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तो यह है रानीपोखरी ग्राम पंचायत के विकास की कहानी

रानीपोखरी ग्रांट का नाम स्वच्छ, सुंदर एवं व्यवस्थित ग्राम पंचायतों में शामिल होता है

न्यूज लाइव ब्लॉग

2011 की जनगणना के मुताबिक, रानीपोखरी ग्रांट ग्राम पंचायत की आबादी 2700 थी, अब यहां लगभग 9000 लोग बसते हैं। ग्राम पंचायत में सालभर का राजस्व 23 लाख रुपये है। कम बजट में सामुदायिक हितों के लिए संसाधन कहां से लाएं, यह चुनौती हमेशा बनी रहती है, पर इन सब दिक्कतों के बावजूद रानीपोखरी ग्रांट का नाम स्वच्छ, सुंदर एवं व्यवस्थित ग्राम पंचायतों में शामिल होता है। जम्मू कश्मीर के पंचायती राज विभाग ने रानीपोखरी को बेहतर ग्राम पंचायत मानते हुए अपने वीडियो में इसका जिक्र किया है।

हाल ही में, देहरादून जिले में 12 ग्राम पंचायतों को स्वच्छता पुरस्कार प्रदान किया गया, इनमें रानीपोखरी और इससे सटी हुई बड़कोट ग्राम पंचायत भी शामिल है। हमने ग्राम प्रधान सुधीर रतूड़ी, जिन्होंने नवंबर, 2019 में कार्यभार संभाला था, से बात की और रानीपोखरी ग्राम पंचायत में नगर पालिका जैसी सुविधाओं की कहानी को जानने की कोशिश की।

ग्राम प्रधान सुधीर रतूड़ी बताते हैं, पूरे 365 दिन यानी साल में कोई दिन ऐसा नहीं है, जब पंचायतभवन बंद रहता हो। वो प्रतिदिन सुबह आठ बजे पंचायतभवन पहुंच जाते हैं। शाम सात बजे तक अक्सर यहां रहते हैं। यहीं से पंचायत के सभी कार्यों को संपन्न कराते हैं और बैठकों में जाते हैं। लोगों को अपने प्रधान को ढूंढने की आवश्यकता नहीं होती। उनको पता है, प्रधान पंचायतघर में मिलेंगे। कभी बाहर भी जाना पड़ता है तो ग्राम पंचायत के निवासियों को यह सूचना होती है।

ग्राम पंचायत के लिए सभी तरह के आवश्यक कार्यों, जरूरी दस्तावेजों के लिए आवेदन करने की सुविधा पंचायत भवन स्थित सीएससी (Common Service center) के माध्यम से उपलब्ध है। जनता के 19 विभागों के ऑनलाइन कार्य इस सेंटर से हो रहे हैं। सरकार की योजनाओं की जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर विभिन्न ग्रुपों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। बैनर लगाकर लोगों को योजनाओं के बारे में बताते हैं। पंचायत भवन में प्रवेश करते ही आपको बैनर पर सूचनाएं मिल जाती हैं। सिटीजन चार्टर पर काम कर रहे हैं। शुल्क जमा करने की प्रक्रिया ऑनलाइन है। हर प्रक्रिया पारदर्शी है। ग्राम पंचायत के एप पर काम किया जा रहा है, ताकि लोग डिजीटल रूप से घर बैठे ग्राम पंचायत से जुड़ सकें।

ग्राम प्रधान सुधीर रतूड़ी बताते हैं, दो साल तक उन्होंने स्वयं और जनता के सहयोग राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में मैथ और कंप्यूटर के शिक्षकों की तैनाती की, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। इस कार्य के लिए लोग स्वयं सामने आए थे। सीएसआर के तहत दो साल तक गांव में स्वच्छता के लिए गाड़ियों की व्यवस्था की गई, जो घर-घऱ जाकर कूड़ा इकट्ठा करती है। इससे स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग मिलता है।

पिछले साल अप्रैल में प्राइमरी स्कूल में बच्चों धूप में बैठकर लंच करते देखा। मुझे यह देखकर बहुत ग्लानि हुई। मैंने अपने ऋषिकेश के एक दोस्त से टीन शेड लगवाने में सहयोग के लिए कहा। उसी दिन टीन शेड लगवाने की तैयारी शुरु हो गई। स्कूल की एक दिन की छुट्टी थी, दूसरे दिन जब स्कूल खुला तो वहां टीन शेड लगा हुआ था।ऋषिकेश में मेरे दोस्त, रानीपोखरी ग्राम पंचायत के जागरूक लोग स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर संसाधनों के लिए सहयोग प्रदान करते हैं।

ग्राम प्रधान सुधीर रतूड़ी चारधाम रोटेशन व्यवस्था समिति में कई वर्षों से बतौर इंचार्ज सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। आप चारधाम यात्रा परिवहन उद्योग से जुड़े हैं।

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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