
AEBAS Implementation in Pharmacy: कार्यशाला में उत्तराखंड राज्य के लगभग 103 कॉलेज के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य अतिथि जस्सुभाई हीराभाई चौधरी, उपाध्यक्ष, भारतीय भेषजी परिषद (Pharmacy Council of India) नई दिल्ली ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा, AEBAS केवल एक उपस्थिति दर्ज करने वाली प्रणाली नहीं है, बल्कि यह ई गवर्नेंस और गुड गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें तकनीक का उपयोग करते हुए अपने प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना होगा।

उन्होंने बताया कि पूर्व में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली का रोल केवल निरीक्षण करना एवं मान्यता देना था। वर्तमान में उन्होंने काउंसिल में कुछ परिवर्तन किए। स्किल डेवलपमेंट इन क्वालिटी कंट्रोल तथा स्किल डेवलपमेंट इन ए.आई. जैसे प्रोग्राम शुरू कर रहे हैं। इसी काम को आगे जारी रखने के लिए उन्होंने प्रत्येक राज्य के स्टेट काउंसिल को एक करोड़ की राशि देने की बात कही।
AEBAS Implementation in Pharmacy: उन्होंने कहा, जैसा कि आज के दौर में एआई बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, उस क्रम में काउंसिल ने अपने कार्यालय में एक फ्लोर केवल एआई की ट्रेनिंग के लिए तैयार किया है, जिसमें शिक्षक एआई के बारे में ट्रेनिंग ले सकते हैं। पहले इंस्टीट्यूट्स को सीधे फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से सम्पर्क करना मुश्किल होता था, इसीलिए काउंसिल ने इसका समाधान कर कुल चार जोन बनाए, जिनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ तथा तीन कोऑर्डिनेटर भी बनाए गए हैं। जिनमें, डॉ. रेनु , डॉ. शिवानंद पाटिल, डॉ. विभु साहनी शामिल हैं।
सेंट्रल काउंसिल मेंबर फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली तथा विभागाध्यक्ष एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ डॉ. विभु साहनी ने कहा कि AEBAS को जल्द से जल्द अपने संस्थान में लागू करें। इन सबकी शुरुआत करके हमको फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा निर्देश का पालन करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि AEBAS को लागू करने का मुख्य कारण यह है कि फार्मेसी में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी संस्थान फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के परीक्षण प्रोग्राम में प्रतिभाग करें, ताकि इंस्टीट्यूट के स्तर को बढ़ाया जा सके। इसके अतिरिक्त उन्होंने बताया कि AEBAS को लागू करने से एजुकेशन का स्तर बढ़ जाएगा।
AEBAS Implementation in Pharmacy: कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने AEBAS के लाभ तथा इससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। AEBAS का मुख्य लाभ पारदर्शिता और सटीकता है, जो उपस्थिति रिकॉर्ड में मानवीय त्रुटियों और हेराफेरी की गुंजाइश को समाप्त करता है। यह बायोमेट्रिक सत्यापन के कारण फर्जी उपस्थिति पर पूर्ण रोक लगाता है।
इस दौरान AEBAS की ऑनलाइन ट्रेनिंग सीधे हेड ऑफिस, नई दिल्ली से की गई तथा कार्यशाला में उपस्थित सभी सदस्यों की आशंकाओं को भी दूर किया गया। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने उत्तराखंड राज्य के सभी संस्थानों को AEBAS System को 100 प्रतिशत लागू करने के भी निर्देश दिए। AEBAS उच्च अधिकारियों को रियल-टाइम निगरानी और बेहतर संसाधन प्रबंधन में सहायता करता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्वीकार किया कि नेटवर्क और कनेक्टिविटी, कुछ मामलों में बायोमेट्रिक विफलता, उपकरणों का रखरखाव और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता जैसी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं, जिन्हें प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों से दूर किया जा सकता है।

यह स्पष्ट किया गया कि AEBAS के पूर्ण कार्यान्वयन से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, जैसे कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच जवाबदेही (Accountability) की भावना में वृद्धि, कार्यालयों में अनुशासित कार्य संस्कृति और समय की पाबंदी को बढ़ावा, तथा प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इस दौरान, कार्यशाला में AEBAS सॉफ्टवेयर इंटरफेस का डेमो, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल और बायोमेट्रिक डिवाइस के ट्रबलशूटिंग पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि AEBAS डेटा पूरी तरह से सुरक्षित है और आधार पारिस्थितिकी तंत्र के सख्त सुरक्षा और गोपनीयता मानकों का पालन करता है।

कार्यशाला के अंत में मुख्य अतिथियों ने सभी संस्थानों से आए प्रतिनिधियों तथा संस्थान के फार्मेसी पाठयक्रम के शिक्षकों को सर्टिफिकेट प्रदान करके सम्मानित किया। संस्थान के अध्यक्ष श्रीनिवास नौटियाल तथा निदेशक डॉ. शिवानन्द पाटिल ने कार्यशाला में उपस्थित मुख्य अतिथि एवं सभी प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया।












