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लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए वोटर जागरूकता पर जोर

देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम ने सचिवालय में नोडल अधिकारियों के साथ निर्वाचन संबंधी तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत को बढ़ाने के लिए वोटर जागरूकता कार्यक्रम पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदान जागरूकता के लिए स्वीप गतिविधियों के साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया का सहयोग लिया जाए। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को वोटर जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दी गई समय-सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी की जाएं।
सीईओ ने कहा कि सिक्योरिटी मैनेजमेंट प्लान और आयोग के मानकों के अनुरूप स्टेट डिप्लॉयमेंट प्लान बना लिया जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ.पुरुषोत्तम ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सी विजिल जैसी अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। लोगों तक इसकी जानकारी अधिक से अधिक पहुंचाई जाए। वोट प्रतिशत को बढ़ाने के लिए बूथ वार रणनीति बनाई जाए। बूथ स्तरीय जागरूकता समूहों को सक्रिय किया जाए।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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