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सिमलास ग्रांट में फसल बर्बाद कर रहे हाथी, किसानों का सीएम को ज्ञापन

डोईवाला। सिमलास ग्रांट में हाथियों और अन्य जंगली जानवरों ने गन्ने व धान की फसल बर्बाद कर दी। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर नुकसान का सही मुआवजा दिलाने तथा जंगली जीवों से फसलों की सुरक्षा के इंतजाम कराने की मांग की है। 

सिमलास ग्रांट के पूर्व प्रधान उमेद बोरा का कहना है कि जंगली जानवर गन्ने, धान व अन्य फसल को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकार ने सुरक्षा दीवार तो बनाई गई है, लेकिन अभी तक सौर ऊर्जा तार नहीं लगाई गई।

बोरा के अनुसार, वन अधिकारियों के सौर ऊर्जा तार के प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है, वो अपने सभी काम छोड़कर दिनरात खेतों की रखवाली कर रहे हैं। कुछ दिन पहले, गांव में गुलदार को भी देखा गया है ,लेकिन सूचना के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने जंगल के आसपास वन विभाग की गश्त बढ़ाने,  खाई खोदने और अधूरी दीवार को बनाने की मांग की।

राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के प्रदेश संयोजक मोहित उनियाल ने कहा कि फसल को हुए नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए। जल्द से जल्द फेंसिंग लगाई जाए। किसानों को राहत नहीं मिलने की स्थिति में आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में उमेद बोरा,मोहित उनियाल,खड़क सिंह कनियाल,जागीर सिंह,राजेन्द्र सिंह,अजय सिंह ,मनोहर सैनी, महेश लोधी, जोगिंदर सिंह, श्याम सिंह, सुरेश पाल आदि शामिल हैं।   

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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