देहरादून, 29 जुलाई, 2026ः अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) पर राजाजी टाइगर रिजर्व की रामगढ़ रेंज ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को बाघों के संरक्षण के लिए जागरूक किया। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय पार्षद सोबत चंद्र रमोला ने विद्यालय परिसर में आंवले का पौधा लगाया।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामगढ़ के प्रधानाध्यापक अरविन्द सिंह सोलंकी ने कहा, अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर बाघ और वनों को बचाने के लिए समाज में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से राजाजी टाइगर रिजर्व की रामगढ़ रेंज ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया है। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बाघों के संरक्षण से सम्बन्धित ड्राइंग बनाईं और निबन्ध लिखे। वनों के बचाव से संबंधित नाटक का मंचन किया गया। छात्र-छात्राओं को स्मार्ट टीवी के माध्यम से बाघों तथा वनों के संरक्षण से संबंधित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।
कार्यक्रम में बाघों के संरक्षण और वनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वन आरक्षी
सुभाष रावत ने कहा कि अंतर्राष्ट्री्य बाघ दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक टाइगर समिट से की गई। समिट में बाघों की दिन-प्रतिदिन घटती संख्या, उनके अवैध शिकार तथा वनों के अंधाधुंध कटान पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि आज हमारे देश में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जो पूरी तरह से बाघों और वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहे हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व की रामगढ़ रेंज की वन क्षेत्राधिकारी उर्वशी गौतम ने कहा कि बाघ हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बाघ का सांस्कृतिक महत्व तो है ही, साथ ही यह पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शीर्ष शिकारी और ‘अंब्रेला प्रजाति’ (संरक्षण छत्र) होने के नाते, यह स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में सहायक होता है। बाघों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण वनों, नदियों और अनगिनत अन्य प्रजातियों की रक्षा करता है।
हमारे देश में बाघों को बचाने के लिये वर्ष 1973 से प्रोजेक्ट टाइगर जैसी महत्वपूर्ण योजना चलाई जा रही है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जैव विविधता के लिए बाघों का होना कितना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सभी के समन्वित प्रयासों से वर्ष 2006 में 1411 बाघों की तुलना में आज देशभर में बाघों की संख्या 3682 हो गई है। बाघों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश और कर्नाटक के बाद हमारा राज्य उत्तराखंड तीसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के 75 प्रतिशत भाग हमारे देश में ही हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क्षेत्रीय पार्षद सोबत चंद्र रमोला ने कहा कि इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जो वनों, वन्य जीवों तथा सारी प्रकृति की अच्छी तरह से देखरेख कर सकता है, इसलिए हम सभी को अपने दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित अभिभावकों से अपने आसपास के वनों तथा पर्यावरण की रक्षा करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद सोबत चंद्र रमोला, समाजसेवी जगदीश भट्ट, अक्षत सकलानी, वन क्षेत्राधिकारी उर्वशी गौतम, बीट प्रभारी चंद्र किशोर बडोनी, वन आरक्षी सुभाष रावत, विकास थापा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामगढ़ के प्रधानाध्यापक अरविन्द सिंह सोलंकी, सहायक अध्यापक मीना घिल्डियाल, मधुलिका, भोजन माता विमला देवी, वीरेंद्र सिंह, अंजना देवी, मीनाक्षी, मीना देवी, अनु देवी, सरस्वती, फराना, शबनूर समेत अनेक अभिभावक तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



