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NEWSLIVE24x7 > Blog > Analysis > ‘कंगारू मातृत्व’ के सहारे बचाई जा सकती हैं लाखों नवजात ज़िन्दगियाँ
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‘कंगारू मातृत्व’ के सहारे बचाई जा सकती हैं लाखों नवजात ज़िन्दगियाँ

Rajesh Pandey
Last updated: June 8, 2021 9:06 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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फोटो इंटरनेट से लिया है
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने नवजात शिशुओं को, उनकी माताओं से अलग किए जाने के ख़तरों की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए आगाह किया है। एक नए अध्ययन में दिखाया गया है कि नवजात शिशुओं को उनकी माताओं के साथ त्वचा स्पर्श सुनिश्चित करने से, एक लाख 25 हज़ार तक ज़िन्दगियाँ बचाई जा सकती हैं।

Keeping women & babies together could save more than 125,000 👶 lives.

For babies born preterm or at low birthweight, kangaroo mother care (early, prolonged skin-to-skin contact with a parent & exclusive breastfeeding 🤱) is particularly critical.

👉 https://t.co/L5PXdTyj7u pic.twitter.com/molKXZRIXe

— World Health Organization (WHO) (@WHO) March 16, 2021

Contents
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने नवजात शिशुओं को, उनकी माताओं से अलग किए जाने के ख़तरों की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए आगाह किया है। एक नए अध्ययन में दिखाया गया है कि नवजात शिशुओं को उनकी माताओं के साथ त्वचा स्पर्श सुनिश्चित करने से, एक लाख 25 हज़ार तक ज़िन्दगियाँ बचाई जा सकती हैं।संयुक्त राष्ट्र समाचार में प्रकाशित रिपोर्ट में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के हवाले से कहा गया है कि बहुत से ऐसे मामले देखे गए हैं कि अगर किसी महिला को “कोविड-19” वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो गई है या संक्रमण होने का सन्देह है, तो भी नवजात शिशुओं को, उनकी माताओं से अलग किया जा रहा है।ऐसा किए जाने से, ऐसे शिशुओं के लिए, मौत का उच्च जोखिम और जीवन भर की स्वास्थ्य जटिलताओं का जोखिम पैदा किया जा रहा है।विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझीदारों द्वारा किया गया ये नया शोध, द लैन्सेट पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कंगारू मातृत्व (माँ-बच्चे का त्वचा स्पर्श) देखभाल सुनिश्चित कराकर, एक लाख 25 हज़ार नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।ये तरीक़ा ख़ासतौर से उन नवजात शिशुओं के लिये बहुत अहम है जिनका जन्म समय से पहले ही यानि 37 सप्ताहों के गर्भ के बाद ही हो जाता है, या जिन बच्चों का वज़न ढाई किलोग्राम से भी कम होता है।ऐसे मामलों में, कंगारू मातृत्व का तरीक़ा अपनाकर, नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में 40 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। साथ ही, हाइपोथर्मिया के मामलों में 70 प्रतिशत, और गम्भीर संक्रमण होने के मामलों में 65 प्रतिशत की कमी देखी गई है।रिपोर्ट लिखने वालों में शामिल, मलावी के स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य मामलों की निदेशक डॉक्टर क्वीन ड्यूब ने फ़ायदे गिनाते हुए कहा है, “कंगारू मातृत्व देखभाल, छोटे व बीमार नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिये सबसे ज़्यादा असरदार तरीक़ों में से एक है।”“हमारे विश्लेषण के अनुसार, नवजात शिशु को, कोविड-19 का संक्रमण लगने के ख़तरे की तुलना में, ये जोखिम कहीं ज़्यादा गम्भीर हैं।”विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफ़ारिश है कि माताओं को, अपने नवजात शिशुओं को, उन्हें जन्म देने के समय से ही, अपने साथ अपने कमरे में रखना चाहिए।साथ ही, नवजात शिशुओं को माँ का दूध पिलाने के साथ-साथ, उनके साथ त्वचा स्पर्श भी सुनिश्चित करना चाहिए, यहाँ तक कि कोविड-19 के संक्रमण का सन्देह या पुष्टि होने के मामले में भी। इनके अलावा, संक्रमण की रोकथाम वाले उपायों को भी समर्थन दिया जाना चाहिए। साभार- संयुक्त राष्ट्र समाचार
संयुक्त राष्ट्र समाचार में प्रकाशित रिपोर्ट में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के हवाले से कहा गया है कि बहुत से ऐसे मामले देखे गए हैं कि अगर किसी महिला को “कोविड-19” वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो गई है या संक्रमण होने का सन्देह है, तो भी नवजात शिशुओं को, उनकी माताओं से अलग किया जा रहा है।
ऐसा किए जाने से, ऐसे शिशुओं के लिए, मौत का उच्च जोखिम और जीवन भर की स्वास्थ्य जटिलताओं का जोखिम पैदा किया जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझीदारों द्वारा किया गया ये नया शोध, द लैन्सेट पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कंगारू मातृत्व (माँ-बच्चे का त्वचा स्पर्श) देखभाल सुनिश्चित कराकर, एक लाख 25 हज़ार नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।
ये तरीक़ा ख़ासतौर से उन नवजात शिशुओं के लिये बहुत अहम है जिनका जन्म समय से पहले ही यानि 37 सप्ताहों के गर्भ के बाद ही हो जाता है, या जिन बच्चों का वज़न ढाई किलोग्राम से भी कम होता है।
ऐसे मामलों में, कंगारू मातृत्व का तरीक़ा अपनाकर, नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में 40 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। साथ ही, हाइपोथर्मिया के मामलों में 70 प्रतिशत, और गम्भीर संक्रमण होने के मामलों में 65 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
रिपोर्ट लिखने वालों में शामिल, मलावी के स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य मामलों की निदेशक डॉक्टर क्वीन ड्यूब ने फ़ायदे गिनाते हुए कहा है, “कंगारू मातृत्व देखभाल, छोटे व बीमार नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिये सबसे ज़्यादा असरदार तरीक़ों में से एक है।”
“हमारे विश्लेषण के अनुसार, नवजात शिशु को, कोविड-19 का संक्रमण लगने के ख़तरे की तुलना में, ये जोखिम कहीं ज़्यादा गम्भीर हैं।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफ़ारिश है कि माताओं को, अपने नवजात शिशुओं को, उन्हें जन्म देने के समय से ही, अपने साथ अपने कमरे में रखना चाहिए।
साथ ही, नवजात शिशुओं को माँ का दूध पिलाने के साथ-साथ, उनके साथ त्वचा स्पर्श भी सुनिश्चित करना चाहिए, यहाँ तक कि कोविड-19 के संक्रमण का सन्देह या पुष्टि होने के मामले में भी। इनके अलावा, संक्रमण की रोकथाम वाले उपायों को भी समर्थन दिया जाना चाहिए। साभार- संयुक्त राष्ट्र समाचार

 

Key Words- kangaroo mother care, United Nation Organization, World Health Organization, babies born preterm or at low birthweight, prolonged skin-to-skin contact with a parent , COVID-19, जन्म- मृत्यु दर, नवजात शिशु, जच्चा एवं बच्चा, विश्व स्वास्थ्य संगठन, त्वचा स्पर्श, कोविड-19 संक्रमण, हाइथर्मियां, कंगारू मातृत्व

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TAGGED:babies born preterm or at low birthweightCOVID-19kangaroo mother careprolonged skin-to-skin contact with a parentUnited Nation Organizationworld health organizationकंगारू मातृत्वकोविड-19 संक्रमणजच्चा एवं बच्चाजन्म- मृत्यु दरत्वचा स्पर्शनवजात शिशुविश्व स्वास्थ्य संगठनहाइथर्मियां
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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