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एम्स ऋषिकेश अब मेडिकल टूरिज्म पर काम करेगा

इंजीनियरिंग और प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न देशों के उच्च प्रतिनिधिमंडल को एम्स की कार्यकारी निदेशक ने जानकारी दी

ऋषिकेश। न्यूज लाइव

इंजीनियरिंग और प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न देशों के उच्च प्रतिनिधिमंडल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत सोमवार को एम्स ऋषिकेश का दौरा कर संस्थान की ढांचागत और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को समझा। इस दौरान संस्थान की कार्यकारी निदेशक ने टीम को बताया एम्स शीघ्र ही मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करेगा।

सोमवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, दिल्ली से आई विदेशी प्रतिनिधियों की टीम ने एम्स ऋषिकेश की ढांचागत व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की बारीकियां समझीं। उन्होंने बड़े संस्थान के निर्माण, ढांचागत व्यवस्थाओं और इसके संचालन में आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों को नजदीक से जाना और संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी जानकारी हासिल की।

टीम ने संस्थान के टेलिमेडिसिन विभाग, स्किल लैब, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, अस्पताल परिसर, आईसीयू एरिया, ऑपरेशन थियेटर, ट्रॉमा सेन्टर, आयुष विभाग, मिलट कैफे और हॉस्टल एरिया आदि का राउंड भी लिया और संस्थान के संचालन को करीब से जाना।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने टीम सदस्यों को बताया कि एम्स में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार विकसित किया जा रहा है और अस्पताल में शीघ्र ही एक अलग ट्रांसप्लांट डिवीजन कार्य करना शुरू करेगा।

उन्होंने बताया कि संस्थान मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में भी योजना तैयार कर रहा है। भविष्य में ऋषिकेश आने वाले लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

संस्थान के इंजीनियरिंग विभाग के बारे में कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि इस विभाग के अधीन एक बायोमेडिकल डिवीजन कार्यरत है, जो विभिन्न उपकरणों की देखरेख और मरम्मत का कार्य करती है।

उन्होंने मिलट कैफे में उपलब्ध कराए जा रहे मोटे अनाज के भोज्य पदार्थों के लाभ गिनाए और बताया कि मोटा अनाज किस तरह से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

प्रतिनिधिमंडल में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की एसोसिएट प्रोफेसर और डॉ. कुसुम लता, डॉ. पवन तनेजा, डॉ. रोमा मित्रा सहित मारीशश, फिलीपींस, तंजानिया, युगाण्डा, फिजी, श्रीलंका, भूटान, इंडोनेशिया, केन्या, जमैका, ईथियोपिया आदि देशों के प्रतिनिधि शामिल थे।

विजिट के दौरान संस्थान के प्रभारी डीन एकेडेमिक प्रो. शैलेन्द्र हांडू, उपनिदेशक (प्रशासन) ले. कर्नल अमित पराशर, सीएफएम की विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना, सब डीन डॉ. वंदना धींगरा, डीएमएस डॉ. भारत भूषण, डॉ. नरेन्द्र कुमार, डॉ. मधुर उनियाल, डॉ. पूजा भदौरिया, जनसंपर्क अधिकारी संदीप कुमार सिंह, पीपीएस विनीत कुमार सिंह, राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।

 

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Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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