By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: जब भीम नहीं खा पाए तो पहाड़ बनकर मंदाकिनी में खड़ा है सत्तू ढिंडा
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Blog Live > जब भीम नहीं खा पाए तो पहाड़ बनकर मंदाकिनी में खड़ा है सत्तू ढिंडा
Blog LiveDHARMAFeaturedUttarakhand

जब भीम नहीं खा पाए तो पहाड़ बनकर मंदाकिनी में खड़ा है सत्तू ढिंडा

Rajesh Pandey
Last updated: July 21, 2022 8:52 am
Rajesh Pandey
4 years ago
Share
रुद्रप्रयाग जिले के सौड़ी गांव में मंदाकिनी नदी में खड़ा सत्तू ढिंडा। फोटो- राजेश पांडेय
SHARE

राजेश पांडेय। न्यूज लाइव

रुद्रप्रयाग जिले में श्रीकेदारनाथ हाईवे पर मंदाकिनी नदी में खड़ी चट्टान को देखकर जितना अचरज होता है, उतनी ही रोचक है इसकी कथाएं और मान्यताएं। इसकी कथा पांडवों से जुड़ी बताई जाती है। लोककथा के अनुसार, यह भीम का सत्तू है, जिसे वो खाए बिना ही श्रीकेदारनाथ की ओर आगे बढ़ गए थे। भीम सत्तू को क्यों नहीं खा पाए थे और सत्तू विशाल चट्टान जैसा कैसे बन गया, इस बारे में हमने पास के ही गांव गिंवाला में रहने वाले बुजुर्गों से बात की, जो बचपन से इसके बारे में एक कथा सुनते आए हैं।

रुद्रप्रयाग जिले के गिंवाला गांव के बुजुर्ग। फोटो- राजेश पांडेय

इसको स्थानीय बोली में सत्तू ढिंडा कहा जाता है। ढिंडा का मतलब गोला होता है, जैसे कि रोटी बेलने से पहले गूंथे हुए आटे का गोला या ढिंडा बनाया जाता है। सत्तू का ढिंडा रुद्रप्रयाग शहर से करीब 25 किमी. दूरी पर है और जब आप श्री केदारनाथ जाते हैं, तो यह सौड़ी गांव में मंदाकिनी नदी में दिखाई देता है।

राजकीय इंटर कालेज से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त 77 वर्षीय शिवराज सिंह भंडारी बताते हैं, मेरे पिताजी इसे सत्तू ढिंडा कहते थे। इसके बारे में एक लोककथा प्रचलित है, जिसके अनुसार, महाभारत युद्ध में कौरवों के वध से पांडवों पर वंश हत्या का दोष लग गया था, वो दोष तभी दूर हो सकता था, जब पांडव भगवान शिव के दर्शन करते। भगवान शिव को ढूंढते हुए पांडव श्रीकेदारनाथ की ओर जा रहे थे।

पांडवों ने भीम के लिए सत्तू का ढिंडा बनाकर रखा था, जिसके बारे कहा जाता है कि इसको सिर्फ रात में खाया जा सकता था। सुबह होने तक यह पत्थर में बदल जाएगा। भीम उनसे काफी पीछे चल रहे थे। भीम जब तक सत्तू के ढिंडा तक पहुंचे, उस समय तक रात खुल गई थी। भीम ने समझ लिया कि यह मुझे खाने को नहीं मिल पाएगा तो उन्होंने इसको मुट्ठी से प्रहार करके दो हिस्सों में बांट दिया और आगे बढ़ गए। इस गोलाकार चट्टान को दो भागों में बंटा देखा जा सकता है।

रुद्रप्रयाग जिले के गिंवाला गांव निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शिवराज सिंह भंडारी। फोटो- राजेश पांडेय

2013 की बाढ़ में लग रहा था कि यह विशाल पत्थर भी बह जाएगा, क्योंकि बड़े पत्थर भी उस बाढ़ में इधर उधर हो गए थे। मंदाकिनी नदी में बाढ़ के समय इसका थोड़ा सा हिस्सा दिखाई दे रहा था, पर यह टस से मस नहीं हुआ।

“आजकल, यह ऐसा दिखाई दे रहा है कि इसके नीचे शायद कोई बड़ा पत्थर है और यह उस पर यह टिका है। हमें यह शिवलिंग जैसा भी लग रहा है। हो सकता है कि इसके आधार में जलहरी हो। बाढ़ में यह टस से मस नहीं हुआ, जबकि आसपास के बड़े पत्थर बह गए, इसलिए कहा जा सकता है कि कोई बड़ा पत्थर इसके आधार में स्थित है।

यह भी हो सकता हो कि यह कभी पहाड़ रहा हो, यहां नदी है। नदी के वेग से कटकर यह गोलाकार हो गया। इससे इसमें कई बड़े छेद भी हो गए हैं,” शिवराज सिंह भंडारी बताते हैं।

उन्होंने बताया, यहां भटवाड़ी के पंडित जी ने यज्ञ किया था और एक ध्वज भी फहराया था। उस समय यहां एक सांप भी दिखा था, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट गए थे। अंत में वो सांप शायद बाहर आया था या मर गया था।

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य भंडारी बताते हैं, इसको अंतिम सत्य भी कहा जाता है। कई गांवों के मृतकों का अंतिम संस्कार यहीं होता है। यह भी हो सकता है, सत्य शब्द से यह सत्तू ढिंडा का नाम से प्रसिद्ध हो गया हो।

भंडारी बताते हैं, जब भी यहां देवी मां की डोली आती है। देवी का रूप बहुत अलग हो जाता है। कहा जाता है कि यहां देवी का दैत्य से युद्ध होता है। युद्ध के बाद ही देवी यहां स्नान करती हैं।

इस पर बड़े पौधे उग गए हैं, लोग इन पौधों की टहनियों को पकड़कर इसके ऊपर चढ़ जाते हैं।

You Might Also Like

किनगोड यानि औषधियों का भंडार
82 साल के ‘युवा’ से सुनिए सवा सौ साल पुराने गांव की कहानी
सीएम ने जिलों से बारिश के हालातों की हर घंटे की रिपोर्ट मांगी
38वें राष्ट्रीय खेलः उत्तराखंड की पुरुष और महिला बैडमिंटन टीमों ने जीता सिल्वर मेडल
सीएम पहुँचे चमोली के आपदाग्रस्त डुंग्री गांव
TAGGED:Folk tales exampleGinwala Village of UttarakhandIndian Folk TalesPandavasShri KedarnathUttarakhandWhat are the popular folk tales?
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article ऊंचे पहाड़ से छलांग लगाकर खेतों में मां और बंधुओं के साथ विराजमान हैं दाना देवता
Next Article इस छोटे से कस्बे में बड़े संकल्प को निभा रहे विनोद नेगी
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?