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NEWSLIVE24x7 > Blog > Analysis > भमोरा (Cornus Capitata) एक पहाड़ी फल- मिलेगा बरसात में .
Analysisfood

भमोरा (Cornus Capitata) एक पहाड़ी फल- मिलेगा बरसात में .

Rajesh Pandey
Last updated: April 18, 2021 12:35 pm
Rajesh Pandey
9 years ago
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  • डॉ. राजेंद्र डोभाल, महानिदेशक -UCOST उत्तराखंड

उत्तराखण्ड हिमालय तथा संपूर्ण हिमालय क्षेत्र अपनी नैसर्गिक जैव विविधता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। इस हिमालय क्षेत्र में असंख्य औषधीय तथा आर्थिक क्षमता वाले असंख्य पौधे पाये जाते है। हिमालय क्षेत्रों में पाये जाने वाले 8000 पुष्पीय पौधों की प्रजातियों में से लगभग 4000 प्रजातियां केवल गढवाल हिमालय क्षेत्रों में आंकी गयी है जिनमें से एक महत्वपूर्ण पौधा भमोरा है जिसका वैज्ञानिक नाम Cornus Capitata है।

यह Cornaceae कुल से संबंध रखता है। वैसे तो भमोरे का फल विरल ही खाने को मिलता है परंतु चारावाहो द्वारा आज भी जंगलों में इसके फल को खाया जाता है। यह हिमालयी क्षेत्रों में पाये जाने वाला अत्यन्त महत्वपूर्ण पौधा है। इसी वजह से इसे हिमालयन स्ट्राबेरी का नाम दिया गया है। वैसे तो भमोरा संपूर्ण हिमालय क्षेत्रों यथा-भारत, चीन, नेपाल, आस्ट्रेलिया आदि में पाया जाता है परंतु इसका उद्भव भारत के उत्तरी हिमालय तथा चीन में ही माना जाता है। सामान्यतः यह 1000 से 3000 मी0 ऊॅचाई तक पाया जाता है। हिमालय क्षेत्रों में भमोरा सितम्बर से नवम्बर के मध्य पकता है तथा पकने के बाद इसका फल स्ट्रॉबेरी की तरह लाल हो जाता है जो पौष्टिक तथा औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी होता है।

भमोरा का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलू यह है कि इसकी छाल तथा पत्तियॉ टेनिन निष्कर्षण के लिए प्रयुक्त होती है जिसका फार्मास्यूटिकल उद्योग में औषधीय निर्माण हेतु अत्यधिक महत्व होता है। कारनस जीनस ही अपने आप में पॉली फिनॉलिक तत्वों जैसे टेनिन की मौजूदगी के लिए प्रसिद्ध है जिसमें मुख्यतः Hydrolyzable टेनिन पाया जाता है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में भमोरा की जडों से पॉली फिनॉल का निष्कर्षण किया गया है। सिद्ध एवं ठाकुर वर्ष 2015 ’अन्तर्राष्ट्रीय जनरल ऑफ फार्मटेक रिसर्च’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार भमोरा में मधुनाशी गुण भी पाये जाते है। इसके फल में एक महत्वपूर्ण अव्यव एन्थोसाइनिन

भी पाया जाता है। जो अन्य फलों की तुलना में 10 से 15 गुणा ज्यादा पाया जाता है। इसमें मौजूद टेनिन जो एक एस्ट्रीजेन्ट के रूप में दर्द तथा बुखार के निवारण हेतु प्रयुक्त होता है भी पाया जाता है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी बताया गया कि भमोरा में मौजूद टेनिन कुनैन के विकल्प के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। पारम्परिक रूप से भी भमोरा की कुछ प्रजातियां पारम्परिक चाईनीज तथा कोरियन औषधीयों में जैसे- खांसी, फ्लू, मुत्र रोग, अतिसार रोगों के निवारण के साथ-साथ लीवर तथा किडनी के बेहतर कार्यप्रणाली के लिए भी प्रयुक्त होता है।

जहॉ तक भमोरे के फल का पोष्टिक गुणवता की बात की जाय तो इसमें प्रोटीन-2.58 प्रतिशत, फाइबर-10.43 प्रतिशत, वसा-2.50 प्रतिशत, पोटेशियम 0.46 मि0ग्रा0 तथा फासफोरस-0.07 मि0ग्रा0 प्रति 100 ग्राम तक पाये जाते है।

उत्तराखण्ड में पाये जाने वाले भमोरा तथा कई अन्य पोष्टिक एवं औषधीय रूप से महत्वपूर्ण जंगली उत्पादों का यदि विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कर इनकी आर्थिक क्षमता का आंकलन किया जाय तो यह प्रदेश के जंगली उत्पादों को विश्वभर में एक नई पहचान दिलाने में सक्षम है।

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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