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हर महीने के लिए पहले और तीसरे मंगलवार तहसील दिवस

देहरादून। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने तहसील स्तर पर हर माह के पहले और तीसरे मंगलवार को ‘तहसील दिवस‘ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने निर्देश दिए कि तहसील दिवस के दौरान, उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, खंड विकास अधिकारी सहित अन्य विभागों के तहसील स्तरीय सक्षम अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। तहसील दिवस पर कोविड प्रोटोकाल का अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने आयुक्त गढ़वाल एवं कुमाऊं, समस्त जिलाधिकारियों एवं तहसील एवं विकास खंड अधिकारियों को जारी आदेश में जन समस्याओं के समाधान की व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी मंडल, तहसील, ब्लाक स्तरीय कार्यालयों के कार्यालयाध्यक्षों को प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक जनसम्पर्क एवं जनसमस्याओं के समाधान के लिए अपने कार्यालयों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने पूर्वाह्न 10 से 12 बजे कोई अन्य बैठक नियत न किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि अपरिहार्य कारणों से व्यक्तिगत उपलब्धता संभव नहीं होने की दशा में अन्य सक्षम प्राधिकारी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देशों को तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के साथ ही मंडलायुक्त एवं जिलाधिकारी द्वारा भेजी जाने वाली मासिक आख्या के साथ ही निर्देशित बिन्दुओं पर कार्यवाही एवं परिणाम भेजने के निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने कहा कि समस्याओं के निराकरण में यदि समय लगना सम्भावित हो, तो संबंधित विभाग अथवा प्राधिकारी औचित्यपूर्ण न्यूनतम तिथि निर्दिष्ट करते हुए ऐसे विषय को निर्दिष्ट तिथि के उपरान्त पड़ने वाले तहसील दिवस में पुनर्विचार एवं समीक्षा के लिए प्रस्तुत करे।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारी भी रेंडम आधार पर तहसील दिवसों पर प्रतिभाग करते हुए कार्यकलापों को पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण करें। स्थानीय स्तर पर नीतिगत बिन्दुओं में मार्गदर्शन अपेक्षित होने पर सम्बन्धित अधिकारी को शीघ्र अतिशीघ्र प्रेषित किया जाए।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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