीन मई तक प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की घोषणा की है, उसमें हम इसी तरह से पूरे संयम के साथ आगे भी सहयोग देते रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के अंतर्गत आमजन को हरसंभव सहायता पहुंचाने की कोशिश की गई है। जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कोई कमी नहीं आने दी गई है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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