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नरेंद्रनगर की महिलाएं प्राकृतिक रेशों से बनाएंगी आकर्षक उत्पाद

नेशनल जूट बोर्ड के सहयोग से 14 दिन के जूट चोटी वर्क डिजाइनिंग प्रशिक्षण का समापन

नरेंद्रनगर। नरेंद्रनगर के टाउनहॉल में महिलाओं ने जूट एवं भीमल के रेशों से हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद बनाने सीखे। भारतीय ग्रामोत्थान संस्था, ढालवाला ने केंद्र सरकार के नेशनल जूट बोर्ड के सहयोग से 14 दिन के जूट चोटी वर्क डिजाइनिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। बुधवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर महिलाओं ने अपने अनुभवों का साझा किया।

केंद्रीय वस्र मंत्रालय के अधीन जूट रिसोर्स एवं प्रोडक्शन सेंटर के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 30 महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने भारतीय ग्रामोत्थान संस्था की प्रमुख प्रशिक्षक बीना पुंडीर की देखरेख में प्रशिक्षण हासिल किया। महिलाओं को जूट बोर्ड की मास्टर ट्रेनर माधुरी, जो कि जूट सहित अन्य नेचुरल फाइबर से विभिन्न उत्पाद तैयार कराने की विशेषज्ञ हैं, ने प्रशिक्षण दिया।

कोलकाता से आईं माधुरी ने महिलाओं को बताया कि, वो कैसे अपने आसपास मिलने वाले प्राकृतिक रेशों से स्वरोजगार हासिल करके आत्मनिर्भर हो सकती हैं। उन्होंने महिलाओं को विभिन्न डिजाइन के माध्यम से उत्पादों को आकर्षक लुक देना दिखाया। उनका कहना था, बाजार में विभिन्न प्रकार और डिजाइन के उत्पाद उपलब्ध हैं, हमारे उत्पाद प्रतिस्पर्धा के दौर में सबसे अलग कैसे दिखें, इस पर ध्यान देना होगा। बाजार में क्या कुछ नया चल रहा है, उस ट्रेंड को भी समझना चाहिए। आपको क्वालिटी वर्क पर ध्यान देना होगा।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने चप्पलें, बास्केट, वॉल हैंगिंग क्राफ्ट डिजाइन, फ्लावर पॉट, डोर मैट, फाइल फोल्डर, ट्रे, प्लांट पॉट सहित कई तरह के उत्पाद बनाए। इन सभी डिजाइन पर काम करने से पहले रेशों की चोटियां बनाना सीखा।

समापन अवसर पर, यूएसए से आए सॉफ्टवेयर एवं मार्केटिंग एक्सपर्ट दिनेश गोयल ने कहा, महिलाएं बहुत शानदार कार्य कर रही हैं। यह प्रशिक्षण तभी सफल होगा, जब महिलाएं यहां हासिल ज्ञान से आत्मनिर्भर बनें। सभी को नेचुरल फाइबर से जुड़े हैंडीक्राफ्ट के उत्पादों पर फोकस करना होगा। एक तो यह प्रकृति सम्मत है और दूसरा पूरी दुनिया में इन उत्पादों की मांग है।

यूएसए से आईं सीमा गोयल ने महिलाओं के कार्यों की सराहना की और उनको नेचुरल फाइबर से एक से बढ़कर एक डिजाइन वाले हैंडीक्राफ्ट उत्पाद बनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा, अमेरिका लौटकर वहां की महिलाओं को आपकी उद्यमिता के बारे में जानकारी देंगे।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी प्रीतम सिंह ने कहा, स्वयं सहायता समूहों को कौशल विकास के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिये स्वरोजगार से जोड़ने की पहल सराहनीय है। नगर पालिका, एनयूएलएम (राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन) के तहत इस दिशा में कार्य कर रही है।

प्रशिक्षण हासिल करने वालीं वंदना कर्णवाल बताती हैं, जब पहले दिन ट्रेनिंग में आईं, तो उनको बहुत ज्यादा समझ में नहीं आया। उनका उद्देश्य ट्रेनिंग लेकर स्वरोजगार हासिल करना नहीं था, क्योंकि उनके पास पहले से एक शॉप है। पर, नेचुरल फाइबर और इसके हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट के बारे में मिली जानकारियों ने, मुझे काफी प्रभावित किया। मैं, नेचुरल फाइबर से उत्पाद बनाना सीख गई हूं और इसको स्वरोजगार का जरिया बनाने के लिए प्रेरणा मिली है। सबसे पहले तो मैं, कुछ उत्पाद परिवार, रिश्तेदारों को उपहार देने के लिए तैयार करूंगी। फिर उत्पादों को बिक्री के लिए बनाऊंगी। हम सभी महिलाएं इस दिशा में कार्य करेंगी।

भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के निदेशक अनिल चंदोला ने कहा, संस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कौशल विकास को बढ़ावा देना है। अभी तक संस्था ढाई हजार से अधिक महिलाओं को प्राकृतिक रेशों पर आधारित उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दे चुकी है। संस्था के साथ लगभग साढ़े तीन सौ स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। हम चाहते हैं, हर महिला आत्मनिर्भर हो। उन्होंने कहा, प्रशिक्षण लेकर महिलाएं प्रोडक्ट तैयार करें, हम उनके उत्पादों को खरीदेंगे। इससे उत्पादकों के सामने प्रोडक्ट की मार्केटिंग की समस्या पेश नहीं आएगी। संस्था, महिलाओं को भविष्य में तकनीकी सहयोग प्रदान करती रहेगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर महिलाओं को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के जनसंपर्क अधिकारी श्री कुकसाल ने किया।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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